पश्चिमी यूपी में BJP का मिशन-2027 तेज! नितिन नबीन आज से दो दिन मैदान में, 71 सीटों पर संगठन की ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ लेंगे, पूर्व जनप्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों से सीधा संवाद, युवाओं से भी करेंगे बातचीत

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली/मेरठ, 21 सितंबर

उत्तर प्रदेश की सियासत में विधानसभा चुनाव की आहट अब संगठन के गलियारों से निकलकर जमीन पर साफ दिखाई देने लगी है। भारतीय जनता पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी संगठनात्मक मशीनरी को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन सोमवार यानी 21 सितंबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। वह 21 सितंबर को मेरठ और 22 सितंबर को सहारनपुर में पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों और बैठकों में हिस्सा लेंगे।नबीन के इस दौरे को महज औपचारिक संगठनात्मक प्रवास के बजाय पश्चिमी यूपी में पार्टी की चुनावी तैयारियों की व्यापक समीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 71 विधानसभा सीटें हैं और भाजपा की रणनीति में यह क्षेत्र लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। 2017 में भाजपा ने इन 71 में से 54 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में उसका आंकड़ा 41 पर आ गया था। ऐसे में इस क्षेत्र में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर पार्टी का विशेष जोर दिखाई दे रहा है।

मेरठ में संगठन की ‘नब्ज’ टटोलेंगे नबीन

21 सितंबर को नबीन मेरठ में कई महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल होंगे। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार वह सुभारती विश्वविद्यालय में युवाओं से संवाद करेंगे। इस संवाद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शिक्षा, महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों पर चर्चा प्रस्तावित है। इसके बाद पश्चिमी यूपी के लगभग 4,800 शक्ति केंद्र संयोजकों और मंडल अध्यक्षों के साथ संगठनात्मक बैठक होगी।यही बैठक भाजपा की चुनावी तैयारी का अहम हिस्सा मानी जा रही है। इसमें बूथ स्तर की तैयारी, संगठन के विस्तार, जनसंपर्क और आगामी चुनावी अभियानों को लेकर फीडबैक लिया जाना है।इसके बाद पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों, एमएलसी और अन्य पूर्व जनप्रतिनिधियों के साथ अलग बैठक तथा वर्तमान जिला एवं महानगर अध्यक्षों और क्षेत्रीय पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक समीक्षा प्रस्तावित है।

71 सीटों की राजनीति में बूथ सबसे बड़ा मोर्चा

पश्चिमी यूपी पर भाजपा के फोकस को समझने के लिए केवल बड़े नेताओं की सभाओं को देखना पर्याप्त नहीं है। पार्टी का जोर इस बार बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और जिला स्तर के संगठन को चुनावी मशीनरी के रूप में सक्रिय करने पर है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक नबीन के दौरे में बूथ स्तर की तैयारियों और युवाओं समेत प्रमुख सामाजिक समूहों से जुड़ाव पर विशेष ध्यान है। यानी संदेश साफ है—लखनऊ या दिल्ली में रणनीति बनाने के बाद उसकी असली परीक्षा गांव, कस्बे और बूथ पर होगी।

किसान, गन्ना और जातीय समीकरण भी चुनौती

पश्चिमी यूपी की राजनीति में किसान, गन्ना भुगतान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जाट-गुर्जर सहित विभिन्न सामाजिक समूहों के समीकरण महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ने भी नबीन के दौरे के संदर्भ में किसान और गन्ने के मुद्दों के साथ जाट-गुर्जर सामाजिक समीकरणों को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण फीडबैक क्षेत्र बताया है।ऐसे में संगठनात्मक बैठकों में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि पार्टी का ढांचा कितना सक्रिय है।

असली सवाल यह भी होगा कि स्थानीय स्तर पर मतदाताओं के बीच सरकार, संगठन और जनप्रतिनिधियों को लेकर क्या प्रतिक्रिया मिल रही है।

औघड़नाथ मंदिर से मां शाकुंभरी देवी तक

नबीन के दौरे में संगठन और चुनावी रणनीति के साथ धार्मिक स्थलों का कार्यक्रम भी शामिल है। 21 सितंबर को मेरठ में औघड़नाथ मंदिर के दर्शन का कार्यक्रम है। अगले दिन सहारनपुर में मां शाकुंभरी देवी मंदिर जाने का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

राजनीतिक विश्लेषण में धार्मिक यात्राओं की व्याख्या अलग-अलग तरीके से की जा सकती है, लेकिन पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रम के लिहाज से इसे उनके पश्चिमी यूपी प्रवास का धार्मिक पक्ष माना जा रहा है।

सहारनपुर में संगठन की दूसरी बड़ी परीक्षा

22 सितंबर को नबीन सहारनपुर पहुंचेंगे। वहां पार्टी के पूर्व सांसदों और विधायकों से बातचीत के अलावा प्रदेश और क्षेत्रीय पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों तथा जिला स्तर के संगठन से जुड़े नेताओं के साथ बैठक प्रस्तावित है। इन बैठकों में संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनाव की तैयारियों पर फीडबैक लिया जाना है।खास बात यह है कि भाजपा ने केवल एक क्षेत्र तक अपनी समीक्षा सीमित नहीं रखी है। इससे पहले पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े गोरखपुर क्षेत्र की संगठनात्मक समीक्षा कर चुके हैं, जबकि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव संगठन बीएल संतोष कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की समीक्षा कर चुके हैं।

