सावन के पहले सोमवार पर देश शिवमय: कश्मीर से कन्याकुमारी तक गूंजा ‘हर-हर महादेव’, शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब; सुरक्षा के बीच श्रद्धालुओं ने किया भोलेनाथ का दर्शन

बी के झा

NSK news Ind

* नई दिल्ली, 3 अगस्त

सावन के पवित्र महीने का पहला सोमवार आते ही पूरा देश भगवान शिव की भक्ति में डूब गया। सूर्योदय से पहले ही शिवालयों के कपाट खुल गए और चारों दिशाओं से एक ही स्वर सुनाई देने लगा — “हर-हर महादेव… बम-बम भोले…”

कश्मीर की वादियों से लेकर कन्याकुमारी के समुद्री तट तक, पूर्वोत्तर से लेकर पश्चिम भारत तक शिव आराधना का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

पवित्र नदियों के घाट, मंदिर परिसर और शिवालय श्रद्धालुओं की आस्था से सराबोर नजर आए। लाखों भक्तों ने स्नान, ध्यान और पूजा-अर्चना के बाद भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर परिवार, समाज और राष्ट्र के कल्याण की कामना की।

देश के प्रमुख शिवधामों में उमड़ा श्रद्धा का महासागर

सावन के पहले सोमवार पर देश के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में भस्म आरती और विशेष पूजन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ा।

झारखंड के देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम में कांवरियों और श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही।उत्तराखंड के हरिद्वार और ऋषिकेश के गंगा घाटों पर भक्तों ने पवित्र स्नान कर भगवान शिव को जल अर्पित किया। हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ धाम में भी विशेष पूजा-अर्चना हुई।

संगम से चित्रकूट तक आस्था की अविरल धारा

प्रयागराज के संगम तट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। भक्तों ने त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाई और सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद शिवालयों में पहुंचकर जलाभिषेक किया।चित्रकूट के पवित्र रामघाट पर मंदाकिनी नदी में स्नान के बाद श्रद्धालु सबसे पहले महाराजाधिराज मतगजेन्द्र नाथ मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का अभिषेक किया।धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। सावन के सोमवार को शिव आराधना, उपवास और जलाभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है।

राजधानी दिल्ली में शिव भक्ति का अद्भुत नजारा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी सावन के पहले सोमवार पर पूरी तरह शिवमय नजर आई। सुबह से ही प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दीं।चांदनी चौक स्थित गौरी शंकर मंदिर में रात दो बजे से ही भक्त दर्शन के लिए पहुंचने लगे थे।सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस, अर्द्धसैनिक बल और निजी सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया। मंदिर परिसर में मेटल डिटेक्टर, जांच उपकरण और विशेष निगरानी व्यवस्था की गई।

इस बार मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गर्भगृह के बाहर विशेष व्यवस्था की है, ताकि सभी भक्त सुचारू रूप से दर्शन कर सकें।

मंदिरों में सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान

सावन के सोमवार को देखते हुए दिल्ली समेत कई राज्यों में प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं।भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा जांच और आपातकालीन सेवाओं को लेकर प्रशासन सतर्क रहा। कई मंदिरों में प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग मार्ग बनाए गए हैं।चांदनी चौक के बनखंडी मंदिर और कनॉट प्लेस स्थित विश्वेश्वर महादेव मंदिर में भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की गई।विश्वेश्वर महादेव मंदिर में रुद्राभिषेक और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया।

आस्था, विश्वास और परंपरा का पर्व है सावन

सावन केवल एक धार्मिक महीना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में आस्था, संयम और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की पूजा करने से मन को शांति मिलती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि हर वर्ष सावन के सोमवार को देशभर में करोड़ों श्रद्धालु शिव आराधना में शामिल होते हैं।

निष्कर्ष:

एक स्वर, एक भावना — हर-हर महादेव

सावन के पहले सोमवार ने एक बार फिर भारत की आध्यात्मिक परंपरा और धार्मिक आस्था की विराट तस्वीर प्रस्तुत की। मंदिरों की घंटियां, मंत्रों की गूंज और भक्तों के जयकारों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।देश के कोने-कोने से यही संदेश गूंजा —”जहां आस्था है, वहां ऊर्जा है… जहां शिव हैं, वहां कल्याण है।

🌹🙏हर-हर महादेव।”🙏🌹

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