बी के झा
NSK news Ind

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नई दिल्ली, 20 सितंबर
भारतीय सैन्य नेतृत्व में लंबे और महत्वपूर्ण अध्याय के बाद पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान अब रणनीतिक चिंतन और नीति विमर्श के क्षेत्र में अपनी नई भूमिका निभाने जा रहे हैं। देश के प्रमुख रणनीतिक थिंक टैंक विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) ने उन्हें अपना नया डायरेक्टर नियुक्त किया है। जनरल चौहान 5 अक्टूबर को पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. अरविंद गुप्ता से यह जिम्मेदारी संभालेंगे।
यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जनरल चौहान के पास सैन्य कमान, राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक योजना और तीनों सेनाओं के एकीकरण से जुड़े मामलों का लंबा अनुभव है। वे 30 सितंबर 2022 से 30 मई 2026 तक देश के दूसरे CDS रहे। इस दौरान वे चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन और रक्षा मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स के सचिव की भूमिका में भी रहे तथा सरकार के प्रमुख सैन्य सलाहकार के तौर पर त्रि-सेवा मामलों से जुड़े रहे।
बॉर्डर की कमान से राष्ट्रीय रणनीति तक
जनरल अनिल चौहान का सैन्य करियर केवल पदों की लंबी सूची नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा चुनौतियों के अलग-अलग मोर्चों पर काम करने का अनुभव रहा है। नेशनल डिफेंस एकेडमी और इंडियन मिलिट्री एकेडमी के पूर्व छात्र जनरल चौहान जून 1981 में 11 गोरखा राइफल्स में कमीशन हुए थे। मेजर जनरल रहते हुए उन्होंने उत्तरी कमान के बारामूला सेक्टर में इन्फैंट्री डिवीजन की कमान संभाली। बाद में उन्होंने पूर्वोत्तर में एक कोर का नेतृत्व किया और सितंबर 2019 में ईस्टर्न कमांड के GOC-in-C बने।CDS के रूप में उनका कार्यकाल सैन्य सुधार, संयुक्तता और तीनों सेनाओं के बेहतर एकीकरण की दिशा में केंद्रित रहा। VIF के अनुसार उनके कार्यकाल में Integrated Theatre Commands, सैन्य क्षमता विकास, स्वदेशीकरण, फोर्स रिस्ट्रक्चरिंग और उभरती तकनीकों को रक्षा ढांचे में शामिल करने जैसे विषयों पर जोर रहा।
अब बंदूक नहीं, विचार होंगे रणनीतिक हथियार
VIF में जनरल चौहान की नई भूमिका को इसी व्यापक अनुभव के अगले विस्तार के तौर पर देखा जा सकता है। सेना में उन्होंने रणनीति को जमीन पर लागू किया, जबकि थिंक टैंक में अब वही अनुभव नीति, शोध और रणनीतिक विमर्श के स्तर पर सामने आएगा।VIF राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति, भू-राजनीति, अर्थव्यवस्था और रणनीतिक मामलों पर संवाद के लिए जाना जाता है। संस्था राजनयिक समुदाय, नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के साथ संवाद करती है तथा नीति से जुड़े विषयों पर अध्ययन और पॉलिसी ब्रीफ भी तैयार करती है।
VIF की चर्चित ‘विमर्श’ (VIMARSH) श्रृंखला भी रणनीतिक और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर विचार-विनिमय का प्रमुख मंच है। दिलचस्प बात यह है कि जनरल चौहान स्वयं हाल के वर्षों में VIF के कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं। अगस्त 2025 में उनकी पुस्तक Ready, Relevant and Resurgent: A Blueprint for the Transformation of India’s Military पर VIF में विमर्श आयोजित हुआ था।
ऑपरेशन सिंदूर से लेकर बदलती युद्ध रणनीति तक
CDS पद से सेवानिवृत्ति के बाद भी जनरल चौहान रणनीतिक मामलों पर सार्वजनिक विमर्श में सक्रिय रहे हैं। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के सैन्य पहलुओं और भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम से जुड़े घटनाक्रम पर भी उन्होंने VIF के मंच से अपनी बात रखी थी। अगस्त 2026 में उन्होंने कहा था कि संघर्ष विराम की शर्तें भारत और पाकिस्तान के DGMOs के बीच तय हुई थीं और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी। ऐसे समय में जब युद्ध का स्वरूप पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर ड्रोन, साइबर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, सूचना युद्ध और हाइब्रिड वॉरफेयर तक फैल रहा है, जनरल चौहान का अनुभव VIF के रणनीतिक विमर्श को सैन्य दृष्टिकोण से एक अलग गहराई दे सकता है।
VIF में बदल रहा नेतृत्व का स्वरूप
VIF की एग्जीक्यूटिव कमेटी की अध्यक्षता एस. गुरुमूर्ति करते हैं। संस्था से पूर्व राजनयिकों, सैन्य अधिकारियों और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों की लंबी श्रृंखला जुड़ी रही है। इसके संस्थापक डायरेक्टर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रहे हैं।जनरल चौहान के आने से VIF को ऐसा नेतृत्व मिलेगा, जिसके पास एक साथ मैदानी सैन्य अनुभव, उच्च रक्षा प्रबंधन, राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों का अनुभव है।सेना में उनका अध्याय भले 30 मई को समाप्त हो गया हो, लेकिन रणनीतिक चिंतन की उनकी भूमिका अब एक नए मंच पर शुरू हो रही है।
सीमा पर तैनात कमांडर से लेकर देश के सर्वोच्च सैन्य पद तक और अब नीति-विमर्श की दुनिया तक—जनरल अनिल चौहान की यह नई पारी आने वाले समय में भारत की सुरक्षा और रणनीतिक सोच से जुड़े विमर्श पर खास नजरें खींचेगी।
