बी के झा, एन एस के पोर्टल
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नई दिल्ली, 24 अक्टूबर
राजधानी दिल्ली में त्योहारी सीजन, लगातार जारी विरोध-प्रदर्शनों और चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बढ़ते सियासी टकराव के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक्शन मोड में नजर आए।
शाह दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर राजधानी की कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की। उनके इस दौरे को दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों, खुफिया तंत्र की सक्रियता और संभावित चुनौतियों से निपटने की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
गृह मंत्री के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी पुलिस मुख्यालय पहुंचीं। अधिकारियों के साथ बैठक में राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा किए जाने की जानकारी सामने आई है।समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि गृह मंत्री दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर जानकारी लेंगे।
बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने तथा काउंटर इंटेलिजेंस की क्षमता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की बात कही गई है। हालांकि, बैठक में दिए गए विशिष्ट निर्देशों और लिए गए फैसलों का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सामने आने के बाद ही उनकी पुष्टि की जा सकेगी।
SIR के खिलाफ सड़कों पर विरोध, चुनाव आयोग पर विपक्ष का हमला
अमित शाह का दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचना ऐसे समय हुआ है, जब राजधानी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध-प्रदर्शन तेज हैं। विपक्षी दलों और विभिन्न छात्र संगठनों ने चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई है।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं, इस मुद्दे पर जारी विरोध ने राजनीतिक बहस के साथ-साथ राजधानी की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के सामने भी चुनौती खड़ी कर दी है।
शुक्रवार को कई वामपंथी संगठनों और छात्र नेताओं ने बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास से मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने SIR का विरोध करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की।प्रदर्शनकारियों के जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की संभावना को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने यातायात परामर्श जारी किया था। इसके तहत दोपहर एक बजे से शाम पांच बजे के बीच कुछ मार्गों पर यातायात में बदलाव की जानकारी दी गई। पुलिस ने लोगों को प्रभावित रास्तों से बचने, यात्रा की योजना पहले से बनाने और यातायात संबंधी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी।
विश्वविद्यालय परिसरों तक पहुंचा विरोध का दायरा
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों की गूंज अब विश्वविद्यालय परिसरों में भी सुनाई दे रही है। जामिया मिलिया इस्लामिया में पांच छात्र अपनी मांगों को लेकर 13 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय छात्र संघ की बहाली और चीफ प्रॉक्टर को हटाना शामिल है।भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।
छात्र निलंबन रद्द करने और प्रशासनिक कार्रवाई पर पुनर्विचार करने की मांग भी कर रहे हैं।भूख हड़ताल कर रहे छात्र जासिम अली खान ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में विपक्ष की रैली
इस बीच, SIR और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को लेकर विपक्षी लामबंदी भी तेज होती दिखाई दे रही है। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने शनिवार को कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के सहयोगी दल एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली करेंगे।यह रैली ऐसे समय प्रस्तावित है, जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों के बीच टकराव बढ़ रहा है। ऐसे में रामलीला मैदान की प्रस्तावित रैली को विपक्ष की आगे की रणनीति और सरकार के खिलाफ राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सुरक्षा बनाम सियासी संघर्ष: दिल्ली के सामने दोहरी चुनौती
राजधानी में एक तरफ त्योहारों के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ विरोध-प्रदर्शनों, छात्र आंदोलनों और राजनीतिक रैलियों के कारण कानून-व्यवस्था तथा यातायात प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ रही है।
गृह मंत्री अमित शाह की पुलिस मुख्यालय में बैठक इसी व्यापक सुरक्षा परिदृश्य के बीच हुई है। ऐसे में दिल्ली पुलिस के सामने चुनौती केवल भीड़ प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बनी रहे और लोकतांत्रिक तरीके से असहमति जताने वालों के अधिकारों का भी सम्मान हो।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे क्या कदम उठाते हैं तथा SIR के विरोध और छात्र आंदोलनों के बीच प्रशासन किस तरह संतुलन स्थापित करता है।
एन एस के पोर्टल – नई दिल्ली
