उन्नाव कांड की पीड़िता की गुहार: 10 जनपथ पहुंचकर राहुल गांधी से मुलाकात, प्रधानमंत्री से मिलने की भी जताई इच्छा

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 24 दिसंबर

उन्नाव बलात्कार कांड एक बार फिर देश की अंतरात्मा को झकझोरता नजर आया, जब इस जघन्य अपराध की पीड़िता अपनी मां के साथ कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलने 10 जनपथ पहुंचीं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दोषी पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित किए जाने के फैसले के बाद देशभर में आक्रोश और सवालों का दौर जारी है।पीड़िता का कहना है कि यह केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि न्याय, सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई है, जिसे वह अंतिम सांस तक लड़ने को मजबूर हैं।“

न्याय की उम्मीद लेकर आई हूं”10 जनपथ पहुंचने के दौरान पीड़िता ने भावुक शब्दों में कहा—“मैं राहुल गांधी से मिलकर अपनी बात रखना चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि मेरी आवाज देश सुने। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलना चाहती हूं, ताकि उन्हें खुद बता सकूं कि एक पीड़िता किन हालात से गुजरती है।”उनकी आंखों में थकान थी, लेकिन शब्दों में अब भी न्याय की उम्मीद झलक रही थी।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा दर्द दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सजा निलंबित किए जाने के फैसले ने पीड़िता और उसके परिवार के जख्मों को एक बार फिर हरा कर दिया है।परिवार का कहना है कि—वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई जान का खतरा सामाजिक दबाव और मानसिक पीड़ा इन सबके बावजूद जब दोषी को राहत मिलती है, तो न्याय व्यवस्था पर भरोसा डगमगाने लगता है।

राजनीतिक और सामाजिक मायने

उन्नाव कांड केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सत्ता, अपराध और पीड़िता की असहायता का प्रतीक बन चुका है।राहुल गांधी से मुलाकात को राजनीतिक चश्मे से देखने के साथ-साथ इसे एक पीड़िता की आखिरी उम्मीद के रूप में भी देखा जा रहा है—जहां वह चाहती है कि देश के शीर्ष नेतृत्व तक उसकी पीड़ा पहुंचे।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार—“जब एक पीड़िता को बार-बार सड़क पर उतरकर न्याय की गुहार लगानी पड़े, तो यह केवल व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है।

”प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा:

एक प्रतीकात्मक अपील पीड़िता द्वारा प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा जताना महज औपचारिकता नहीं है। यह उस विश्वास की तलाश है, जिसमें वह चाहती है कि—देश का सर्वोच्च नेतृत्व उसकी बात सुनेन्याय व्यवस्था में भरोसा फिर से कायम हो भविष्य में किसी और बेटी को यह रास्ता न अपनाना पड़े

निष्कर्ष:

न्याय की राह अब भी कठिन उन्नाव कांड की पीड़िता का 10 जनपथ पहुंचना इस बात का संकेत है कि कानून की किताबों से आगे भी एक इंसानी संघर्ष चलता रहता है।यह मामला आज भी सवाल पूछता है—

क्या सजा निलंबन से पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित होती है?क्या न्याय केवल फैसले तक सीमित है, या पीड़िता के जीवनभर के डर की जिम्मेदारी भी सिस्टम की है?

जब तक इन सवालों का ठोस जवाब नहीं मिलता, तब तक उन्नाव की यह आवाज़ देश के लोकतंत्र को बार-बार आईना दिखाती रहेगी।

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