कल 55 मिनट टहला, सुबह तक दिक्कत रही”— दिल्ली के खतरनाक पलूशन पर CJI सूर्यकांत की तल्ख टिप्पणी; न्यायपालिका भी हुई परेशान

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 26 नवंबर

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते प्रदूषण ने जहां आम जनजीवन को बेहाल किया है, वहीं अब यह चिंता देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गई है।सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. सूर्यकांत ने बुधवार को सुनवाई के दौरान राजधानी की हवा की बिगड़ती हालत पर अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्पणी की।सीजेआई ने अपने निजी अनुभव का हवाला देते हुए कहा—“

कल मैं सिर्फ 55 मिनट टहलने गया था… और सुबह तक सांस लेने में दिक्कत बनी रही। दिल्ली की हवा में चलना भी मुश्किल हो गया है।”उनकी इस टिप्पणी ने संकेत दिया कि दिल्ली का पलूशन अब सिर्फ नीति निर्धारण का नहीं, बल्कि स्वास्थ्य आपातकाल का रूप ले चुका है।सुनवाई में पलूशन बना अनकहा ‘मुख्य मुद्दा’एसआईआर मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए कोर्ट से छूट मांगी।सीजेआई ने तुरंत पूछा—क्या आपकी तबियत दिल्ली के मौसम से जुड़ी है?द्विवेदी ने हाँ कहा, जिसके बाद CJI ने पलूशन को लेकर अपनी पीड़ा साझा की।वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल भी सहमत नजर आए। उन्होंने कहा—

मैंने टहलना ही बंद कर दिया है। हमारी उम्र में इस हवा में सांस लेना ही खतरा है।”द्विवेदी ने जोड़ा कि उनकी सेहत सिर्फ टहलने के बाद ही बिगड़ी।सिब्बल ने शाम का हवाला देते हुए कहा—शाम को भी AQI 350 के आसपास रहता है, तो बाहर निकलना ही खतरे से खाली नहीं।”वर्चुअल सुनवाई की मांग तेज—

क्या सुप्रीम कोर्ट ऐसा कदम उठाएगा?एडवोकेट द्विवेदी ने अदालत से अपील की कि प्रदूषण की वजह से सुनवाई वर्चुअल मोड में की जाए।कपिल सिब्बल ने तुरंत इसका समर्थन किया।सीजेआई ने कहा—अगर ऐसा निर्णय लेना होगा तो बार को विश्वास में लेना पड़ेगा। कोई एक यूनिफॉर्म नियम होना चाहिए। बार इसकी जरूरत महसूस करता है तो हम उस प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार हैं।इस टिप्पणी से संकेत मिलता है कि यदि पलूशन और बढ़ा, तो सुप्रीम कोर्ट ऑफिशियली वर्चुअल कोर्ट मॉडल पर फिर लौट सकता है।दिल्ली की हवा—

‘गैस चेंबर’ की तरफ?

विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली का AQI बीते दिनों लगातार—400+ ‘गंभीर श्रेणी’300–350 ‘बहुत खराब’ श्रेणीके बीच रहा है।स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि:60 मिनट चलने से एक पैकेट सिगरेट जितना नुकसानबच्चों में फेफड़ों का 25–30% विकास प्रभावित वरिष्ठ नागरिकों पर सीधा असर—दिल, फेफड़े, BP जोखिम

न्यायपालिका की चिंता—केंद्र और राज्यों के लिए कड़ा संदेश पर्यावरण मामलों के विशेषज्ञ और पूर्व NGT सदस्य डॉ. सोमपाल राठी का कहना है—जब सुप्रीम कोर्ट के जज और देश के वरिष्ठ वकील खुद हवा की वजह से परेशान हैं, यह स्पष्ट संकेत है कि नीति निर्माताओं को तुरंत युद्धस्तर पर कदम उठाने होंगे।

वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्ता कहती हैं—न्यायपालिका की यह चिंता सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि दिल्ली के करोड़ों नागरिकों की आवाज़ है।”क्या दिल्ली एक बार फिर ‘स्वास्थ्य आपातकाल’ की कगार पर?दिल्ली के अस्पतालों में पिछले 10 दिनों में—सांस के मरीज 30% बढ़ेबच्चों में खांसी-दमा के मामले 40% ज्यादाफेफड़ों के संक्रमण के केस तेजी से बढ़ेAIIMS के एक डॉक्टर ने कहा—दिल्ली की हवा बीमार है, और इसे ठीक करने के लिए प्रशासन का गंभीर हस्तक्षेप ही एकमात्र उपाय है।

निष्कर्ष—

“जब टहलना भी मुश्किल हो जाए…”CJI की टिप्पणी सिर्फ एक निजी अनुभव नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय चेतावनी है—कि दिल्ली की हवा अब इस कदर जहरीली हो गई है किदेश की सर्वोच्च न्यायपालिका भी इससे अछूती नहीं।यह सवाल अब सरकारों से है—“अगर जज, वकील, बच्चे, बुजुर्ग… कोई भी सुरक्षित नहीं, तो समाधान कब?

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