” बी के झा
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नई दिल्ली , 19 अगस्त
अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी सेना की गतिविधियों को लेकर देश में चल रही बहस के बीच केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री और अरुणाचल प्रदेश से सांसद किरेन रिजिजू ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की गतिविधियां बढ़ी हैं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि “चीन 60 किलोमीटर भारतीय सीमा के भीतर घुस आया” जैसे दावे तथ्यहीन हैं और ऐसे दुष्प्रचार से भारतीय सेना का मनोबल प्रभावित होता है।
रिजिजू ने कहा कि भारत-चीन सीमा का बड़ा हिस्सा आज भी औपचारिक रूप से सीमांकित नहीं है, इसलिए कई स्थानों पर दोनों देशों की धारणा अलग-अलग है। उन्होंने लोगों से अपील की कि संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बिना प्रमाण के दावे न किए जाएं।
रिजिजू ने क्या कहा?
रिजिजू के अनुसार अरुणाचल प्रदेश की लंबी सीमा पर कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां न तो स्थायी सीमा-स्तंभ हैं और न ही अंतिम डिमार्केशन हुआ है। उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों की चिंताएं वास्तविक हैं और सरकार उन्हें गंभीरता से ले रही है।उन्होंने कांग्रेस शासन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पहले सीमा क्षेत्रों में सड़क और सैन्य ढांचे के निर्माण से परहेज किया गया, जबकि चीन लगातार सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचा विकसित करता रहा। उनके मुताबिक 2014 के बाद भारत ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में तेज गति से इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण शुरू किया।
रक्षा विशेषज्ञ: “गतिविधि और घुसपैठ में फर्क समझना होगा
“लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) आर.के. सिंह का कहना है कि PLA की बढ़ती गश्त और निर्माण गतिविधियां चिंता का विषय हैं, लेकिन हर सैन्य गतिविधि को स्थायी घुसपैठ कहना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा। उनके अनुसार LAC की अलग-अलग धारणाएं ही अधिकांश तनाव की जड़ हैं।
रक्षा मामलों के विश्लेषक डॉ. अजय शुक्ला मानते हैं कि भारत को सैन्य सतर्कता के साथ-साथ कूटनीतिक स्तर पर भी सीमा विवाद के समाधान के प्रयास जारी रखने होंगे।
राजनीतिक विश्लेषण: चुनावी नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. संजय द्विवेदी कहते हैं कि सीमा सुरक्षा को दलगत राजनीति से ऊपर रखना चाहिए। उनके अनुसार सरकार को पारदर्शी तथ्य रखने चाहिए, जबकि विपक्ष को भी बिना पुष्टि के सनसनीखेज दावे करने से बचना चाहिए।
शिक्षाविद और कानूनविद की मांग
पटना के वरिष्ठ सेवानिवृत्त शिक्षाविद प्रो. रमेश्वर प्रसाद ने केंद्र सरकार से मांग की कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री संसद तथा देश के सामने अरुणाचल की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें।संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता अरुण मिश्रा का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सरकार की जवाबदेही और गोपनीयता दोनों का संतुलन आवश्यक है। संसद को समय-समय पर अधिकृत जानकारी मिलनी चाहिए।
सरकार और विपक्ष की संभावित प्रतिक्रिया
सरकारी पक्ष का कहना है कि भारतीय सेना पूरी तरह सतर्क है, सीमावर्ती गांवों का विकास तेज किया जा रहा है और किसी भी चुनौती का जवाब देने में सक्षम है।
वहीं विपक्षी दलों का तर्क है कि यदि स्थानीय नागरिक लगातार चिंता जता रहे हैं तो सरकार को विस्तृत आधिकारिक स्थिति रिपोर्ट जारी करनी चाहिए, ताकि अफवाहों और वास्तविक तथ्यों के बीच स्पष्ट अंतर सामने आ सके।
समाजसेवी संस्थाओं की अपील
सीमावर्ती क्षेत्रों में कार्यरत सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि सीमा गांवों में सड़क, संचार, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को और मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि मजबूत सीमा केवल सैनिक चौकियों से नहीं, बल्कि सशक्त सीमावर्ती नागरिकों से भी बनती है।
निष्कर्ष
किरण रिजिजू के बयान ने दो संदेश स्पष्ट किए हैं—पहला, PLA की गतिविधियां बढ़ने को सरकार हल्के में नहीं ले रही; दूसरा, अपुष्ट घुसपैठ के दावों से बचने की अपील की गई है।
अब देश की निगाह इस बात पर है कि सीमा की वास्तविक स्थिति पर सरकार आगे कितना विस्तृत और पारदर्शी विवरण सामने रखती है।
