बी के झा
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जयपुर / न ई दिल्ली, 22 अगस्त
राजस्थान की राजनीति में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और विवादास्पद मोड़ आया, जब भजनलाल शर्मा सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश किया। 309 पन्नों और 403 धाराओं वाले इस व्यापक विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे नागरिक मामलों के लिए सभी धर्मों पर समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है।विधेयक पेश होते ही सदन में जोरदार हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी करते हुए कार्यवाही का बहिष्कार किया, जिसके बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
विधेयक की प्रमुख बातें:;
सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार के समान नियम
बहुविवाह पर पूर्ण रोक
विवाह का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य
पंजीकरण न कराने पर ₹10,000 तक जुर्माना
पुरुष की न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष, महिला की 18 वर्ष*
लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य
लिव-इन से जन्मे बच्चों को वैध संतान का दर्जा
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि यह कानून संविधान के समानता के सिद्धांत को मजबूत करेगा और नागरिक अधिकारों में एकरूपता लाएगा।
सरकार का पक्ष: “समान अधिकार, समान कानून”
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पहले ही मंत्रिमंडल से विधेयक को मंजूरी दिलाई थी। सरकार का दावा है कि यह किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि महिलाओं, बच्चों और परिवार संस्था को कानूनी सुरक्षा देने वाला सुधारवादी कदम है।
कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस ने विधेयक को सामाजिक सहमति के बिना लाया गया कानून बताते हुए इसका विरोध किया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार संवेदनशील धार्मिक मुद्दों का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रही है और व्यापक संवाद के बजाय बहुमत के बल पर कानून बनाना चाहती है।
मुस्लिम संगठनों का विरोध प्रदर्शन
विधानसभा में विधेयक पेश होने के साथ ही जयपुर के मोतीडूंगरी मुस्लिम मुसाफिरखाने में धर्मसभा आयोजित की गई। सभा के बाद मुस्लिम संगठनों ने विधानसभा कूच का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। बाद में प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर विधेयक वापस लेने की मांग की।
कई मुस्लिम मौलानाओं का कहना है कि व्यक्तिगत कानून धार्मिक स्वतंत्रता का हिस्सा हैं और उनमें हस्तक्षेप संविधान की भावना के विपरीत है।
हिंदू संगठनों और धर्माचार्यों की प्रतिक्रिया
विश्व हिंदू परिषद तथा अन्य हिंदू संगठनों ने विधेयक का स्वागत करते हुए इसे “एक देश, एक नागरिक कानून” की दिशा में बड़ा कदम बताया। कई धर्माचार्यों ने कहा कि समान नागरिक संहिता सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगी तथा जाति-धर्म से ऊपर समान नागरिक व्यवस्था स्थापित करेगी।
कानूनविद और शिक्षाविद क्या कहते हैं?
संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार UCC का आधार संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद 44 में निहित है, जो राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की सलाह देता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ऐसे कानून की सफलता उसके निष्पक्ष क्रियान्वयन और सभी समुदायों के विश्वास पर निर्भर करेगी।
शिक्षाविदों का मानना है कि विवाह पंजीकरण और उत्तराधिकार संबंधी स्पष्ट नियम भविष्य में कानूनी विवाद कम कर सकते हैं, जबकि लिव-इन पंजीकरण का प्रावधान सामाजिक और कानूनी बहस का नया विषय बनेगा।
स्थानीय प्रशासन और नागरिकों की भूमिका
जयपुर पुलिस ने संवेदनशीलता को देखते हुए विधानसभा और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए। स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रियाएं भी बंटी हुई दिखीं—
कुछ लोगों ने इसे समानता का कानून बताया, जबकि अन्य ने धार्मिक परंपराओं में सरकारी हस्तक्षेप पर चिंता व्यक्त की।
राजनीतिक महत्व
राजस्थान उत्तराखंड के बाद UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाले राज्यों की कतार में शामिल हो गया है। अब यह विधेयक विधानसभा की आगे की प्रक्रिया और संभावित कानूनी चुनौतियों के कारण राष्ट्रीय राजनीति तथा संवैधानिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बनने जा रहा है।
