80वें स्वतंत्रता दिवस पर 75 मिनट तक बोले प्रधानमंत्री मोदी: ‘बड़े सपने ही विकसित भारत की नींव’, उपलब्धियों के साथ रखा 2047 का विजन

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 15 अगस्त

80वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 13वीं बार लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए 75 मिनट के भाषण में विकसित भारत, आत्मनिर्भरता, शिक्षा, तकनीक और राष्ट्रीय गौरव का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि “अब छोटे सपनों से काम नहीं चलेगा, 140 करोड़ भारतीयों को बड़े सपने देखने होंगे।”इस वर्ष का समारोह ऐतिहासिक इसलिए भी रहा क्योंकि पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण संस्करण गूंजा और देश ने उसके 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव भी मनाया।

भाषण की शुरुआत राष्ट्रभक्ति से

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ और तिरंगे के उल्लेख से करते हुए कहा कि आज हर घर, हर दिल और हर मन में तिरंगा बस चुका है। उन्होंने महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित सभी स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

विकसित भारत 2047: सबसे बड़ा राष्ट्रीय संकल्प

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का सबसे बड़ा सपना वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है। उनके अनुसार यह लक्ष्य किसी एक सरकार का नहीं, बल्कि 140 करोड़ नागरिकों की सामूहिक भागीदारी, परिश्रम और संकल्प से ही पूरा होगा।उन्होंने कहा कि जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला लोकतंत्र विकसित बनने का संकल्प लेता है, तो पूरी दुनिया भारत को नई दृष्टि से देखने लगती है।

छात्रों के लिए बड़ा ऐलान

प्रधानमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि देशभर के विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग प्लेटफ़ॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर और दूरदराज़ के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का अवसर मिल सके।शिक्षा को समान अवसर का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए उन्होंने तकनीक आधारित डिजिटल लर्निंग पर विशेष बल दिया।

12 वर्षों की उपलब्धियों का लेखा-जोखा

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पिछले 12 वर्षों के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज ‘फ्रैजाइल फाइव’ की छवि से निकलकर विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन चुका है।उन्होंने प्रमुख उपलब्धियाँ गिनाईं—- लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए।

रक्षा उत्पादन 4 गुना बढ़ा

खादी एवं ग्रामोद्योग 5 गुना बढ़ा।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग 7 गुना हुई।

रेलवे कोच निर्माण 21 गुना बढ़ा।

मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना पहुँचा।

इंटरनेट उपयोगकर्ता 4 गुना और डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़े।

सौर ऊर्जा क्षमता 2 GW से 160 GW तक पहुँची।

पाइप गैस नेटवर्क 70 शहरों से बढ़कर 700 शहरों तक विस्तारित हुआ।

राजनीतिक विश्लेषक: चुनावी भाषण नहीं, दीर्घकालिक विजन

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अजय त्रिपाठी का कहना है कि प्रधानमंत्री का यह संबोधन पारंपरिक उपलब्धियों की सूची से आगे बढ़कर 2047 तक के राष्ट्रीय एजेंडे को स्थापित करने का प्रयास है।उनके अनुसार, “मोदी ने राष्ट्रवाद, विकास और तकनीकी नेतृत्व—तीनों को एक ही राजनीतिक कथा में जोड़ने का प्रयास किया है। यह भाषण आने वाले वर्षों की नीति दिशा का संकेत भी देता है।

”शिक्षाविद: फ्री ऑनलाइन कोचिंग से बदल सकती है तस्वीर

प्रख्यात शिक्षाविद प्रो. रामनारायण झा ने कहा कि यदि निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग प्रभावी ढंग से लागू हुई तो ग्रामीण और गरीब परिवारों के लाखों विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में समान अवसर मिलेगा।उन्होंने कहा, “डिजिटल शिक्षा भारत में सामाजिक न्याय का नया माध्यम बन सकती है, बशर्ते इंटरनेट और उपकरणों की समान उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

”कानूनविद: विकास के साथ संवैधानिक संतुलन भी जरूरी

वरिष्ठ अधिवक्ता विनोद कुमार सिन्हा ने कहा कि आर्थिक प्रगति और डिजिटल विस्तार स्वागतयोग्य हैं, लेकिन डेटा सुरक्षा, निजता के अधिकार और समान अवसर जैसे संवैधानिक प्रश्नों पर भी समान गंभीरता आवश्यक होगी।उनका मत है कि विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि मजबूत संस्थाएँ और न्यायपूर्ण शासन भी है।

समाजसेवी संस्थाओं की प्रतिक्रिया

कई समाजसेवी संगठनों ने प्रधानमंत्री द्वारा गरीबी उन्मूलन, शिक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिए गए जोर का स्वागत किया। उनका कहना है कि यदि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे तो विकसित भारत का सपना वास्तविक रूप ले सकता है।संगठनों ने यह भी सुझाव दिया कि डिजिटल शिक्षा के साथ प्रत्येक गाँव में उच्च गति इंटरनेट और सामुदायिक डिजिटल अध्ययन केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए।

विपक्ष का पलटवार

कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री के भाषण को महत्वाकांक्षी बताते हुए कहा कि सरकार को बेरोजगारी, महँगाई, किसानों की आय और युवाओं के रोजगार पर ठोस आँकड़ों के साथ जवाब देना चाहिए।विपक्ष का कहना है कि बड़े सपनों के साथ ज़मीनी चुनौतियों का समाधान भी उतनी ही प्राथमिकता होना चाहिए, तभी विकसित भारत का लक्ष्य विश्वसनीय बनेगा।

निष्कर्ष

75 मिनट के इस संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाले दो दशक भारत के होंगे, यदि देश बड़े सपने देखने और उन्हें सामूहिक संकल्प से पूरा करने का साहस दिखाए।

समर्थकों के लिए यह विकसित भारत का घोषणापत्र है, जबकि विपक्ष इसे वादों की कसौटी पर परखने की बात कह रहा है।

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