बी के झा
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नई दिल्ली, 15 अगस्त
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में हुए ध्वजारोहण समारोह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के अपमान का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि सोनिया गांधी केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मंगाने की बात कर रही थीं।
क्या है पूरा मामला?
वायरल वीडियो में वंदे मातरम् के तीसरे और चौथे छंद के दौरान सोनिया गांधी मल्लिकार्जुन खड़गे से कुछ कहती दिखाई देती हैं। इसी क्षण को लेकर सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि पूरा राष्ट्रगीत गाने पर आपत्ति जताई गई। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि वीडियो को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया गया है और किसी प्रकार से राष्ट्रगीत रुकवाने का प्रयास नहीं हुआ।
बीजेपी और एनडीए की प्रतिक्रिया
बीजेपी नेताओं ने इसे राष्ट्रभावना का अपमान बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति के कारण राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति असहज रहती है। एनडीए के कई नेताओं ने कहा कि वंदे मातरम् स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा है और इसका सम्मान प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है।
कांग्रेस का पक्ष


कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि सोनिया गांधी केवल खड़गे जी के बैठने की व्यवस्था को लेकर बात कर रही थीं। अशोक गहलोत ने भी कहा कि यह एक अनावश्यक राजनीतिक विवाद बनाया गया है।
वरिष्ठ शिक्षाविद एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं की विशेष टिप्पणी
इस पूरे घटनाक्रम पर बातचीत में वरिष्ठ शिक्षाविद एवं वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इसे भारतीय राजनीति के व्यापक वैचारिक संघर्ष से जोड़ते हुए कहा:“हमारी दृष्टि में वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत है। यदि किसी राष्ट्रीय पर्व पर ऐसा दृश्य सामने आता है जिससे भ्रम या असहजता उत्पन्न हो, तो राजनीतिक दलों को तत्काल स्पष्टता देनी चाहिए।”
उन्होंने आगे अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा:“नेहरू–गांधी परिवार पर वर्षों से बहुसंख्यक समाज की सांस्कृतिक भावनाओं से दूरी रखने के आरोप लगते रहे हैं। आज का भारत पहले जैसा नहीं है; 2014 के बाद बहुसंख्यक समाज अधिक संगठित और राष्ट्रभावना के प्रश्नों पर मुखर हुआ है।”
अखिलेश यादव के वंदे मातरम् संबंधी वाले बयानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा:“अखिलेश यादव को पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिवर्तन से सबक लेना चाहिए। उनके अनुसार बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सार्वजनिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पूर्ण छंद का गायन अधिक प्रमुखता से होने लगा, जिसे वे सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के उभार का प्रतीक मानते हैं।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह उनका वैचारिक विश्लेषण है और लोकतंत्र में ऐसे विषयों पर मतभेद स्वाभाविक हैं।
पत्रकार बी के झा का दृष्टिकोण (विश्लेषण)
मेरे विचार में स्वतंत्रता दिवस किसी दल का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की राष्ट्रीय अस्मिता का पर्व है। वंदे मातरम् उन अमर बलिदानियों की वाणी है जिन्होंने मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। इसलिए राष्ट्रीय प्रतीकों पर उठने वाला प्रत्येक विवाद अत्यंत संवेदनशील हो जाता है।यदि कांग्रेस का दावा सत्य है कि केवल कुर्सी मंगाने की बात हो रही थी, तो उसे प्रमाण सहित जनता के समक्ष रखना चाहिए।
वहीं यदि राजनीतिक लाभ के लिए अधूरी वीडियो क्लिप प्रसारित की गई है, तो वह भी लोकतांत्रिक मर्यादा के विपरीत है। राष्ट्रहित में सत्य, पारदर्शिता और राष्ट्रीय सम्मान—तीनों सर्वोपरि होने चाहिए।
निष्कर्ष
फिलहाल यह मामला आरोप और प्रत्यारोप के बीच खड़ा है। उपलब्ध वीडियो की अलग-अलग व्याख्याएँ की जा रही हैं, जबकि कांग्रेस और बीजेपी दोनों अपने-अपने दावों पर कायम हैं।
अंतिम निष्कर्ष तथ्यों और प्रमाणों पर ही आधारित होना चाहिए, क्योंकि वंदे मातरम् का सम्मान भारत की साझा राष्ट्रीय विरासत से जुड़ा विषय है।

