बी के झा
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श्रीनगर / न ई दिल्ली, 22 अगस्त
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के नेटवर्क और उसके सहयोगी तंत्र पर शिकंजा कसते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने शनिवार सुबह दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में दो स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई में सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भी एनआईए का सहयोग किया। जांच एजेंसी ने बिजबेहरा स्थित SICOP क्षेत्र और डूरू के क्रेरी गांव में तलाशी लेकर कई मोबाइल फोन व अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिनकी अब फॉरेंसिक जांच होगी।
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई एक चल रही राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी जांच का हिस्सा है। हालांकि एनआईए ने फिलहाल मामले के विवरण सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन शाम तक आधिकारिक बयान जारी होने की संभावना है।
किन ठिकानों पर हुई कार्रवाई?
एनआईए की पहली टीम ने बिजबेहरा के SICOP इलाके में कथित ड्रग तस्कर गुलाम नबी हजाम के आवास पर तलाशी ली। दूसरी टीम ने क्रेरी (डूरू) में सुहैल गनी भट के घर की गहन जांच की। तलाशी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए, जिनसे आतंकियों के संपर्क, वित्तीय लेन-देन और संचार नेटवर्क से जुड़े सुराग मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल सबूत क्यों है अहम ?
हाल के वर्षों में आतंकवादी संगठनों ने पारंपरिक संदेशवाहकों की जगह एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, क्लाउड स्टोरेज और डिजिटल भुगतान का अधिक उपयोग किया है। इसलिए जब्त किए गए मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच किसी भी आतंकी मॉड्यूल की संरचना, संपर्क सूत्र और स्थानीय सहयोगियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कठुआ में भी जारी है हाई अलर्ट
इस कार्रवाई से पहले गुरुवार को कठुआ जिले के बिलावर क्षेत्र में भी सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया था। उधमपुर–कठुआ सीमा से लगे जंगलों में संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुई थीं।स्थानीय ग्रामीणों ने दावा किया कि देर रात कुछ अज्ञात लोगों ने एक घर का दरवाजा खटखटाया। परिवार द्वारा दरवाजा न खोलने के बावजूद अगले दिन घर में रखा भोजन गायब मिला, जिससे घुसपैठ की आशंका और गहरा गई।
पुलिस का क्या कहना है?
कठुआ के पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) प्रीतपाल सिंह ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में नियमित तलाशी अभियान सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हैं।
“सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बनाए रखने के लिए ऐसे अभियान लगातार चलाए जाते हैं। संदिग्ध गतिविधि की हर सूचना को गंभीरता से लेकर जांच की जाती है।”
राजनीतिक–सुरक्षा विश्लेषण
अनंतनाग और कठुआ में लगातार हो रही कार्रवाइयाँ संकेत देती हैं कि सुरक्षा एजेंसियाँ अब केवल हथियारबंद आतंकियों पर नहीं, बल्कि टेरर इकोसिस्टम—यानी वित्तीय मदद, डिजिटल संचार, लॉजिस्टिक सपोर्ट और स्थानीय नेटवर्क—को भी निशाना बना रही हैं।
डिजिटल फॉरेंसिक जांच से मिलने वाले साक्ष्य आने वाले दिनों में घाटी में सक्रिय आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ और बड़ी कार्रवाई का आधार बन सकते हैं।
