गंगा के बढ़ते तेवर से पटना में हाई-अलर्ट; डीएम कुंदन कुमार ने अधिकारियों को दिया स्पष्ट संदेश—शहर में पानी घुसने की स्थिति पैदा हुई तो जिम्मेदारी तय होगी; 24 घंटे चलेंगे ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन, दीघा से बिंद टोली तक निगरानी तेज

बी के झा

NSK news Ind

पटना, 4 सितंबर

गंगा का जलस्तर बढ़ते ही पटना प्रशासन ने शहर को बाढ़ के संभावित खतरे से बचाने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। नदी का पानी लगातार ऊपर बढ़ रहा है और इसके साथ ही राजधानी के उन तमाम रास्तों को बंद करने की कवायद तेज कर दी गई है, जहां से बाढ़ का पानी शहर में प्रवेश कर सकता है। प्रशासन ने पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल यानी पीटीपी वॉल के सभी 108 रास्तों को बंद करा दिया है। निरीक्षण के दौरान 13 स्लूइस गेटों में मिली लीकेज को भी तत्काल बंद कराया गया है।

प्रशासन की सक्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संभावित खतरे वाले नालों और सीपेज प्वाइंट तक की पहचान कर उन्हें सील करने का काम शुरू कर दिया गया है। पाटलिपुत्र कॉलोनी और आसपास के इलाकों में पानी के प्रवेश की आशंका को देखते हुए सदाकत आश्रम के पास नाले को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्थिति साफ है—इस बार प्रशासन नदी के पानी को शहर की सीमा तक पहुंचने का इंतजार नहीं करना चाहता।

दीघा से लेकर टाउन प्रोटेक्शन वॉल तक अधिकारियों का निरीक्षण

गुरुवार को जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा, नगर आयुक्त यशपाल मीणा और अन्य वरीय अधिकारियों के साथ दीघा घाट से बिंद टोली, एलसीटी घाट, गोसाईं टोला और पूरे पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल क्षेत्र का निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को उन सभी स्थानों की जानकारी ली गई जहां से गंगा का पानी दबाव बढ़ने पर शहर में प्रवेश कर सकता है।

डीएम ने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिया कि शहर में पानी के प्रवेश को रोकने में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाढ़ के दौरान खतरा केवल तटबंध टूटने से नहीं होता। कमजोर हिस्सों, पुराने स्लूइस गेट, सीपेज, ड्रेनेज आउटलेट और खुले रास्तों से भी पानी धीरे-धीरे शहरी इलाकों में प्रवेश कर सकता है।

108 रास्ते बने सबसे बड़ी चुनौती, लगातार निगरानी के आदेश

पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल में बने 108 रास्तों को संभावित जल प्रवेश का संवेदनशील बिंदु माना जा रहा है। प्रशासन ने इन्हें बंद करा दिया है, लेकिन चुनौती अब इन्हें बंद रखने और पानी के बढ़ते दबाव के बीच सुरक्षित बनाए रखने की है।इसीलिए अधिकारियों को लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन की चिंता जायज है।

नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ पानी का दबाव भी बढ़ता है।

ऐसे में अभी बंद किया गया कोई रास्ता या लीकेज दोबारा सक्रिय हो सकता है। यही कारण है कि प्रशासन की रणनीति सिर्फ ‘सील करो और भूल जाओ’ वाली नहीं, बल्कि ‘सील करो और लगातार निगरानी करो’ वाली दिखाई दे रही है।

13 स्लूइस गेटों की लीकेज बंद, नालों पर भी प्रशासन की नजर

निरीक्षण के दौरान 13 स्लूइस गेटों में लीकेज पाया गया। इन्हें बंद कराया गया है। इसके अलावा सदाकत आश्रम के पास नाले के रास्ते संभावित जल प्रवेश को रोकने के लिए रात में ही उसे बंद करने का काम शुरू कराया गया।यही वह मोर्चा है जहां शहर की बाढ़ सुरक्षा और ड्रेनेज व्यवस्था एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं।अगर बाहर का नदी जलस्तर ऊंचा है और शहर के अंदर से पानी निकालने वाले रास्ते खुले हैं, तो कई इलाकों में बैकफ्लो का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए प्रशासन ने नालों और ड्रेनेज प्वाइंट को भी अपनी निगरानी में लिया है।

