राष्ट्रपति भवन की राजनयिक शाम: पुतिन के सम्मान में डिनर, थरूर पहुंचे— राहुल-खड़गे को निमंत्रण न मिलने पर सियासत गरम

बी के झा

NSK news India

नई दिल्ली , 6 दिसंबर

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दूसरे दिन राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष डिनर ने कूटनीतिक गलियारों के साथ-साथ भारतीय राजनीति में भी हलचल मचा दी। इस उच्चस्तरीय दावत में कांग्रेस सांसद शशि थरूर की उपस्थिति चर्चा का विषय बन गई, क्योंकि विपक्ष के दोनों प्रमुख चेहरे—लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को इस कार्यक्रम का निमंत्रण नहीं मिला।थरूर पहुंचे राष्ट्रपति भवन: “माहौल बहुत अच्छा और दिलचस्प था”डिनर में शामिल होने के बाद थरूर ने एक्स पर लिखा—“कल रात प्रेसिडेंट पुतिन के लिए राष्ट्रपति भवन के बैंक्वेट में शामिल हुआ। माहौल बहुत अच्छा और दिलचस्प था। कई लोगों से बातचीत करके मजा आया, खासकर रूसी प्रतिनिधिमंडल के साथ जो मेरी टेबल पर थे।”थरूर की यह सहज और सकारात्मक प्रतिक्रिया उस समय आई है जब उनके शामिल होने पर उनकी ही पार्टी में असहजता और सवाल उठे हुए हैं।थरूर ने संसद परिसर में पत्रकारों से साफ कहा था—“

हां, मुझे न्योता मिला था और मैं जाऊंगा। यह एक राजनयिक कार्यक्रम है।”विपक्ष के शीर्ष नेताओं को निमंत्रण नहीं—कांग्रेस भाजपा पर बरसीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसकी आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा—“राहुल गांधी और खड़गे दोनों को पुतिन के सम्मान में ऑफिशियल डिनर में नहीं बुलाया गया है।”

इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने और भी तीखी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा—“यह समझना जरूरी है कि यह खेल क्यों खेला जा रहा है, कौन खेल रहा है, और हमें इसका हिस्सा क्यों नहीं बनना चाहिए। जब मेरे शीर्ष नेताओं को नहीं बुलाया जाता लेकिन किसी एक सांसद को बुलाया जाता है, तो यह ‘व्यक्ति-विशेष’ को लेकर नहीं, बल्कि मंशा को समझने का समय है।”खेड़ा के इस बयान ने स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस डिनर लिस्ट को भाजपा की ‘‘विभाजनकारी राजनीतिक रणनीति’’ के रूप में देख रही है।

भाजपा की चुप्पी—लेकिन संदेश साफ हालांकि भाजपा ने इस विवाद पर प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया देने से परहेज किया, पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि—

1. शशि थरूर का निमंत्रण, कांग्रेस में ‘अलग धारा’ की पहचान को उभारने की कोशिश हो सकता है।थरूर अंतरराष्ट्रीय मामलों में विशेषज्ञ हैं और कई बार कांग्रेस लाइन से अलग राय रखते हैं।

2. राहुल–खड़गे को नहीं बुलाना एक राजनीतिक संकेत है—भाजपा यह दिखाना चाहती है कि विदेश नीति के मंच पर विपक्ष की भूमिका सीमित है,और सरकार रणनीतिक कार्यक्रमों में ‘पसंद-नापसंद’ का संदेश दे सकती है।डिनर में क्या हुआ?

इस विशेष राजनयिक डिनर में—शीर्ष नौकरशाहों,कैबिनेट मंत्रियों,विदेश नीति विशेषज्ञों,और रूस के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलकी उपस्थिति रही।सूत्रों के अनुसार वातावरण अत्यंत औपचारिक, गरिमामय और पारंपरिक भारतीय मेजबानी की शैली में सजा था।भारतीय भोजन के साथ क्लासिकल संगीत की प्रस्तुति भी थी।

राजनीतिक विश्लेषण:

निमंत्रण का संदेश डिनर से बड़ा कूटनीतिक डिनर सामान्यतः ‘‘राष्ट्र की गरिमा’’ का प्रतिनिधित्व करते हैं, न कि ‘‘पार्टी-विशेष’’ का।लेकिन इस बार निमंत्रण सूची ने राजनीतिक प्रभाव ज्यादा पैदा किया।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय:

1. यह संकेत है कि मोदी सरकार विपक्ष को बराबरी का भागीदार मानने को तैयार नहीं, विशेषकर विदेश नीति जैसे प्रमुख मुद्दों पर।

2. थरूर को बुलाना कांग्रेस में वैचारिक समूहों या ‘‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’’ लाइन को टटोलने की कोशिश हो सकती है।3. राहुल गांधी को न बुलाना प्रतीकात्मक रूप से ‘‘प्रधान विपक्षी चेहरा’’ को कमतर दिखाने की रणनीति भी बताया जा रहा है।निष्कर्ष: डिनर से निकली राजनीति—राजनयिक से ज्यादा राजनीतिक राष्ट्रपति भवन में पुतिन के सम्मान में दिया गया डिनर हालांकि राजनयिक कार्यक्रम था,लेकिन उसकी गूंज राजनीतिक गलियारों में ज्यादा सुनाई दी।

शशि थरूर ने कार्यक्रम को ‘‘दिलचस्प और आनंददायक’’ बताया,जबकि कांग्रेस के बड़े नेता इसे भाजपा की ‘‘चयनात्मक राजनीतिक कूटनीति’’ के रूप में देख रहे हैं।भारत–रूस रिश्तों की मजबूत धुरी के बीच इस डिनर का मुख्य उद्देश्य पुतिन का स्वागत था,लेकिन घरेलू राजनीति ने इसे एक अलग ही रंग दे दिया—

एक ऐसा रंग जिससे आने वाले दिनों में और बहस और बयानबाजी होने की पूरी संभावना है।

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