बी के झा
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नई दिल्ली/सिलीगुड़ी, 22 अगस्त
भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील माने जाने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) की सुरक्षा अब और मजबूत होने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में घोषणा की कि इस रणनीतिक गलियारे की रक्षा के लिए धुबरी (असम), किशनगंज (बिहार) और चोपड़ा (पश्चिम बंगाल) को जोड़ते हुए एक ‘त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड’ विकसित किया जाएगा।
इसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र में निगरानी, सैन्य समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को नई मजबूती देना है।एसएसबी के नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में गृह मंत्री ने लगभग 189 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं आवासीय परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर गृह मंत्रालय, एसएसबी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
क्यों इतना महत्वपूर्ण है ‘चिकन नेक’?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर लगभग 22–25 किलोमीटर चौड़ा वह संकरा भूभाग है जो भारत के पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को शेष देश से जोड़ता है। इसके पश्चिम में नेपाल, पूर्व में बांग्लादेश और उत्तर में भूटान स्थित है। यही कारण है कि इसे भारत की सामरिक जीवनरेखा माना जाता है।
यदि इस क्षेत्र में सुरक्षा या संपर्क व्यवस्था प्रभावित होती है तो पूर्वोत्तर राज्यों तक सैन्य रसद, नागरिक आपूर्ति और परिवहन पर व्यापक असर पड़ सकता है। इसी वजह से यह इलाका लंबे समय से भारत की रक्षा रणनीति का केंद्र रहा है।
क्या होगा त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड?
गृह मंत्री के अनुसार नए सुरक्षा ढांचे में तीन प्रमुख सैन्य एवं सुरक्षा केंद्र शामिल होंगे:
धुबरी (असम) — पश्चिमी प्रवेश क्षेत्र की निगरानी
किशनगंज (बिहार) — कॉरिडोर के दक्षिणी हिस्से का समन्वय
चोपड़ा (पश्चिम बंगाल) — उत्तरी एवं सीमावर्ती क्षेत्र की सुरक्षा
इन तीनों बिंदुओं के बीच समन्वित सुरक्षा नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे खुफिया सूचना साझा करने, सीमा निगरानी और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ेगी।
‘तीस्ता प्रहार’ से परखी जा रही तैयारी
अमित शाह ने बताया कि इस क्षेत्र में नियमित रूप से ‘तीस्ता प्रहार’ जैसी सामरिक सैन्य कवायदें आयोजित की जा रही हैं। इन अभ्यासों का उद्देश्य सुरक्षा बलों की युद्धक तैयारी, आपसी तालमेल और सीमावर्ती चुनौतियों से निपटने की क्षमता का परीक्षण करना है।उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर बुनियादी ढांच़न और समन्वित सुरक्षा व्यवस्था के माध्यम से सिलीगुड़ी कॉरिडोर को हर परिस्थिति के लिए तैयार किया जा रहा है।
एसएसबी की भूमिका और विकसित भारत का विजन
गृह मंत्री ने कहा कि 1965 में स्थापित सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने सीमाओं की सुरक्षा में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्ष 2001 से एसएसबी भारत–नेपाल सीमा और 2004 से भारत–भूटान सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रही है।
उन्होंने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत 2047’ के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की प्रगति सात प्रमुख स्तंभों—मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा शक्ति, तकनीक, कृषि, गति शक्ति, हरित विकास और सॉफ्ट पावर—पर आधारित होगी। शाह ने कहा कि मजबूत सीमाएं और सुरक्षित सीमा क्षेत्र विकसित भारत की आधारशिला हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर दूरगामी असर
विशेषज्ञों के अनुसार सिलीगुड़ी कॉरिडोर में प्रस्तावित त्रिकोणीय सुरक्षा ग्रिड केवल सीमाओं की निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत की रणनीतिक कनेक्टिविटी, सैन्य लॉजिस्टिक्स और आपदा अथवा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को भी महत्वपूर्ण मजबूती प्रदान करेगा।