डीपीएस 24 घंटे चलेंगे, जलजमाव पर भी नजर

डीएम ने सभी ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों (डीपीएस) को 24 घंटे चालू रखने का निर्देश दिया है।यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पटना के लिए बाढ़ का संकट दोहरी चुनौती लेकर आता है—एक तरफ गंगा और दूसरी तरफ शहर के अंदर बारिश एवं निचले इलाकों में जमा पानी।अगर नदी का जलस्तर ऊंचा है तो शहर के प्राकृतिक जलनिकासी तंत्र पर भी दबाव बढ़ता है। ऐसे में पंपिंग स्टेशन ही कई इलाकों से पानी बाहर निकालने की अंतिम महत्वपूर्ण कड़ी बन जाते हैं।

सिर्फ राजधानी नहीं, पूरे जिले में तटबंधों पर युद्धस्तर की तैयारी

प्रशासन ने पटना शहर तक अपनी तैयारियों को सीमित नहीं रखा है। जिले के अलग-अलग इलाकों में तटबंधों की निगरानी और मरम्मत का काम भी तेज किया गया है।अथमलगोला के रामनगर दियारा में गंगा तटबंध पर सुरक्षात्मक कार्य कराया गया है। खुसरूपुर के कठौतिया नदी तटबंध की मरम्मत की गई है।मोकामा के बराहपुर में गंगा तटबंध को मजबूत किया गया है, जबकि पुनपुन के गोपालपुर-तारणपुर इलाके में तटबंध की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का काम कराया गया है।

प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कहीं भी कटाव, क्षति या तटबंध के कमजोर होने की सूचना मिले तो मरम्मत में देरी नहीं होनी चाहिए।पुनपुन नदी और रामपुर लवाईज बैराज भी निगरानी में डीएम और एसएसपी ने पुनपुन नदी पर बने रामपुर लवाईज बैराज का भी निरीक्षण किया। इससे साफ है कि प्रशासन खतरे को केवल गंगा तक सीमित करके नहीं देख रहा है।

पटना की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि गंगा के साथ पुनपुन और अन्य जलधाराओं का प्रभाव भी कई इलाकों की जलनिकासी और बाढ़ की स्थिति पर पड़ सकता है।यही वजह है कि प्रशासन अब रिवर लेवल, तटबंध, ड्रेनेज और बैकफ्लो—चारों मोर्चों पर एक साथ निगरानी बढ़ा रहा है।

स्थानीय नागरिकों की चिंता: इस बार सिर्फ ऐलान नहीं, जमीन पर दिखे तैयारी

गंगा किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले स्थानीय लोगों के लिए नदी का बढ़ता जलस्तर महज प्रशासनिक आंकड़ा नहीं है। जलस्तर बढ़ने के साथ लोगों की चिंता अपने घर, सड़क, दुकान, पशुधन और रोजमर्रा के आवागमन को लेकर बढ़ जाती है।स्थानीय नागरिकों की सबसे बड़ी अपेक्षा यही रहती है कि प्रशासन पानी आने के बाद राहत अभियान शुरू करने के बजाय पहले से संवेदनशील इलाकों की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था पूरी करे।

108 रास्तों को बंद करना, लीकेज सील करना और नालों को बंद करना इसी पूर्व-सावधानी की दिशा में उठाए गए कदम हैं। लेकिन नागरिकों की नजर अब इस बात पर होगी कि इन बंद रास्तों और सील किए गए स्थानों की निगरानी कितनी प्रभावी रहती है।

राजनीतिक विश्लेषण: बाढ़ अब सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, प्रशासनिक परीक्षा भी

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पटना में बाढ़ की स्थिति हर साल सरकार और प्रशासन के लिए दोहरी परीक्षा बनती है। एक तरफ प्राकृतिक परिस्थितियां हैं, दूसरी तरफ शहरीकरण, जलनिकासी, अतिक्रमण और कमजोर ड्रेनेज व्यवस्था जैसे मानवीय कारण हैं।इसलिए बाढ़ के दौरान सरकार की सफलता का आकलन सिर्फ इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि तटबंध टूटा या नहीं।

असली सवाल यह है कि—क्या जलस्तर बढ़ने से पहले संवेदनशील बिंदुओं की पहचान हुई?क्या नालों और ड्रेनेज की सफाई हुई?

क्या पंपिंग स्टेशन तैयार हैं?

