बी के झा
मधुबनी बिहार, 17 अगस्त
बिहार के मधुबनी जिले में आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार युवक रौशन यादव की जेल के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटककर हुई मौत ने कानून-व्यवस्था, जेल प्रशासन और मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जेल प्रशासन इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या बता रहा है, जबकि मृतक के परिजनों का आरोप है कि यह सुनियोजित हत्या है।
घटना के बाद जिले में आक्रोश का माहौल है और निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग तेज हो गई है।
परिजनों का आरोप: गिरफ्तारी से मौत तक कई सवाल
परिजनों के अनुसार रौशन यादव को 27 मई को रहिका थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनका आरोप है कि गिरफ्तारी की लिखित सूचना परिवार को नहीं दी गई और कई दिनों तक थाने में रखकर उसके साथ मारपीट की गई। परिवार का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी।
प्रशांत किशोर पहुंचे, एसएसपी से की पारदर्शी जांच की मांग
घटना की जानकारी मिलने के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने परिजनों के साथ मधुबनी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से मुलाकात कर निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की।प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि परिवार के आरोप सही हैं तो यह केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है। उन्होंने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की न्यायिक निगरानी में जांच कराई जाए और दोषियों को किसी भी स्तर पर संरक्षण न मिले।
प्रशासन का पक्ष
एसएसपी ने परिजनों को आश्वस्त करते हुए कहा कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन के अनुसार चूंकि घटना जेल के भीतर हुई है, इसलिए डीएम स्तर से भी जांच कराई जा रही है।
समाजसेवी संस्थाओं का आरोप
कई स्थानीय समाजसेवी संगठनों और मृतक के रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि सरकार और जेल प्रशासन द्वारा की गई संस्थागत हत्या है। उन्होंने स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग करते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।
वरिष्ठ शिक्षाविद का बयान
नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने कहा: “जब से बिहार की बागडोर सम्राट चौधरी के हाथों में गई है, तब से पूरे बिहार में कानून-व्यवस्था लगभग समाप्त हो चुकी है। आज बिहार की व्यवस्था भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। पुलिस पर राजनीतिक दबाव बढ़ा है और कई स्थानों पर निचले अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों की बात तक नहीं सुनते।”
उन्होंने कहा कि मधुबनी के डीएम और एसएसपी की ईमानदार छवि रही है और अब पूरा बिहार इस बात पर नजर रखे हुए है कि वे इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष न्याय दिलाने में कितने सफल होते हैं।
कानूनविदों की राय
स्थानीय कानून विशेषज्ञों का कहना है कि हिरासत या जेल में होने वाली किसी भी संदिग्ध मौत की निष्पक्ष मजिस्ट्रेट जांच, पोस्टमार्टम और सभी साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण अनिवार्य है। उनका मानना है कि जांच पूरी होने से पहले आत्महत्या या हत्या—किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने घटना को लेकर राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि बिहार में हिरासत और जेल के भीतर हो रही संदिग्ध मौतें कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न हैं। उन्होंने उच्च स्तरीय न्यायिक जांच तथा मृतक परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।
अब जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल रौशन यादव की मौत को लेकर कई सवाल अनुत्तरित हैं। यह आत्महत्या है या हत्या, इसका स्पष्ट उत्तर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगा। पूरे मामले पर मधुबनी ही नहीं, बल्कि बिहार की राजनीतिक और सामाजिक निगाहें टिकी हुई हैं।
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