बी के झा
NSK news Ind




लखीसराय, बिहार, 17 अगस्त
सावन के तीसरे सोमवार को बिहार के प्रसिद्ध अशोक धाम (इन्द्रदमनेश्वर महादेव मंदिर) में जलाभिषेक के लिए उमड़ी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था उस समय चीख-पुकार में बदल गई, जब सुबह करीब 6:45 बजे भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 14 लोग घायल हो गए। पूरा मंदिर परिसर देखते ही देखते मातम में बदल गया।
कैसे मची भगदड़?
जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और एडीएम नीरज कुमार के अनुसार, अशोक धाम हाल्ट पर एक ही समय में दोनों दिशाओं से ट्रेनें आने पर कुछ युवक अचानक दौड़ पड़े। इसी दौरान एक बिजली का पोल गिर गया और करंट फैलने की अफवाह फैल गई। जबकि प्रशासन का कहना है कि उस समय बिजली आपूर्ति बंद थी और तार सुरक्षित था। अफवाह ने कुछ ही सेकंड में हजारों लोगों को दहशत में धकेल दिया और भगदड़ मच गई।राहत और बचाव अभियानघटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत अभियान शुरू किया। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने जताया शोक
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घटना को अत्यंत हृदयविदारक बताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने घायलों के त्वरित और समुचित इलाज के निर्देश दिए तथा निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया।
विपक्ष का हमला
राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि सावन जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा की विफलता ने सात परिवारों की खुशियां छीन लीं। कांग्रेस और वाम दलों ने भी घटना की न्यायिक जांच तथा मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में धार्मिक आयोजनों में लगातार बढ़ती भीड़ के अनुपात में सुरक्षा ढांचा विकसित नहीं हुआ है। उनका कहना है कि आस्था के आयोजनों को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम मानकर वैज्ञानिक भीड़ प्रबंधन लागू करना होगा।
कानूनविदों की टिप्पणी
कानून विशेषज्ञों के अनुसार यदि जांच में लापरवाही, अपर्याप्त सुरक्षा या प्रशासनिक चूक सिद्ध होती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है। ऐसे मामलों में आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल का पालन अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
शिक्षाविद और समाजसेवी संस्थाओं की अपील
शिक्षाविदों ने कहा कि अफवाह से बचाव के लिए जनजागरूकता और आपातकालीन व्यवहार का प्रशिक्षण जरूरी है। समाजसेवी संस्थाओं ने मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर स्वयंसेवकों, मेडिकल टीम, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली और अलग प्रवेश-निकास मार्ग की व्यवस्था अनिवार्य करने की मांग की।
धर्माचार्यों की प्रतिक्रिया
हिन्दू धर्माचार्यों ने इसे अत्यंत पीड़ादायक घटना बताते हुए कहा कि भगवान शिव की आराधना का पर्व भय और अव्यवस्था का कारण नहीं बनना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से अफवाहों पर विश्वास न करने और प्रशासन से सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की।
अशोक धाम: करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्थाल
लखीसराय जिला मुख्यालय से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित अशोक धाम बिहार के प्रमुख शिवधामों में गिना जाता है। वर्ष 1977 में यहां पालकालीन विशाल शिवलिंग मिलने के बाद यह मंदिर देशभर के शिवभक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।
सबसे बड़ा सवाल
सवाल केवल एक हादसे का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जहां अफवाह कुछ ही क्षणों में सात जिंदगियां निगल लेती है।
क्या बिहार के बड़े धार्मिक स्थलों पर भीड़ प्रबंधन, आपदा तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था को अब नए सिरे से लागू किया जाएगा, या हर त्रासदी के बाद केवल जांच ही होती रहेगी?
