बी. के. झा – एन एस के
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नई दिल्ली , 21 अक्टूबर
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने अपने सहयोगियों सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के बीच एक भावुक वीडियो संदेश जारी कर आंदोलन के नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया है। दिपके ने कहा कि आंदोलन से जुड़े बड़े फैसले सौरव दास और आशुतोष रांका ही लेते थे और वह उनके निर्देशों का पालन करते थे। उनके मुताबिक, बाहर से भले ही ऐसा लगता हो कि आंदोलन की कमान उनके हाथों में है, लेकिन जमीनी स्तर पर आगे की रणनीति तय करने में दोनों सहयोगियों की अहम भूमिका थी।
दशहरा के अवसर पर जारी लगभग 16 मिनट के वीडियो संदेश में दिपके ने सौरव और आशुतोष को अपना भाई और परिवार बताते हुए उनकी गिरफ्तारी पर भावनात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दोनों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनकी निर्णय लेने की क्षमता उनसे बेहतर है।
दिपके ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर वीडियो साझा किया। इस दौरान उन्होंने पार्टी समर्थकों से दिवाली तक विराम लेने और अपने परिवार के साथ समय बिताने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल दिवाली तक CJP की ओर से किसी प्रदर्शन की योजना नहीं है।उनके बयान ने एक ओर आंदोलन के भीतर सहयोगियों की भूमिका को सामने रखा है, तो दूसरी ओर यह भी स्पष्ट किया है कि पार्टी अपने दो प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बीच फिलहाल सार्वजनिक प्रदर्शनों से दूरी बनाए रखना चाहती है।
‘बाहर से लगता था मैं नेता हूं, लेकिन बड़े फैसले वे लेते थे’
अभिजीत दिपके के वीडियो संदेश का सबसे चर्चित हिस्सा आंदोलन के नेतृत्व को लेकर उनकी स्वीकारोक्ति रही। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने आंदोलन को आगे बढ़ाया है, तो वे सौरव दास और आशुतोष रांका हैं।
दिपके के अनुसार, दोनों उन्हें बताते थे कि अगले दिन कहां जाना है और क्या करना है। उन्होंने यह भी कहा कि सौरव और आशुतोष की निर्णय लेने की क्षमता उनसे बेहतर है।यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी भी राजनीतिक आंदोलन में सार्वजनिक चेहरा और पर्दे के पीछे रणनीति तैयार करने वाले लोगों की भूमिकाएं अलग-अलग हो सकती हैं। दिपके के इस कथन से CJP के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर एक नई तस्वीर सामने आती है।
हालांकि, उनके बयान के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि आंदोलन में अन्य सदस्यों की कोई भूमिका नहीं थी। फिलहाल यह दिपके का अपने दो निकट सहयोगियों की भूमिका को लेकर दिया गया व्यक्तिगत आकलन है।
गिरफ्तारी से आहत अभिजीत, बोले— वे मेरे भाई और परिवार हैं
वीडियो संदेश में दिपके ने सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि तीनों का एक अलग व्हाट्सऐप समूह था, जिसमें वे मीम्स साझा करते थे।दिपके ने भावुक अंदाज में कहा कि वह आज भी उस समूह को खोलते हैं और उन्हें ऐसा महसूस होता है, जैसे दोनों अब भी वहां मौजूद हों।उनके इस बयान से स्पष्ट है कि दोनों नेताओं की गिरफ्तारी का असर केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके निजी संबंधों पर भी पड़ा है।
राजनीतिक आंदोलनों में अक्सर नेतृत्व, रणनीति और सार्वजनिक भाषणों की चर्चा होती है, लेकिन आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच बनने वाले व्यक्तिगत संबंध भी उनकी कार्यशैली को प्रभावित करते हैं। दिपके का संदेश इसी पहलू को सामने लाता है।
13 अक्टूबर की घटना के बाद न्यायिक हिरासत में हैं दोनों नेता
सौरव दास और आशुतोष रांका 13 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई घटना के बाद न्यायिक हिरासत में हैं।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों पर आरोप है कि उन्होंने बंद गेट पार करके उस स्थान में प्रवेश किया, जहां प्रदर्शन को लेकर प्रतिबंध लागू थे। उन पर 10 अक्टूबर को हस्ताक्षरित पीस बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया गया है।घटना के दौरान दोनों नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए थे।इस प्रकरण के संबंध में पुलिस ने मामले दर्ज किए हैं और जांच जारी है। हालांकि, आरोपों और कानूनी प्रक्रिया के बीच अंतर करना जरूरी है। न्यायिक हिरासत में होना किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने के समान नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाएगा।
दोनों नेताओं की गिरफ्तारी के बाद CJP की आगे की रणनीति और आंदोलन की निरंतरता को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब दिपके ने दिवाली तक किसी प्रदर्शन की योजना नहीं होने की बात कहकर तत्काल भविष्य के लिए पार्टी की गतिविधियों को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है।
दिवाली तक आंदोलन पर विराम, समर्थकों से परिवार को समय देने की अपील
अभिजीत दिपके ने अपने संदेश में पार्टी समर्थकों को, जिन्हें संगठन में ‘कॉकरोच’ कहा जाता है, फिलहाल विराम लेने की सलाह दी।उन्होंने दिवाली तक किसी प्रदर्शन का आयोजन नहीं करने की बात कही और समर्थकों से अपने परिवार के साथ समय बिताने की अपील की।यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के बाद पार्टी के सामने अपने आंदोलन की दिशा तय करने की चुनौती है।दिवाली तक प्रदर्शन नहीं करने का फैसला अस्थायी विराम के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, इसके बाद आंदोलन किस रूप में आगे बढ़ेगा, क्या पार्टी फिर से प्रदर्शन करेगी और उसके अगले राजनीतिक कदम क्या होंगे, इस पर दिपके ने फिलहाल कोई विस्तृत योजना सार्वजनिक नहीं की है।
अब बड़ा सवाल यह है कि दोनों प्रमुख सहयोगियों की अनुपस्थिति में CJP अपने आंदोलन की रणनीति कैसे तय करेगी और दिवाली के बाद उसकी अगली दिशा क्या होगी?
