बी के झा
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नई दिल्ली/मॉस्को, 15 अगस्त
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और समस्त भारतीय नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए भारत–रूस संबंधों को “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। पुतिन ने कहा कि विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और रूस दोनों देशों की मित्रता को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पुतिन का संदेश: भारत की तरक्की की खुलकर सराहना
अपने आधिकारिक बधाई संदेश में पुतिन ने कहा कि भारत ने आर्थिक विकास, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भारत और रूस का सहयोग अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करेगा।पुतिन ने कहा कि दोनों देशों की मित्रता केवल सरकारों के बीच नहीं, बल्कि दोनों देशों की जनता के बीच विश्वास और सम्मान पर आधारित है।
रूस के राजदूत का ‘जय हिंद’
भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने भी भारतीयों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना अवश्य साकार होगा। उन्होंने कहा कि रूस हर महत्वपूर्ण क्षेत्र—ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, शिक्षा और प्रौद्योगिकी—में भारत का विश्वसनीय साझेदार बना रहेगा। अपने संदेश का समापन उन्होंने “जय हिंद” और “भारत–रूस मित्रता अमर रहे” के साथ किया।
दुनिया से बधाइयों की बौछार
रूस के अलावा फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, नेपाल, भूटान, चीन सहित अनेक देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भारत को शुभकामनाएँ भेजीं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भारत के साथ आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन का संदेश केवल औपचारिक शुभकामना नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक भू-राजनीति में भारत की बढ़ती रणनीतिक अहमियत का संकेत है।विश्लेषकों के अनुसार भारत आज अमेरिका, रूस, यूरोप और पश्चिम एशिया—सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलित कूटनीति अपनाकर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। यही कारण है कि वैश्विक शक्तियाँ भारत को केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि निर्णायक वैश्विक साझेदार के रूप में देख रही हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का आकलन
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत–रूस संबंधों की सबसे बड़ी ताकत रक्षा सहयोग है। एस-400 वायु रक्षा प्रणाली, ब्रह्मोस मिसाइल, परमाणु पनडुब्बी सहयोग और सैन्य तकनीक हस्तांतरण जैसे अनेक क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी दशकों से विश्वास का आधार रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और संयुक्त रक्षा उत्पादन दोनों देशों के संबंधों का नया अध्याय बन सकते हैं।
शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी संस्थाओं की टिप्पणी
वरिष्ठ शिक्षाविदों का कहना है कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा केवल आर्थिक शक्ति से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, युवा जनसंख्या और ज्ञान आधारित विकास मॉडल से भी बढ़ी है।अंतरराष्ट्रीय समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने कहा कि भारत और रूस को जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाना चाहिए, जिससे वैश्विक दक्षिण के देशों को लाभ मिल सके।
भारत सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार के सूत्रों ने पुतिन के संदेश को भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और वैश्विक नेतृत्व की स्वीकार्यता का प्रतीक बताया। सरकार का कहना है कि भारत सभी प्रमुख देशों के साथ “राष्ट्रहित सर्वोपरि” की नीति पर संबंधों को आगे बढ़ा रहा है।वहीं विपक्षी दलों ने भी रूस की शुभकामनाओं का स्वागत करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति दलगत राजनीति से ऊपर होनी चाहिए और राष्ट्रीय हितों के प्रश्न पर सभी राजनीतिक दल एकजुट रहने चाहिए।
पाकिस्तान को भी भेजा संदेश
गौरतलब है कि रूस ने 14 अगस्त को पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर भी राष्ट्रपति पुतिन की ओर से बधाई संदेश भेजा था। उस संदेश में रूस–पाकिस्तान के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की बात कही गई थी।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की पाकिस्तान से बढ़ती आर्थिक बातचीत के बावजूद उसकी सबसे गहरी और व्यापक रणनीतिक साझेदारी आज भी भारत के साथ ही बनी हुई है।
निष्कर्ष
स्वतंत्रता दिवस पर व्लादिमीर पुतिन का संदेश स्पष्ट संकेत देता है कि भारत–रूस संबंध केवल ऐतिहासिक मित्रता तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक रणनीति का भी महत्वपूर्ण आधार हैं।
बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और संतुलित कूटनीति ने उसे उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है, जिनकी आवाज़ अब वैश्विक निर्णयों में निर्णायक मानी जा रही है।