आने वाले दिनों में अवध और काशी जैसे क्षेत्रों में भी संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ने की खबर है।

विपक्ष भी अपनी जमीन मजबूत करने में जुटा

भाजपा के संगठनात्मक अभियान के समानांतर विपक्षी दल भी अपनी चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने में जुटे हैं। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 20 सितंबर को 27 विधानसभा क्षेत्रों पर केंद्रित एक रणनीति का ऐलान किया। रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी इन सीटों पर अपने वोट आधार को बढ़ाने के लिए प्रत्येक सीट पर 27 हजार अतिरिक्त वोट हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।समाजवादी पार्टी की एक अन्य रिपोर्टेड रणनीति में गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित समुदायों के बीच आधार बढ़ाने पर जोर बताया गया है। इससे संकेत मिलता है कि विपक्ष भी केवल पारंपरिक सामाजिक आधार पर निर्भर रहने के बजाय नए सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है।

कांग्रेस ने भी उत्तर प्रदेश में अपने संगठन और मीडिया तंत्र में बदलाव शुरू किया है। पार्टी ने हाल में कुंवर सिंह निषाद को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया एवं प्रचार विभाग का अध्यक्ष नियुक्त किया है।

राजनीतिक विश्लेषण: असली लड़ाई ‘मैदान’ में

संगठन की राजनीतिक विश्लेषण के स्तर पर नबीन का पश्चिमी यूपी दौरा तीन महत्वपूर्ण संकेत देता है।

पहला, भाजपा चुनाव की औपचारिक घोषणा का इंतजार किए बिना संगठनात्मक तैयारियों को गति दे रही है।

दूसरा, पार्टी राष्ट्रीय नेतृत्व और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच सीधा संवाद बढ़ाना चाहती है।

तीसरा, पश्चिमी यूपी में पिछली विधानसभा के आंकड़ों के बाद संगठनात्मक समीक्षा को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

2017 के 54 और 2022 के 41 सीटों के आंकड़ों का अंतर बताता है कि इस क्षेत्र में पार्टी की चुनावी तस्वीर एक चुनाव से दूसरे चुनाव में बदल सकती है।

शिक्षाविदों और चुनावी राजनीति का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों के नजरिए से भी किसी बड़े राज्य में चुनावी सफलता केवल बड़े नेताओं के प्रचार से तय नहीं होती; स्थानीय संगठन, उम्मीदवारों की स्वीकार्यता, सामाजिक गठजोड़, स्थानीय मुद्दे और बूथ स्तर का प्रबंधन चुनावी प्रक्रिया के महत्वपूर्ण घटक होते हैं। इसलिए नबीन की बैठकों का महत्व इस बात में होगा कि दिल्ली-लखनऊ में बनाई जा रही रणनीति को स्थानीय कार्यकर्ताओं से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर कितना बदला या परिष्कृत किया जाता है।

भाजपा के सामने कई सवाल, विपक्ष के सामने भी चुनौती

पश्चिमी यूपी में भाजपा के सामने संगठन को सक्रिय रखने के साथ किसान और ग्रामीण मुद्दों पर स्थानीय प्रतिक्रिया समझने, सामाजिक समीकरणों को साधने और युवाओं के बीच रोजगार-शिक्षा जैसे मुद्दों पर संवाद कायम रखने की चुनौती होगी।

वहीं विपक्ष के सामने चुनौती भाजपा के मजबूत संगठनात्मक ढांचे के मुकाबले अपना बूथ नेटवर्क मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों को एक व्यापक राजनीतिक मंच से जोड़ने की होगी।पश्चिमी यूपी में हाल की राजनीतिक सक्रियता भी बढ़ी है। रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी समेत विभिन्न विपक्षी नेता क्षेत्र में जनसंपर्क कार्यक्रमों में सक्रिय हैं और समाजवादी पार्टी भी संगठनात्मक सम्मेलन कर रही है।

एन एस के विश्लेषण

पश्चिमी उत्तर प्रदेश अब केवल चुनावी नक्शे का एक हिस्सा नहीं, बल्कि मिशन-2027 की शुरुआती राजनीतिक प्रयोगशाला बनता दिखाई दे रहा है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का मेरठ से सहारनपुर तक संगठन को सीधे परखना बताता है कि पार्टी इस बार चुनावी तैयारी को बूथ स्तर से शुरू करना चाहती है।

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस भी अपने सामाजिक और संगठनात्मक आधार को विस्तार देने की कोशिश में हैं।

अब आने वाले महीनों में असली तस्वीर इस बात से बनेगी कि किस दल का संदेश कितनी मजबूती से बूथ तक पहुंचता है, स्थानीय मुद्दों पर कौन कितना प्रभावी संवाद करता है और बदलते सामाजिक समीकरणों को संगठन में कौन किस तरह समायोजित करता है।

फिलहाल पश्चिमी यूपी में चुनावी शतरंज की बिसात सजने लगी है—और नबीन का दो दिवसीय दौरा इसी लंबी राजनीतिक तैयारी की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

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