बी के झा, एन एस के पोर्टल
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श्रीनगर / नई दिल्ली, 24 अक्टूबर
जम्मू-कश्मीर की सियासत में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साफ संकेत दिए हैं कि मंत्रियों के चयन को लेकर फैसला लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अब इस सूची में बदलाव की गुंजाइश बेहद कम है। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के उन नेताओं और विधायकों को भी दोटूक संदेश दिया है, जो मंत्री पद की उम्मीद में पार्टी नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उमर का कहना है कि न तो उनके पास और न ही पार्टी के संरक्षक फारूक अब्दुल्ला के पास बार-बार पहुंचने से कोई फायदा होने वाला है, क्योंकि सूची पहले ही तैयार की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब उन्होंने श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की। इस मुलाकात में मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार के मुद्दे पर चर्चा हुई।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राजभवन की ओर से अगले सप्ताह की शुरुआत में मुलाकात के लिए समय कब तय किया जाता है और मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।
उपराज्यपाल से मुलाकात, विस्तार पर चर्चा
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात के बाद बताया कि दोनों के बीच मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव और विस्तार को लेकर चर्चा हुई है। उन्होंने अगले सप्ताह की शुरुआत में इस विषय पर आगे की बातचीत के लिए समय देने का अनुरोध किया है।उमर ने यह भी कहा कि उपराज्यपाल के साथ उनकी पिछली मुलाकात को काफी समय हो गया था। इसलिए उन्होंने उनसे मिलकर कुछ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की और विभिन्न विषयों पर उनकी राय ली।इस घटनाक्रम को जम्मू-कश्मीर सरकार में संभावित मंत्रिमंडलीय बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, मंत्रियों के नाम और शपथ ग्रहण की तारीख को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
‘लिस्ट फाइनल, अब दरवाजे खटखटाने से फायदा नहीं’
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा उमर अब्दुल्ला के उस संदेश की हो रही है, जो उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं को दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि मंत्री पद को लेकर अब व्यक्तिगत पैरवी या लगातार संदेश भेजने से फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा।उन्होंने कहा, ‘मेरे या फारूक अब्दुल्ला के पास आने की कोई जरूरत नहीं है। इसका कोई फायदा नहीं है। सूची पहले ही तैयार हो चुकी है, इसमें अब कोई बदलाव नहीं हो सकता।

’मुख्यमंत्री का यह बयान उन नेताओं के लिए स्पष्ट संकेत माना जा रहा है, जो मंत्रिमंडल में जगह पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनके संदेश से यह भी जाहिर होता है कि पार्टी नेतृत्व मंत्रियों के चयन को लेकर अपनी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ चुका है।उमर ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं से लंबे-लंबे व्हाट्सऐप संदेश भेजने से भी बचने की अपील की है। उन्होंने नेताओं को धैर्य रखने की सलाह देते हुए कहा कि मंत्री बनने का फैसला अल्लाह की मर्जी और पार्टी के निर्णय पर निर्भर करता है।उनके इस संदेश का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है, क्योंकि मंत्रिमंडल में जगह पाने की आकांक्षा रखने वाले नेताओं के बीच संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
तीन खाली पद भरने की तैयारी, पार्टी के सामने संतुलन की चुनौती
जम्मू-कश्मीर में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा के केंद्र में तीन खाली पद हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मंत्रिपरिषद में इन पदों को भरे जाने की संभावना है। ऐसे में मुख्यमंत्री के सामने केवल नए मंत्रियों का चयन करने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि पार्टी के भीतर क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए यह फैसला कई मायनों में अहम है।
मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नेताओं को लेकर पार्टी के भीतर अपेक्षाएं स्वाभाविक हैं। जिन विधायकों को मंत्री पद नहीं मिलता, उनकी नाराजगी को संभालना भी नेतृत्व की राजनीतिक सूझबूझ की परीक्षा होगी।मुख्यमंत्री के लिए चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सरकार का कामकाज प्रभावित न हो और पार्टी के भीतर असंतोष को बढ़ने से रोका जा सके।
हालांकि, संभावित मंत्रियों के नामों को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी नेता को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने या बाहर रखे जाने के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
फारूक अब्दुल्ला की मंजूरी के बाद फैसले पर नजर
राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी जानकारी के अनुसार, उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित बदलावों को लेकर फारूक अब्दुल्ला की अंतिम मंजूरी भी मिल चुकी है।यदि यह प्रक्रिया अंतिम रूप ले चुकी है, तो मंत्रिमंडल विस्तार के लिए अब राजभवन के साथ आगे की औपचारिक बातचीत महत्वपूर्ण होगी।
मुख्यमंत्री का विधायकों को दिया गया संदेश भी इसी ओर इशारा करता है कि पार्टी नेतृत्व अब चयन को लेकर अनिश्चितता लंबी खींचने के पक्ष में नहीं है।फिर भी, अंतिम सूची और शपथ ग्रहण से संबंधित आधिकारिक घोषणा होने तक संभावित नामों और समयसीमा को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है।
सज्जाद लोन ने उठाए सवाल, बयान को बताया अपमानजनक
मुख्यमंत्री के बयान पर विपक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। जम्मू-कश्मीर पीपल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने उमर अब्दुल्ला के रुख को हैरान करने वाला बताया और उनके शब्दों पर आपत्ति जताई।सज्जाद लोन ने कहा कि जिस तरह से मुख्यमंत्री ने अपनी पार्टी के नेताओं को संदेश दिया, वह उन्हें नीचा दिखाने और अपमानित करने वाला था।
उन्होंने कहा, ‘अगर आप उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं दे सकते, तो कम से कम उन्हें सबके सामने शर्मिंदा तो न करें।’सज्जाद लोन की टिप्पणी ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जारी राजनीतिक चर्चा में एक नया पहलू जोड़ दिया है। जहां मुख्यमंत्री का संदेश पार्टी के भीतर चयन प्रक्रिया को अंतिम रूप देने और व्यक्तिगत पैरवी पर विराम लगाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे नेताओं के प्रति असम्मानजनक व्यवहार के तौर पर पेश किया है।
अब राजभवन की तारीख और मंत्रियों के नाम पर निगाहें
जम्मू-कश्मीर में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अब दो सवाल सबसे महत्वपूर्ण हैं।
पहला, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ मुख्यमंत्री की अगली मुलाकात कब होती है।
दूसरा, खाली पदों को भरने के लिए किन नेताओं के नामों पर मुहर लगती है।
उमर अब्दुल्ला ने पार्टी नेताओं को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए बार-बार संपर्क करने की जरूरत नहीं है। ऐसे में अब पार्टी के भीतर संभावित दावेदारों की निगाहें नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार मुख्यमंत्री के लिए केवल खाली पद भरने की कवायद नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर उम्मीदों, महत्वाकांक्षाओं और संगठनात्मक एकता के बीच संतुलन साधने की परीक्षा भी है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि उमर अब्दुल्ला की तैयार सूची सरकार और नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर कितना संतुलन स्थापित कर पाती है।एन एस के पोर्टल – श्रीनगर
