बी के झा
NSK news Ind

चंडीगढ़, 24 अगस्त
चंडीगढ़ के सेक्टर-43 स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डे के पीछे संदिग्ध IED, विस्फोटक सामग्री और हथियार मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पुलिस ने मामले में तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से करीब 5 किलो जिलेटिन स्टिक, डेटोनेटर, पावर सोर्स, रिमोट ऑपरेटिंग सिस्टम, तार व इलेक्ट्रॉनिक सामग्री के अलावा एक पिस्टल, मैगजीन और पांच जिंदा कारतूस बरामद होने की बात सामने आई है।पुलिस ने सेक्टर-36 थाने में Explosive Substances Act और Arms Act की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तरनतारन के 19 वर्षीय लवप्रीत सिंह,
21 वर्षीय जसनप्रीत सिंह उर्फ जसनदीप
और अमृतसर के 19 वर्षीय प्रभप्रीत सिंह उर्फ प्रभ के रूप में हुई है।
पाकिस्तान स्थित नेटवर्क से संपर्क की जांच
प्रारंभिक जांच में पुलिस कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क से आरोपियों के संपर्क की पड़ताल कर रही है। सूत्रों के मुताबिक उनका संपर्क सतनाम उर्फ सत्ता नौशेरा से होने का दावा किया जा रहा है, जिसे BKI से जुड़ा विदेशी हैंडलर बताया जाता है।
हालांकि, यह कनेक्शन अभी जांच का विषय है और आरोप अदालत में साबित होना बाकी है।जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विस्फोटक और हथियार आरोपियों तक कैसे पहुंचे, कथित विदेशी हैंडलर से उनका संपर्क किस माध्यम से हुआ और क्या इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं।
क्या बस अड्डा था निशाना?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि IED और विस्फोटक सामग्री को बस अड्डे के पीछे क्यों रखा गया था। फिलहाल पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि सेक्टर-43 ISBT ही संभावित निशाना था। इसलिए बरामदगी की जगह को सीधे हमले का लक्ष्य मानना जल्दबाजी होगी।जांच में कथित IED का वास्तविक उद्देश्य और संभावित लक्ष्य सामने आना बाकी है।
BKI कनेक्शन भी जांच के घेरे में
जांच एजेंसियां प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से संभावित संबंध की भी पड़ताल कर रही हैं। यदि विदेशी हैंडलर या आतंकी संगठन से संपर्क के दावे प्रमाणित होते हैं, तो जांच का दायरा आरोपियों से आगे बढ़कर फंडिंग, हथियारों की सप्लाई, डिजिटल संपर्क और स्थानीय सहयोगियों तक पहुंच सकता है।
हालांकि, जब तक पुलिस इन कड़ियों को तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों से साबित नहीं करती, तब तक किसी संगठन या विदेशी नेटवर्क की भूमिका को अंतिम तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
तीन गिरफ्तारियों से आगे जांच की चुनौती
इस मामले में पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना है। मोबाइल फोन, चैट, कॉल रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।साथ ही पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां यह भी जांच कर सकती हैं कि आरोपियों को विस्फोटक और हथियार उपलब्ध कराने में किसी स्थानीय या सीमा पार नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।
फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और विस्फोटक सामग्री की बरामदगी से संभावित बड़ी घटना को समय रहते रोकने की दिशा में पुलिस की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, असली सफलता तभी मानी जाएगी जब जांच एजेंसियां कथित सप्लाई नेटवर्क, फंडिंग और विदेशी संपर्क की पूरी कड़ी को सामने ला सकें।
पुलिस ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है। संदिग्ध वस्तु या लावारिस सामान मिलने पर उसे खुद छूने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचना देने की सलाह दी गई है।