क्या तटबंधों की समय रहते मरम्मत हुई?

और सबसे महत्वपूर्ण—क्या प्रशासनिक मशीनरी संकट के दौरान चौबीसों घंटे सक्रिय रह सकती है?

इस लिहाज से मौजूदा तैयारियां सरकार को तत्काल राहत तो देती हैं, लेकिन आने वाले दिनों में इनकी वास्तविक परीक्षा जलस्तर और बारिश की स्थिति से होगी।

शिक्षाविदों की राय: आपदा प्रबंधन को ‘घटना के बाद की व्यवस्था’ से निकालना होगा

आपदा प्रबंधन पर काम करने वाले शिक्षाविदों का मानना है कि बिहार जैसे बाढ़ प्रभावित राज्य में दीर्घकालिक समाधान केवल तटबंधों की मरम्मत तक सीमित नहीं हो सकता।जल विज्ञान, शहरी नियोजन और आपदा प्रबंधन को एक साथ जोड़ना होगा। नदी के प्राकृतिक फैलाव क्षेत्र, शहर के विस्तार, नालों की क्षमता और पंपिंग नेटवर्क का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार हर साल बाढ़ के समय आपात तैयारियां करने के बजाय फ्लड-रेजिलिएंट पटना की दीर्घकालिक योजना बननी चाहिए।

बिहार सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती—तत्काल सुरक्षा बनाम स्थायी समाधान

राज्य सरकार के सामने फिलहाल सबसे पहली प्राथमिकता शहर को सुरक्षित रखना है। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर जो कदम उठाए जा रहे हैं, उनमें तटबंधों की मरम्मत, स्लूइस गेटों की लीकेज रोकना, नालों को नियंत्रित करना और डीपीएस को 24 घंटे चलाना शामिल है।लेकिन स्थायी समाधान इससे कहीं आगे जाता है।पटना जैसे तेजी से फैलते शहर में बारिश के पानी और नदी के बढ़ते जलस्तर को अलग-अलग समस्या मानकर समाधान नहीं निकाला जा सकता। दोनों को एकीकृत जलनिकासी और शहरी बाढ़ प्रबंधन योजना के तहत देखना होगा।

विपक्ष की भूमिका: सरकार की तैयारियों पर नजर, लापरवाही हुई तो सवाल तय

विपक्षी दलों की ओर से इस विशेष निरीक्षण और 108 रास्तों को बंद किए जाने पर फिलहाल कोई व्यापक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए किसी नेता के नाम से काल्पनिक बयान देना उचित नहीं होगा।

हालांकि राजनीतिक तौर पर विपक्ष सरकार से यह सवाल जरूर उठा सकता है कि अगर 13 स्लूइस गेटों में लीकेज मिला तो उनकी नियमित जांच पहले क्यों नहीं हुई?

नालों और जलनिकासी मार्गों की स्थिति सामान्य दिनों में कितनी बेहतर रखी जाती है?

और तटबंधों की मरम्मत बाढ़ का खतरा बढ़ने के बाद ही क्यों तेज होती है?

यानी विपक्ष के लिए सबसे बड़ा मुद्दा यही हो सकता है कि आपदा के समय सक्रियता पर्याप्त है या व्यवस्था को पूरे साल सक्रिय रखने की जरूरत है।

अब पटना की नजर गंगा के अगले तेवर पर

फिलहाल प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा कवच मजबूत करने की कोशिश शुरू कर दी है। पीटीपी वॉल के 108 रास्तों की बंदी, 13 स्लूइस गेटों की लीकेज पर कार्रवाई, नालों को सील करने की तैयारी, 24 घंटे डीपीएस संचालन और जिले के अलग-अलग तटबंधों की मरम्मत इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस बार खतरे को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।

लेकिन बाढ़ प्रबंधन की असली सफलता आदेश जारी करने से नहीं, मैदान में उन आदेशों के लगातार पालन से तय होगी।

गंगा का पानी अभी बढ़ रहा है।

प्रशासन ने अपना मोर्चा संभाल लिया है।

अब निगाहें नदी के अगले तेवर पर हैं।

क्योंकि पटना के लिए बाढ़ का संकट सिर्फ पानी के बढ़ने का नाम नहीं—यह हर साल शासन, प्रशासन, इंजीनियरिंग और राजनीतिक जवाबदेही की एक साथ होने वाली परीक्षा है।

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