अंकित शर्मा हत्याकांड में उम्रकैद के बाद दिल्ली की राजनीति गरमाई: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने AAP से मांगा जवाब, कहा—’आज न्याय की जीत हुई,’ सत्ता और विपक्ष आमने-सामने

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 31 जुलाई

वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में कड़कड़डूमा अदालत द्वारा पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद राजधानी की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। अदालत के फैसले के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे न्यायपालिका की ऐतिहासिक कार्रवाई बताते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) से कई राजनीतिक सवाल पूछे और कहा कि दिल्ली की जनता अब जवाब चाहती है।मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत का फैसला न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को और मजबूत करने वाला है तथा यह संदेश देता है कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।

मुख्यमंत्री ने AAP पर लगाए गंभीर राजनीतिक आरोप

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जब ताहिर हुसैन हत्या के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार हुआ था, तब भी आम आदमी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उसके पक्ष में खड़े दिखाई दिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी परिस्थितियों में पार्टी का रुख क्या था और जनता को इसका उत्तर मिलना चाहिए।उन्होंने कहा, “आईबी अधिकारी स्वर्गीय अंकित शर्मा हत्याकांड में न्यायालय द्वारा दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने का हम स्वागत करते हैं। आज न्याय की जीत हुई है और दिल्ली की जनता आम आदमी पार्टी से जवाब चाहती है।”मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अदालत का फैसला भारतीय न्यायपालिका की निष्पक्षता और कानून के शासन का सशक्त उदाहरण है।

2020 का वह दर्दनाक घटनाक्रम

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा 25 फरवरी को अपने घर से निकले थे, जिसके बाद वे लापता हो गए। अगले दिन उनका शव खजूरी खास के नाले से बरामद हुआ। जांच एजेंसियों के अनुसार उनके शरीर पर अनेक गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और दिल्ली दंगों का यह मामला सबसे चर्चित मामलों में शामिल हो गया।जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने कई आरोपियों के विरुद्ध हत्या, दंगा, आपराधिक षड्यंत्र तथा अन्य गंभीर धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया था। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अदालत के फैसले के बाद इस मामले का राजनीतिक प्रभाव भी व्यापक होगा। उनके अनुसार सत्ता पक्ष इसे न्याय और कानून के शासन की जीत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि विश्लेषकों का यह भी मानना है कि न्यायालय का फैसला न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है और राजनीतिक विमर्श को तथ्यों एवं अदालत के निष्कर्षों तक सीमित रखना लोकतांत्रिक दृष्टि से उचित होगा।

कानूनविदों की टिप्पणी

संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला इस सिद्धांत को दोहराता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में अंतिम निर्णय केवल न्यायालय ही देता है। उन्होंने कहा कि दोषसिद्धि और सजा दोनों न्यायिक परीक्षण, साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया पर आधारित होती हैं, इसलिए ऐसे मामलों में न्यायालय के निर्णय का सम्मान लोकतंत्र की मूल भावना है।

शिक्षाविदों की प्रतिक्रिया

शिक्षाविदों ने कहा कि हिंसा किसी भी समाज का समाधान नहीं हो सकती। उन्होंने युवाओं से संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की। उनका कहना है कि इस प्रकार की घटनाओं से समाज को सीख लेनी चाहिए कि मतभेद का समाधान कानून और संवाद के माध्यम से ही संभव है।

समाजसेवी संस्थाओं का मत

विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का संकेत है। साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि इस संवेदनशील मामले पर ऐसी भाषा का प्रयोग ना करें जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो।

बीजेपी की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने फैसले को न्यायपालिका की निष्पक्षता का प्रमाण बताते हुए कहा कि कानून ने अपना काम किया है। उनका कहना है कि निर्दोष नागरिक की हत्या के दोषियों को सजा मिलना कानून के शासन की जीत है।

AAP का पक्ष

समाचार लिखे जाने तक आम आदमी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा लगाए गए ताजा राजनीतिक आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

संपादकीय दृष्टि

अंकित शर्मा हत्याकांड पर आया न्यायालय का फैसला भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह मामला वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया से गुजरा और अंततः अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना निर्णय दिया। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि न्याय अदालत में तय हो और राजनीतिक बहस संवैधानिक मर्यादा के भीतर रहे। पीड़ित परिवार को न्याय मिलना जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है कि समाज भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए शांति, कानून के शासन और सामाजिक विश्वास को मजबूत करे।

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