बीच में मत बोलो… चेयर से इजाजत लो’ — सहारनपुर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा विधायक आशु मलिक की भिड़ंत ने खोल दी गठबंधन की दरार

बी के झा

NSK news Ind

सहारनपुर , 19 अगस्त

उत्तर प्रदेश की सियासत में INDIA गठबंधन की एकता पर सवाल उस समय और गहरे हो गए, जब सहारनपुर में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (DISHA) की बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के विधायक आशु मलिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने ही तीखी बहस में उलझ गए। दोनों नेताओं की नोंकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है और इसे विपक्ष के भीतर नेतृत्व तथा वर्चस्व की लड़ाई के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक में कैसे बढ़ा विवाद?

करीब चार घंटे चली बैठक में आशु मलिक जनता की सड़क, सिंचाई और ग्रामीण विकास से जुड़ी समस्याएं उठाना चाहते थे। इसी दौरान इमरान मसूद ने उन्हें टोकते हुए कहा कि बैठक निर्धारित नियमों से चलेगी और किसी भी सदस्य को चेयर की अनुमति लेकर ही बोलना होगा।इस पर आशु मलिक ने जवाब दिया कि यह कोई राजनीतिक रैली नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों की आधिकारिक बैठक है। कुछ ही क्षणों में माहौल गर्म हो गया और दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कार्यवाही आगे बढ़ी।

वायरल वीडियो से तेज हुई राजनीतिक चर्चा

वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधा। भाजपा नेता (विधायक ) शलभमणि त्रिपाठी ने टिप्पणी की कि “यह तो अभी शुरुआत है, आगे देखिए क्या होता है।” हालांकि कांग्रेस और सपा की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है।

राजनीतिक विश्लेषक क्या कहते हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल बैठक की प्रक्रिया का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में विपक्ष के नेतृत्व की लड़ाई का प्रतीक है। राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय मिश्र कहते हैं, “सपा प्रदेश में अपनी संगठनात्मक ताकत के आधार पर नेतृत्व चाहती है, जबकि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन की प्रमुख पार्टी होने का दावा करती है। सहारनपुर की घटना इसी अंतर्विरोध का सार्वजनिक रूप है।

“शिक्षाविद डॉ. सीमा त्यागी का कहना है, “जनप्रतिनिधियों की असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विकास समीक्षा बैठक में सार्वजनिक टकराव जनता के बीच नकारात्मक संदेश देता है।

” दोनों दलों के नेताओं की अलग-अलग राय

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि बैठक की गरिमा बनाए रखने के लिए संसदीय नियमों का पालन आवश्यक था।वहीं सपा के एक क्षेत्रीय पदाधिकारी का कहना है कि विधायक जनता की समस्याएं उठा रहे थे और उन्हें रोकना उचित नहीं था। उनके अनुसार विकास बैठकों में जनहित सर्वोच्च होना चाहिए।

स्थानीय कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया

सहारनपुर के स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि इमरान मसूद ने केवल बैठक की प्रक्रिया का पालन कराने की कोशिश की।दूसरी ओर सपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जनता के मुद्दों को उठाने पर अनावश्यक आपत्ति जताई गई। कई कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इसे “अहम की लड़ाई” बताया।

2027 चुनाव से पहले बढ़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष संभावित विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर पहले ही दबाव में हैं। इमरान मसूद पूर्व में भी सपा के प्रति आलोचनात्मक रुख अपना चुके हैं, जबकि सपा खुद को प्रदेश में विपक्ष का स्वाभाविक नेतृत्वकर्ता मानती है।

निष्कर्ष

सहारनपुर की यह भिड़ंत महज दो नेताओं की बहस नहीं, बल्कि विपक्षी राजनीति के भीतर उभर रहे नेतृत्व संघर्ष की झलक है।

यदि दोनों दल समय रहते मतभेद नहीं सुलझाते, तो इसका असर चुनावी तालमेल और INDIA गठबंधन की रणनीति पर भी पड़ सकता है।

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