बी के झा
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नई दिल्ली, 13 अगस्त
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की निगरानी टीम की 38वीं रिपोर्ट ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट में पहली बार नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी हमले को अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जोड़ा गया है। हालांकि भारत में इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है और अंतिम निष्कर्ष न्यायालय तथा जांच एजेंसियों के साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।यह रिपोर्ट केवल एक आतंकी घटना का उल्लेख नहीं करती, बल्कि यह बताती है कि दक्षिण एशिया में आतंकवाद अब नए स्वरूप में संगठित हो रहा है। छोटे मॉड्यूल, गुप्त फंडिंग नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का दुरुपयोग भविष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बनकर उभर रहा है।
AQIS का बदला हुआ चेहरा
UN रिपोर्ट के अनुसार AQIS पहले बिखरा हुआ संगठन माना जाता था, लेकिन अब उसने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है। बड़े प्रशिक्षण शिविरों और भारी जमावड़ों की जगह अब यह छोटे-छोटे स्वतंत्र मॉड्यूल के माध्यम से काम कर रहा है। यही कारण है कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐसे नेटवर्क का पता लगाना पहले से अधिक कठिन हो गया है।रिपोर्ट में यह आशंका भी व्यक्त की गई है कि AQIS बांग्लादेश में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर सकता है, जिससे भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर प्रभाव पड़ सकता है।
AI: आतंकवाद का नया डिजिटल हथियार
रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आतंकी संगठन अब AI आधारित उपकरणों का उपयोग प्रचार सामग्री का अनुवाद, कट्टरपंथी संदेशों का प्रसार और तकनीकी जानकारी जुटाने के लिए कर रहे हैं। ISIL-K जैसे संगठन विभिन्न भाषाओं में अपने प्रचार को तेजी से फैलाने के लिए AI का सहारा ले रहे हैं।
विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि AI स्वयं अपराधी नहीं है, बल्कि उसका दुरुपयोग ही वास्तविक खतरा है। इसलिए तकनीकी सुरक्षा और डिजिटल निगरानी दोनों को समान रूप से मजबूत करना आवश्यक है।
दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, NIA और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां राजधानी में सक्रिय संदिग्ध मॉड्यूल, एन्क्रिप्टेड डिजिटल संचार और आतंकी फंडिंग नेटवर्क पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि भविष्य का आतंकवाद केवल विस्फोटकों से नहीं, बल्कि साइबर नेटवर्क और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी संचालित होगा।
कानूनविदों की राय
संवैधानिक कानून विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज अवश्य है, लेकिन भारतीय कानून में किसी भी संगठन या व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी केवल अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों से ही तय होगी। उनका मानना है कि साइबर आतंकवाद और AI के दुरुपयोग को देखते हुए कानूनी ढांचे को और आधुनिक बनाने की आवश्यकता है।
शिक्षाविदों और समाजसेवियों की चिंता
शिक्षाविदों का कहना है कि डिजिटल साक्षरता अब राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बन चुकी है। विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में युवाओं को ऑनलाइन कट्टरपंथ, फर्जी प्रचार और दुष्प्रचार की पहचान सिखाना समय की मांग है।समाजसेवी संस्थाओं ने भी सरकार से समुदाय आधारित जागरूकता अभियान चलाने की अपील की है, ताकि युवाओं को चरमपंथी विचारधाराओं के प्रभाव से बचाया जा सके।
सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार ने रिपोर्ट को सीमा पार आतंकवाद के विरुद्ध भारत की लंबे समय से व्यक्त चिंताओं की पुष्टि बताया है। सरकार ने दोहराया कि आतंकवाद के प्रति उसकी नीति “जीरो टॉलरेंस” की है और सुरक्षा एजेंसियों को हर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
विपक्ष ने भी आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा पर राजनीतिक एकजुटता की बात कही है। साथ ही विपक्ष ने NIA जांच की प्रगति और खुफिया तंत्र को और मजबूत बनाने पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की है।
निष्कर्ष
लाल किले के निकट हुआ हमला भारत की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी था। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट संकेत देती है कि आतंकवाद अब सीमाओं से आगे बढ़कर डिजिटल दुनिया में प्रवेश कर चुका है।
ऐसे समय में मजबूत सुरक्षा तंत्र, आधुनिक कानून, तकनीकी क्षमता और सामाजिक जागरूकता—चारों का समन्वय ही भारत की सबसे बड़ी ताकत साबित होगा।
