बी के झा
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नई दिल्ली, 2 अक्टूबर
आसमान में उड़ता विमान… करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई… अचानक कॉकपिट के भीतर हमला… शरीर पर गंभीर चोटें और सामने सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी। ऐसे वक्त में जब एक छोटी-सी चूक भी भयावह त्रासदी में बदल सकती थी, भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने जिस सूझ-बूझ और साहस का परिचय दिया, वह अब दुनिया भर में चर्चा का विषय है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल पर बातचीत की और उनके साहस, संयम तथा मुश्किल हालात में लिए गए फैसलों की सराहना की। इसी बातचीत में जब पीएम मोदी ने उनसे पूछा कि आखिर उस भयावह परिस्थिति में उन्हें हिम्मत कहां से मिली, तो कैप्टन स्मित ने ऐसा जवाब दिया जिसने इस पूरे घटनाक्रम को एक अलग भावनात्मक आयाम दे दिया।
स्मित ने बताया कि संकट के उन क्षणों में वह लगातार ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में हनुमान चालीसा का पाठ करना उनके लिए मानसिक संबल रहा और इसी दौरान उन्होंने खुद को संभालते हुए कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की।
चाकू के वार के बाद भी नहीं टूटा हौसला
फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में कथित तौर पर ओमानी को-पायलट ने विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। जब कैप्टन स्मित मच्छार ने उसे रोकने का प्रयास किया तो उन पर हमला किया गया। उस वक्त विमान में 170 से ज्यादा लोग सवार थे, जिनमें 24 बच्चे भी शामिल थे।हालात इतने भयावह थे कि विमान करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई से तेजी से नीचे आने लगा।
रिपोर्टों के मुताबिक विमान लगभग 23 हजार फीट प्रति मिनट की दर से नीचे गिरा और करीब 15,600 फीट तक पहुंच गया।लेकिन घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने हार नहीं मानी। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और क्रू के सदस्यों ने हमलावर को काबू करने में मदद की। इसके बाद विमान को सुरक्षित रूप से डायवर्ट किया गया।
‘मेरे पास सिर्फ कुछ सेकंड थे’
प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत में कैप्टन स्मित ने उस भयावह पल को याद करते हुए बताया कि हमले के बाद उन्हें समझ आ गया था कि उनके पास कार्रवाई करने के लिए बहुत कम समय है। उन्होंने खुद को संभाला और कॉकपिट का दरवाजा खोलने का फैसला किया। उनके मुताबिक, उसी दौरान वह लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे।
यही वह क्षण था जब एक पायलट की जिम्मेदारी और उसकी व्यक्तिगत आस्था एक साथ दिखाई दी—एक तरफ विमान में मौजूद यात्रियों की जिंदगी बचाने की चुनौती और दूसरी तरफ मौत के सामने खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने की कोशिश।
PM मोदी से बात करते हुए भावुक हुए स्मित
प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित भावुक भी हो गए। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी से बात करना उनके लिए बेहद खास पल है और उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना सबसे बड़ा आदर्श बताया।
पीएम मोदी ने उनकी बहादुरी और संकट की घड़ी में दिखाई गई सूझ-बूझ की प्रशंसा की तथा उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पूरे देश की शुभकामनाएं उनके साथ हैं।
एक पायलट की लड़ाई, सैकड़ों जिंदगियों की कहानी
कैप्टन स्मित मच्छार की कहानी सिर्फ एक विमान में हुई हिंसक घटना की कहानी नहीं है। यह उस क्षण की कहानी है जब एक व्यक्ति खुद घायल था, लेकिन उसके सामने सैकड़ों जिंदगियों की जिम्मेदारी थी।
कॉकपिट में घायल पड़े कैप्टन के सामने दो रास्ते थे—हालात के सामने हार मान लेना या फिर आखिरी ताकत जुटाकर वह कदम उठाना जो विमान में बैठे सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी बचा सकता था।
उन्होंने दूसरा रास्ता चुना, और इसी फैसले ने 34 हजार फीट की ऊंचाई पर मंडरा रही एक संभावित त्रासदी को टालने में अहम भूमिका निभाई।
आज कैप्टन स्मित मच्छार अस्पताल में उपचार करा रहे हैं और उनकी हालत में सुधार की खबर है।
लेकिन उस भयावह उड़ान के दौरान उन्होंने जिस धैर्य, जिम्मेदारी और साहस का परिचय दिया, उसकी कहानी लंबे समय तक याद रखी जाएगी।
NSK विशेष , बी. के. झा
