बी के झा
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पटना/नालंदा, 3 अगस्त
बिहार में अपराध की घटनाओं को लेकर एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर गंभीर बहस छिड़ गई है। नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र के देवीसराय वार्ड संख्या-21 में देर रात करीब एक दर्जन हथियारबंद डकैतों ने बीज व्यवसायी राजीव रंजन के घर धावा बोलकर लगभग 1 करोड़ 15 लाख रुपये की संपत्ति लूट ली। आरोप है कि बदमाशों ने पूरे परिवार को बंधक बनाया, विरोध करने पर मारपीट की, हथियार के बल पर जान से मारने की धमकी दी तथा घर की महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार भी किया।
घटना के बाद पूरे इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है तथा सीसीटीवी फुटेज, एफएसएल और डॉग स्क्वॉड की मदद से अपराधियों की तलाश की जा रही है।
छत के रास्ते घर में घुसे बदमाश, घंटों चलता रहा आतंक
पीड़ित परिवार के अनुसार रात के समय लगभग 12 हथियारबंद अपराधी छत के रास्ते घर में दाखिल हुए। सबसे पहले घर के बुजुर्ग को अपने कब्जे में लिया गया। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों के हाथ-पैर बांध दिए गए तथा उनके मुंह पर टेप चिपका दी गई। विरोध करने पर मारपीट की गई और हथियार दिखाकर पूरे परिवार को चुप रहने की धमकी दी गई।इसके बाद अपराधियों ने अलमारी और गोदरेज की चाबियां लेकर करीब 45 लाख रुपये नकद, 70 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी एवं हीरे के आभूषण लेकर फरार हो गए।
महिलाओं से अभद्रता के आरोप ने बढ़ाई गंभीरता
पीड़ित परिवार का आरोप है कि वारदात के दौरान घर की महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार भी किया गया। इस आरोप ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में असुरक्षा की भावना को गहरा करती हैं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।
थाना महज डेढ़ किलोमीटर दूर, फिर भी नहीं पहुंची मदद
सबसे अधिक चर्चा इस बात की हो रही है कि घटना स्थल से दीपनगर थाना लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बावजूद इसके अपराधी काफी देर तक घर में रहे और आराम से फरार हो गए। इसे लेकर स्थानीय लोग पुलिस गश्ती व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
पुलिस जांच में जुटी, वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा रहे
घटना की सूचना मिलते ही सदर डीएसपी, दीपनगर थानाध्यक्ष एवं अन्य अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। एफएसएल और डॉग स्क्वॉड की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है तथा अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।
पहले भी दो बार हो चुकी है चोरी
स्थानीय लोगों के अनुसार इसी परिवार के घर इससे पहले भी दो बार चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। लगातार तीसरी बार अपराधियों के निशाने पर आने से क्षेत्र के लोगों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
शिक्षाविद की बेबाक टिप्पणी: “सुशासन का असली पैमाना जनता की सुरक्षा, सत्ता नहीं व्यवस्था जवाब दे
“नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने नालंदा की इस घटना को बिहार की कानून-व्यवस्था के लिए “गंभीर चेतावनी” बताते हुए कहा कि यह केवल एक परिवार के साथ हुई डकैती नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की प्रभावशीलता की वास्तविक परीक्षा है। उन्होंने कहा कि जब थाना से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर हथियारबंद अपराधी घंटों तक एक परिवार को बंधक बनाकर करोड़ों की लूट करें, महिलाओं के साथ अभद्रता करें और बिना किसी भय के फरार हो जाएं, तो यह आम नागरिकों के मन में सुरक्षा व्यवस्था के प्रति विश्वास को कमजोर करता है।उन्होंने कहा, “बिहार की जनता ने वर्षों तक ‘सुशासन’ के नाम पर सरकारों को जनादेश दिया। आज यदि अपराधी खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं, तो सत्ता में बैठे लोगों को आत्ममंथन करना चाहिए।
सरकार का मूल्यांकन भाषणों और दावों से नहीं, बल्कि इस बात से होता है कि आम नागरिक अपने घर में कितना सुरक्षित है।
“शिक्षाविद ने आगे कहा कि भाजपा नेतृत्व ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को राज्य की बागडोर इस विश्वास के साथ सौंपी थी कि प्रशासनिक नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। “लेकिन यदि ऐसी जघन्य घटनाएं लगातार सामने आती रहीं, तो जनता स्वाभाविक रूप से सरकार की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता पर प्रश्न उठाएगी। सत्ता का सबसे बड़ा धर्म नागरिकों के जीवन, सम्मान और संपत्ति की रक्षा करना है; यदि यही दायित्व कमजोर पड़ता दिखाई दे, तो लोकतंत्र में जनता सवाल पूछने का अधिकार रखती है।