फ्रांस के दंगों से तुलना पर दिपके का जवाब, गांधी के सत्याग्रह का दिया उदाहरण
CJP के प्रदर्शनों की तुलना फ्रांस में हुई हिंसक घटनाओं से किए जाने के सवाल पर भी अभिजीत दिपके ने प्रतिक्रिया दी।उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने जेल जाने के बावजूद शांतिपूर्ण रास्ता चुना। दिपके के अनुसार, दोनों ने गुस्से और नफरत के बजाय शांति और करुणा का रास्ता अपनाया।उन्होंने दोनों नेताओं के रवैये की तुलना महात्मा गांधी के सत्याग्रह से की और कहा कि जेल जाने के बाद भी उन्होंने अहिंसा का रास्ता नहीं छोड़ा।यह तुलना दिपके की अपनी राजनीतिक व्याख्या है। गांधीवादी सत्याग्रह का मूल आधार अहिंसा, सत्य, नैतिक आग्रह और अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध रहा है।
किसी मौजूदा आंदोलन को इस परंपरा से जोड़ने का मूल्यांकन उसके वास्तविक आचरण, उद्देश्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।इसी तरह, फ्रांस में हुई हिंसा और CJP के प्रदर्शन के बीच तुलना करते समय दोनों घटनाओं की परिस्थितियों, प्रदर्शन के स्वरूप और हिंसा से जुड़े तथ्यों को अलग-अलग समझना जरूरी है।दिपके का तर्क है कि उनके सहयोगियों ने जेल जाने की स्थिति में भी अहिंसा का रास्ता नहीं छोड़ा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे CJP अपने आंदोलन को किस तरह संचालित करती है और अपने घोषित शांतिपूर्ण रुख को व्यवहार में कैसे बनाए रखती है।
CJP की राजनीति में आगे क्या? नेतृत्व, कानूनी लड़ाई और आंदोलन की दिशा पर निगाहें
अभिजीत दिपके का बयान ऐसे समय में आया है, जब पार्टी के दो प्रमुख नेता न्यायिक हिरासत में हैं और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच चल रही है।उनके बयान के तीन महत्वपूर्ण पहलू हैं।
पहला, उन्होंने आंदोलन के फैसलों में सौरव दास और आशुतोष रांका की प्रमुख भूमिका स्वीकार की।
दूसरा, उन्होंने दोनों नेताओं के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को सार्वजनिक रूप से सामने रखा।
तीसरा, उन्होंने दिवाली तक प्रदर्शन नहीं करने की बात कहकर तत्काल आंदोलन को विराम देने का संकेत दिया।
इन घटनाक्रमों से CJP की आगे की रणनीति को लेकर चर्चा तेज होना स्वाभाविक है। हालांकि, केवल एक वीडियो संदेश के आधार पर संगठन की आंतरिक स्थिति, नेतृत्व में किसी संभावित बदलाव या आंदोलन के भविष्य के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।आने वाले दिनों में दोनों नेताओं की कानूनी स्थिति, पार्टी की ओर से जारी होने वाले अगले बयान और दिवाली के बाद की गतिविधियां इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी।
एन एस के विश्लेषण:
भावनात्मक संदेश के पीछे आंदोलन के नेतृत्व का सवालअभिजीत दिपके का वीडियो संदेश केवल अपने सहयोगियों की गिरफ्तारी पर भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं है। इसमें आंदोलन के भीतर नेतृत्व और निर्णय लेने की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत हैं।दिपके ने सार्वजनिक रूप से सौरव दास और आशुतोष रांका को आंदोलन की रणनीति तय करने वाला प्रमुख पक्ष बताया है। इससे CJP की कार्यशैली और उसके नेतृत्व के स्वरूप को समझने का एक आधार मिलता है।
लेकिन किसी आंदोलन की वास्तविक ताकत केवल उसके प्रमुख चेहरों या रणनीतिकारों से निर्धारित नहीं होती। उसकी निरंतरता संगठनात्मक ढांचे, समर्थकों की भागीदारी, घोषित उद्देश्यों और कानूनी परिस्थितियों से भी प्रभावित होती है।
दिवाली तक प्रदर्शन नहीं करने का फैसला CJP को अपनी अगली रणनीति पर विचार करने का समय दे सकता है। वहीं, सौरव दास और आशुतोष रांका के मामलों में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर भी संगठन की निगाहें रहेंगी।
फिलहाल अभिजीत दिपके का संदेश तीन बातें सामने रखता है— सहयोगियों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव, आंदोलन में उनकी निर्णायक भूमिका की स्वीकारोक्ति और तत्काल प्रदर्शनों से विराम का संकेत।
अब असली परीक्षा यह होगी कि CJP आगे अपनी राजनीतिक दिशा, संगठनात्मक एकजुटता और शांतिपूर्ण आंदोलन के दावे को किस तरह आगे बढ़ाती है।
एन एस के की नजर इस पूरे घटनाक्रम और दोनों नेताओं की कानूनी स्थिति पर बनी रहेगी।
