70 करोड़ के नकली सिक्कों का खेल! मधुबनी से मिथिलेश चौरसिया गिरफ्तार, पांच साल तक रह चुका है प्रमुख प्रतिनिधि; छह मशीनों से रोजाना बनते थे 10 से 12 हजार सिक्के, शराब ठेकों तक फैला था कथित सप्लाई नेटवर्क। मैथिली गीतों में भी कर चुका है काम।

बी के झा, एन एस के पोर्टल

NSK news India

मधुबनी (बिहार), 24 अक्टूबर

जिस व्यक्ति ने कभी स्थानीय स्तर पर प्रमुख प्रतिनिधि की जिम्मेदारी निभाई, जिसकी पहचान मैथिली गीतों में काम करने वाले व्यक्ति के रूप में भी रही, अब उसका नाम कथित तौर पर करोड़ों रुपये के नकली सिक्के बाजार में खपाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़ने के बाद चर्चा में है।

उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस ने मधुबनी जिले के राजनगर थाना क्षेत्र में छापेमारी कर मिथिलेश चौरसिया को गिरफ्तार किया है। पुलिस का आरोप है कि वह करीब 70 करोड़ रुपये के नकली सिक्के बाजार में खपाने वाले गिरोह से जुड़ा हुआ है।इस कार्रवाई ने न केवल स्थानीय इलाके में हलचल पैदा की है, बल्कि नकली सिक्कों के कथित कारोबार के उस नेटवर्क पर भी सवाल खड़े किए हैं, जो मशीनों से सिक्के तैयार करने से लेकर उन्हें बाजार में खपाने तक फैला हुआ था।

सहारनपुर से मधुबनी तक पुलिस की कार्रवाई

मामला उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में सामने आए नकली सिक्के बनाने और उनकी आपूर्ति करने वाले गिरोह से जुड़ा है। सहारनपुर पुलिस ने बीते 12 सितंबर को कथित गिरोह के सरगना उपकार लुथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों में मधुबनी जिले के राजनगर थाना क्षेत्र स्थित लड्डुगांव निवासी संतोष चौरसिया भी शामिल था।

मामले की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के अनुसार, मिथिलेश चौरसिया का नाम भी सामने आया। इसके बाद सहारनपुर नगर थाने के एसआई इकबाल सिंह तोमर के नेतृत्व में पुलिस टीम मधुबनी पहुंची।राजनगर थाना पुलिस के सहयोग से टीम ने गुरुवार देर शाम लड्डुगांव में छापेमारी कर मिथिलेश को गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को सहारनपुर पुलिस उसे अपने साथ ले गई।

राजनगर के थानेदार सतेन्द्र कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि सहारनपुर पुलिस इस मामले में पहले ही कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। मिथिलेश की गिरफ्तारी को उसी जांच की अगली कड़ी माना जा रहा है।

हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।

छह मशीनें, रोजाना 10 से 12 हजार सिक्के बनाने का दावा

इस मामले में पुलिस की पिछली कार्रवाई के दौरान बरामद सामान कथित कारोबार के पैमाने की ओर इशारा करता है।पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 20 रुपये मूल्य के 6,400 तैयार सिक्के बरामद किए गए थे, जिनकी कुल कीमत 1.28 लाख रुपये बताई गई। इसके अलावा करीब 4.5 लाख रुपये मूल्य के अर्धनिर्मित सिक्के भी मिले थे।छापेमारी में सिक्के बनाने वाली छह मशीनें, सिक्कों पर छाप लगाने वाली मोहरें, मोहर लगी और बिना मोहर वाली दर्जनों डाई, इलेक्ट्रॉनिक कांटा, मेटल शीट तथा अन्य संदिग्ध सामान भी जब्त किया गया था।

सहारनपुर के एसएसपी के मुताबिक, गिरोह इन छह मशीनों की मदद से प्रतिदिन 10 से 12 हजार सिक्के तैयार करता था। यदि यह उत्पादन क्षमता लगातार बनी रहती, तो कुछ ही समय में बड़ी संख्या में नकली सिक्के बाजार तक पहुंचाए जा सकते थे।

यही वजह है कि जांच एजेंसियों के सामने अब केवल आरोपियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि कथित उत्पादन और वितरण व्यवस्था की पूरी कड़ी का पता लगाना भी महत्वपूर्ण चुनौती है।

