बी के झा
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मुजफ्फरपुर, बिहार, 17 अगस्त
सावन की पवित्र कांवड़ यात्रा उस समय मातम में बदल गई, जब बाबा गरीबनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए जा रहे 25 वर्षीय कांवड़िया गोलू कुमार की रविवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वारदात मुजफ्फरपुर के पारू थाना क्षेत्र स्थित देवरिया–जगरिया मुख्य मार्ग पर ब्रह्मपुर खखन गांव के पास हुई, जहां करीब 60 श्रद्धालुओं की टोली हर-हर महादेव के जयघोष के साथ आगे बढ़ रही थी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आगे डीजे बज रहा था और कांवड़िए नाचते-गाते चल रहे थे। गोलू अपनी बाइक से जत्थे के पीछे चल रहा था। इसी दौरान पीछे से आए बाइक सवार बदमाशों ने डीजे की तेज आवाज का फायदा उठाकर उसकी पीठ में गोली मार दी। गोली लगते ही वह सड़क पर गिर पड़ा। साथी श्रद्धालुओं ने उसे सरैया सीएचसी पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
दिन में मिली थी जान से मारने की धमकी
परिजनों का आरोप है कि रविवार दिन में गोलू की गांव के ही एक व्यक्ति से मारपीट हुई थी। उसी दौरान उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई थी। पुलिस अब इसी एंगल को हत्या की मुख्य वजह मानकर जांच कर रही है। घटनास्थल से एक खोखा बरामद किया गया है और एफएसएल टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं।
पुलिस क्या कह रही है?
एसडीपीओ सरैया अभिजीत कौर ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान एक युवक की गोली मारकर हत्या की गई है। दिन में हुई झड़प और धमकी की भी जांच की जा रही है। अपराधियों की पहचान के लिए तकनीकी अनुसंधान जारी है तथा जल्द गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।
सियासत गरमाई, विपक्ष ने सरकार को घेरा
घटना के बाद बिहार की राजनीति भी गर्म हो गई। राजद नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। उन्होंने कहा कि जब राज्य और केंद्र दोनों जगह भाजपा नेतृत्व वाली सरकारें हैं, तब भी कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही।
दूसरी तरफ जन सुराज के प्रशांत किशोर ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस शासन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हों, वहां आम नागरिक की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन जाती है।
विशेषज्ञों और समाज की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि धार्मिक यात्राओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा होती है।
कानूनविदों के अनुसार यदि पूर्व में मिली धमकी के बाद हत्या हुई है, तो यह सुनियोजित आपराधिक साजिश का मामला भी हो सकता है।
समाजसेवियों और शिक्षाविदों ने कहा कि कांवड़ यात्रा आस्था, अनुशासन और सामाजिक एकता का प्रतीक है। ऐसी घटनाएं समाज में भय का वातावरण पैदा करती हैं और प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर समीक्षा करनी चाहिए।
हिंदू संगठनों की मांग
स्थानीय हिंदू संगठनों और धर्माचार्यों ने दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी, कांवड़ मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती तथा संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी और निगरानी बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल
एक सप्ताह पहले मुजफ्फरपुर में डायल-112 वाहन की चपेट में आकर एक कांवड़िया की मौत हुई थी।
अब गोली मारकर हत्या की इस घटना ने फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या बिहार में आस्था की राह सुरक्षित है, या अपराधियों के हौसले कानून से कहीं अधिक मजबूत हो चुके हैं?
