पटना में छात्रों का हल्लाबोल: 15 सूत्री मांगों को लेकर सड़क पर उतरे छात्र, जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग तोड़ी; पुलिस से झड़प, सरकार ने बनाई पांच सदस्यीय कमेटी

बी. के. झा

पटना, 25 अगस्त

बिहार की राजधानी पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार से जुड़ी 15 सूत्री मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन मंगलवार को उग्र हो गया। गर्दनीबाग धरनास्थल से निकले प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास के घेराव की कोशिश की। जेपी गोलंबर के पास छात्रों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति बन गई। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी।छात्रों का कहना है कि 70वीं BPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और परीक्षा रद्द की जाए।

आंदोलनकारी TRE-4 में पहले की तरह एक परीक्षा कराने, निगेटिव मार्किंग खत्म करने, ‘एक उम्मीदवार-एक रिजल्ट’ नीति लागू करने, BSSC में संविदाकर्मियों को मिलने वाला वेटेज समाप्त करने तथा CGL-4, BSO और AEDO जैसी परीक्षाओं की तारीख घोषित करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा डोमिसाइल नीति और संविदा के बजाय स्थायी नियुक्ति की मांग भी उठाई गई है।छात्र नेता का कहना है कि अधिकारियों के सामने मांगें रखी गई हैं और सरकार तक बात पहुंचाने का आश्वासन मिला है, लेकिन जब तक ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

सरकार ने उठाया सुधार का कदम

लगातार बढ़ते छात्र दबाव के बीच सम्राट चौधरी सरकार ने भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। समिति परीक्षा में गड़बड़ियों को रोकने, प्रश्नपत्र सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, तकनीकी उपायों और परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा कर सुधार के सुझाव देगी।सरकार ने BPSC TRE-4 में भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है।

लेकिन छात्रों की मांगों और सरकार के फैसलों के बीच अभी भी कई मुद्दों पर सहमति नहीं बनी है।

विपक्ष को मिला सरकार घेरने का मौका

छात्र आंदोलन ने विपक्ष को भी सरकार पर हमला करने का अवसर दिया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में देरी, कथित पेपर लीक और परिणामों की अनिश्चितता से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। विपक्ष ने सरकार से छात्रों के साथ तत्काल संवाद कर उनकी जायज मांगों पर निर्णय लेने की मांग की है।

असली सवाल भरोसे का

शिक्षाविदों और कानूनविदों के नजरिये से छात्रों की मांगों को केवल राजनीतिक आंदोलन मानना उचित नहीं होगा। परीक्षा की पारदर्शिता, समयबद्ध परिणाम और निश्चित परीक्षा कैलेंडर युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़े मुद्दे हैं। वहीं कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, तो शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार।

पटना की सड़कों पर टूटी बैरिकेडिंग से बड़ा सवाल

अब सरकार और छात्रों के बीच भरोसे की उस दीवार का है, जिसे पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, समयबद्ध भर्ती और प्रभावी संवाद से ही हटाया जा सकता है।

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