बी के झा
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श्रीनगर/कुलगाम, 31 जुलाई
जम्मू-कश्मीर में शांति और सामान्य जनजीवन को पटरी पर लाने की कोशिशों के बीच आतंकवाद ने एक बार फिर अपना खूनी चेहरा दिखाया है। शुक्रवार शाम दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों ने गैर-स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। इस कायराना हमले में एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक घेराबंदी कर आतंकियों की तलाश तेज कर दी है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कुलगाम के केल्लाम क्षेत्र में काम कर रहे दो मजदूरों पर आतंकियों ने अचानक हमला कर दिया। दोनों को गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने दीपक को मृत घोषित कर दिया, जबकि भूपेंद्र कुमार को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज, अनंतनाग रेफर किया गया। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।छत्तीसगढ़ से रोज़गार की तलाश में आए थे दोनों मजदूर
पुलिस के अनुसार दोनों पीड़ित छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और रोजी-रोटी कमाने के लिए जम्मू-कश्मीर आए थे। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकियों ने जानबूझकर गैर-स्थानीय श्रमिकों को निशाना बनाकर भय का वातावरण बनाने और घाटी में सामान्य होते हालात को अस्थिर करने की कोशिश की है।
आतंकियों की तलाश में व्यापक घेराबंदी
हमले के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया। जंगलों और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में संयुक्त तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर सभी संभावित मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। जांच एजेंसियां हमले के पीछे सक्रिय आतंकी संगठन, स्थानीय मददगारों और साजिश के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों की राय
राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के हमलों का उद्देश्य केवल हत्या करना नहीं होता, बल्कि घाटी में लौटते सामान्य माहौल को नुकसान पहुंचाना और बाहरी राज्यों के श्रमिकों में भय पैदा करना भी होता है। उनके अनुसार जब भी जम्मू-कश्मीर में पर्यटन, निवेश और विकास गतिविधियां गति पकड़ती हैं, आतंकी संगठन ऐसे हमलों के जरिए अस्थिरता फैलाने का प्रयास करते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आतंकवाद अब वैचारिक लड़ाई नहीं, बल्कि शांति और विकास के खिलाफ हिंसक प्रतिक्रिया बन चुका है। निर्दोष मजदूरों को निशाना बनाना इस बात का संकेत है कि आतंकवादी संगठन आम नागरिकों के मन में डर पैदा कर आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना चाहते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी घटनाएं सुरक्षा तंत्र के लिए चुनौती अवश्य हैं, लेकिन इससे आतंकवाद के खिलाफ अभियान और अधिक तेज होने की संभावना है।
बीजेपी ने की कड़ी निंदा
बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इस आतंकी हमले की तीखी निंदा करते हुए कहा कि यह जम्मू-कश्मीर में शांति और सामान्य स्थिति को बिगाड़ने की एक “कायरतापूर्ण, बर्बर और अमानवीय” कोशिश है। उन्होंने मृतक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए घायल मजदूर के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
ठाकुर ने कहा, “आतंकवाद का कोई धर्म, कोई इंसानियत और कोई औचित्य नहीं होता। ईमानदारी से मेहनत-मजदूरी करने आए निर्दोष व्यक्ति की हत्या मानवता पर हमला है। ऐसी घटनाएं कश्मीर की सदियों पुरानी भाईचारे और मेहमाननवाजी की संस्कृति को भी चोट पहुंचाती हैं।
“समाजसेवियों की प्रतिक्रिया
सामाजिक संगठनों ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मेहनतकश मजदूर किसी राजनीति या संघर्ष का हिस्सा नहीं होते। वे केवल अपने परिवार का पेट पालने के लिए घर से दूर काम करने आते हैं। ऐसे लोगों पर हमला पूरे समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाली घटना है।
कानूनविदों की टिप्पणी
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि निर्दोष नागरिकों की हत्या अंतरराष्ट्रीय मानवीय सिद्धांतों के भी विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मामलों में त्वरित जांच, अभियोजन और दोषियों को कठोर दंड ही ऐसे अपराधों के विरुद्ध सबसे प्रभावी संदेश होगा।
शिक्षाविदों की अपील
शिक्षाविदों ने कहा कि आतंकवाद का सबसे बड़ा उद्देश्य समाज में भय और विभाजन पैदा करना होता है। उन्होंने लोगों से अफवाहों से बचने, सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और सुरक्षा एजेंसियों पर विश्वास रखने की अपील की।
संपादकीय दृष्टि
कश्मीर में निर्दोष मजदूरों पर हुआ यह हमला केवल दो व्यक्तियों पर गोलीबारी नहीं, बल्कि शांति, विकास और मानवीय मूल्यों पर सीधा हमला है। जो लोग अपने परिवार का भविष्य संवारने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर मेहनत करने आते हैं, उन्हें निशाना बनाना आतंकवाद की सबसे कायर और अमानवीय तस्वीर है। ऐसे समय में आवश्यक है कि सुरक्षा एजेंसियां दोषियों को शीघ्र कानून के शिकंजे में लाएं और यह स्पष्ट संदेश दें कि भारत की एकता, विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था को हिंसा के बल पर कभी कमजोर नहीं किया जा सकता।
आतंक का जवाब केवल दृढ़ सुरक्षा, त्वरित न्याय और राष्ट्रीय एकजुटता से ही दिया जा सकता है।
