बी के झा
चंडीगढ़, 1 अगस्त
पंजाब में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर सियासत और छात्र आंदोलन आमने-सामने आ गए हैं। फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा को लेकर उठे कथित पेपर लीक विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। शनिवार को चंडीगढ़ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए और मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और कहा कि यदि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता पर ही सवाल उठने लगें तो लाखों युवाओं का सरकारी व्यवस्था से भरोसा डगमगा जाता है। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की भी मांग की।
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
विवाद के केंद्र में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा है। विपक्ष का आरोप है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि पिछले साढ़े चार वर्षों में राज्य की कई प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार इन मामलों को दबाने का प्रयास कर रही है और दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने के बजाय बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रही है।दूसरी ओर, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने पेपर लीक के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह प्रश्नपत्र लीक का मामला नहीं, बल्कि अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से नकल कराने वाले गिरोह का मामला है। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में एक भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है और सरकार नकल माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है।
पुलिस कार्रवाई के बाद भी नहीं थमा विवाद
गौरतलब है कि 19 जुलाई को पंजाब पुलिस ने फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा के दौरान सक्रिय एक अंतरराज्यीय नकल गिरोह का भंडाफोड़ किया था। पुलिस ने इस कार्रवाई में गिरोह के 11 सदस्यों और 10 अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया था। जांच में हाईटेक उपकरणों के जरिए परीक्षा में अनुचित लाभ दिलाने की साजिश का खुलासा हुआ था। इसी कार्रवाई के बाद विपक्ष ने इसे पेपर लीक का मामला बताते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया।
विपक्ष ने खोला मोर्चा
इस मुद्दे पर केवल ABVP ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल भी सरकार के खिलाफ एकजुट दिखाई दे रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपनी जवाबदेही से बचने के लिए पूरे मामले को केवल “नकल” तक सीमित बताने का प्रयास कर रही है।हालांकि आम आदमी पार्टी ने विपक्ष के सभी आरोपों को राजनीतिक करार दिया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए युवाओं को भ्रमित करने के लिए पेपर लीक का “झूठा नैरेटिव” गढ़ा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी अत्यंत संवेदनशील होते हैं। बेरोजगारी के दौर में लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और ऐसी किसी भी घटना से सरकार की विश्वसनीयता पर सीधा असर पड़ता है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को शीघ्र दंडित करती है तो युवाओं का विश्वास कायम रह सकता है, लेकिन यदि विवाद लंबा खिंचता है तो यह आने वाले समय में राज्य की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
फिलहाल पंजाब में पेपर लीक बनाम हाईटेक नकल की बहस तेज है। एक ओर सरकार इसे संगठित नकल गिरोह का मामला बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे भर्ती प्रक्रिया की गंभीर विफलता करार दे रहा है। ऐसे में अब सबकी निगाहें जांच एजेंसियों की कार्रवाई और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
NSK news Ind