“उन्होंने दावा किया कि बिहार में बढ़ते अपराध, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और प्रशासनिक शिथिलता अब केवल विपक्ष के राजनीतिक आरोप नहीं रह गए हैं, बल्कि आम नागरिकों की रोजमर्रा की चिंता बनते जा रहे हैं। उनके अनुसार हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और उपचुनाव परिणामों ने भी संकेत दिया है कि मतदाता कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर पहले की तुलना में अधिक संवेदनशील और मुखर हुए हैं।शिक्षाविद ने यह भी अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक राय व्यक्त की कि यदि सरकार अपराध नियंत्रण, पुलिस सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं देती, तो भविष्य के चुनावों में मतदाता नए राजनीतिक विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर जैसे उभरते राजनीतिक चेहरे इसी जनभावना को अपनी राजनीति का आधार बनाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि यह उनका निजी राजनीतिक विश्लेषण है।
उन्होंने अंत में कहा, “बिहार की जनता को किसी दल विशेष से नहीं, बल्कि ऐसी शासन व्यवस्था से अपेक्षा है जिसमें अपराधी कानून से डरें और आम नागरिक बिना भय के अपने घर में चैन की नींद सो सके। यदि सरकार इस मूल दायित्व को प्रभावी ढंग से निभाती है, तभी सुशासन का दावा सार्थक माना जाएगा।
“नोट: उपर्युक्त विचार संबंधित शिक्षाविद के व्यक्तिगत हैं। राज्य सरकार का कहना है कि पुलिस को अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए हैं और दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में अपराध की बड़ी घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रह जातीं, बल्कि चुनावी राजनीति का भी प्रमुख मुद्दा बन जाती हैं। उनका कहना है कि विपक्ष इन घटनाओं को सरकार की प्रशासनिक विफलता के रूप में प्रस्तुत करता है, जबकि सत्ता पक्ष अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई का दावा करता है। आने वाले समय में ऐसी घटनाएं राजनीतिक बहस को और तीखा कर सकती हैं।
कानूनविदों की टिप्पणी
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यदि महिलाओं के साथ अभद्रता और हथियार के बल पर बंधक बनाने के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो आरोपियों पर डकैती, आपराधिक षड्यंत्र, गैरकानूनी बंधक बनाना, मारपीट, महिलाओं की गरिमा भंग करने तथा शस्त्र अधिनियम सहित भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित विवेचना और शीघ्र न्याय अत्यंत आवश्यक है ताकि समाज में कानून का विश्वास बना रहे।
समाजसेवी संगठनों की प्रतिक्रिया
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाएं आम लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा कर रही हैं। उन्होंने सरकार से रात्रि गश्त बढ़ाने, संवेदनशील इलाकों में पुलिस की सक्रियता बढ़ाने तथा पीड़ित परिवार को सुरक्षा और मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की।
स्थानीय लोगों में भय और नाराजगी
देवीसराय और आसपास के निवासियों का कहना है कि रात के समय पुलिस की गश्त प्रभावी नहीं दिखती। लोगों ने क्षेत्र में स्थायी पुलिस पेट्रोलिंग, सीसीटीवी नेटवर्क का विस्तार और अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की। कई लोगों ने कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आम नागरिकों का पुलिस पर विश्वास कमजोर हो सकता है।
विपक्ष का हमला
विपक्षी दलों के नेताओं ने घटना को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम नागरिक स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही तय करने और अपराध नियंत्रण के लिए ठोस रणनीति लागू करने की मांग की।
सरकार का पक्ष
सरकारी सूत्रों का कहना है कि पुलिस को अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का दावा है कि वैज्ञानिक जांच, तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा। सरकार का कहना है कि अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल
नालंदा जैसी ऐतिहासिक और संवेदनशील धरती पर दिन-ब-दिन बढ़ती बड़ी आपराधिक घटनाएं यह सवाल छोड़ रही हैं कि क्या अपराधियों में कानून का भय कम हुआ है, या फिर पुलिस व्यवस्था को नई रणनीति और अधिक संसाधनों की आवश्यकता है?
इस घटना की जांच और अपराधियों की गिरफ्तारी केवल एक केस का खुलासा भर नहीं होगी, बल्कि बिहार की कानून-व्यवस्था पर जनता के विश्वास की भी परीक्षा होगी।