पांच-छह रुपये की लागत, 12 से 15 रुपये में एजेंटों को आपूर्ति

पुलिस के अनुसार, इस कथित कारोबार का आर्थिक गणित भी बेहद अहम है। एक नकली सिक्का तैयार करने में पांच से छह रुपये खर्च होते थे, जबकि 20 रुपये के अंकित मूल्य वाले सिक्के एजेंटों को 12 से 15 रुपये में दिए जाते थे।इसके बाद एजेंट कमीशन के आधार पर इन्हें अलग-अलग दुकानों और प्रतिष्ठानों तक पहुंचाते थे।

पुलिस का दावा है कि गिरोह ने शराब की दुकानों और ठेकों को भी अपने कथित वितरण नेटवर्क का प्रमुख हिस्सा बनाया था।इस व्यवस्था में सिक्के तैयार करने वाले और उन्हें बाजार में खपाने वाले लोगों की भूमिकाएं अलग-अलग थीं। इससे पूरे नेटवर्क तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता था।

यहां सबसे बड़ा सवाल है कि यदि गिरोह इतने बड़े पैमाने पर सिक्के तैयार कर रहा था, तो उसके एजेंट कौन थे, सिक्के किन-किन जिलों में पहुंचाए गए और इस कथित कारोबार से जुड़े अन्य लोग कौन हैं?

इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ ही सामने आ सकेंगे।

70 करोड़ रुपये के नकली सिक्कों का आरोप, जांच के दायरे में नेटवर्क

मिथिलेश चौरसिया पर करीब 70 करोड़ रुपये के नकली सिक्के बाजार में खपाने वाले गिरोह से जुड़े होने का आरोप है। इस संबंध में सहारनपुर नगर थाने में मामला दर्ज है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि 70 करोड़ रुपये का आंकड़ा वास्तव में बाजार में खपाए जा चुके सिक्कों का है, कथित कारोबार के कुल अनुमान का है या पुलिस की जांच में सामने आए किसी अन्य आकलन का।

इसलिए इस रकम को जांच में पूरी तरह प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय पुलिस से जुड़े आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।जांच के लिहाज से यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि सिक्के कहां बनाए जाते थे, कच्चा माल कहां से आता था, तैयार सिक्कों को किन माध्यमों से अलग-अलग इलाकों तक पहुंचाया जाता था और कथित नेटवर्क में प्रत्येक व्यक्ति की क्या भूमिका थी।

पांच साल तक प्रमुख प्रतिनिधि, मैथिली गीतों में भी किया काम

मिथिलेश चौरसिया की गिरफ्तारी के बाद लड्डुगांव और आसपास के इलाकों में चर्चा तेज हो गई है। पुलिस के अनुसार, वह करीब पांच वर्षों तक राजनगर में प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में काम कर चुका है। इसके अलावा, उसने कई मैथिली गीतों में भी काम किया है।स्थानीय स्तर पर उसकी इस पृष्ठभूमि और मौजूदा मामले में गिरफ्तारी को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

हालांकि, किसी व्यक्ति की पूर्व सामाजिक या सार्वजनिक भूमिका अपने आप में उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों का प्रमाण नहीं होती। मामले में उसकी वास्तविक भूमिका का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

अब आगे क्या?

एजेंटों से लेकर बाजार तक होगी जांच की चुनौती

मिथिलेश की गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला महत्वपूर्ण पहलू कथित गिरोह के पूरे नेटवर्क को समझना होगा। पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि आरोपी की भूमिका कथित उत्पादन, आपूर्ति या बाजार में सिक्के खपाने के किस हिस्से में थी।इसके साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि पहले गिरफ्तार किए गए आरोपियों और मिथिलेश के बीच क्या संबंध था तथा कथित कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कैसे की जा सकती है।

यदि पुलिस के आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला नकली सिक्कों के उत्पादन और वितरण के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा कर सकता है। फिलहाल, सहारनपुर पुलिस की कार्रवाई के बाद सबकी नजर जांच के अगले चरण पर है।

एन एस के का निष्कर्ष:

मधुबनी के एक गांव से हुई यह गिरफ्तारी केवल एक आरोपी तक सीमित मामला नहीं है। इसके पीछे कथित तौर पर करोड़ों रुपये के नकली सिक्कों का नेटवर्क होने का आरोप है।

अब सबसे अहम सवाल यही है कि इस कारोबार की जड़ें कहां तक फैली थीं, बाजार में कितने नकली सिक्के पहुंचे और इस पूरे खेल में किन-किन लोगों की भूमिका थी।

इन सवालों का जवाब जांच की दिशा और सामने आने वाले तथ्यों से ही मिलेगा।

एन एस के पोर्टल – खबर वही, नजर अलग।

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