अंकित बालियान हत्याकांड में पुलिस का बड़ा एक्शन: दो शूटर एनकाउंटर में ढेर, दो पुलिसकर्मी घायल; ‘आधा न्याय’ पर अटका परिवार का सवाल; गोगी गिरोह के नाम से जिम्मेदारी लेने का दावा भी जांच के घेरे में

बी के झा

NSK news Ind

शामली, 31 अगस्त

हरियाणवी कलाकार और पूर्व कबड्डी खिलाड़ी अंकित बालियान की दिनदहाड़े हुई हत्या के बाद उठे कानून-व्यवस्था के सवालों के बीच शामली पुलिस ने सोमवार तड़के बड़ा ऑपरेशन करते हुए दो कथित शूटरों को मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस के मुताबिक, खेड़ी करमू गांव के पास हुई मुठभेड़ में मारे गए दोनों आरोपियों की पहचान मोहित और सुमित के रूप में हुई है। दोनों पर अंकित बालियान की हत्या में शामिल होने का आरोप था।

मुठभेड़ के दौरान दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने चेकिंग के दौरान पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। घायल आरोपियों को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

अंकित के पिता सतवीर सिंह ने एनकाउंटर के बाद कहा कि दो आरोपियों के मारे जाने से उन्हें ‘आधा न्याय’ मिला है। परिवार की यह प्रतिक्रिया इस पूरे मामले की सबसे बड़ी तस्वीर भी सामने रखती है—

क्योंकि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद हत्या की पूरी साजिश, बाकी आरोपियों की भूमिका और वारदात के पीछे की वास्तविक वजह अभी पूरी तरह सामने आना बाकी है।

चार दिन में बदला जांच का रुख, रेकी से लेकर एनकाउंटर तक पहुंची कहानी

अंकित बालियान की हत्या बुधवार शाम करीब 6:45 बजे शामली कोतवाली क्षेत्र में जिम से निकलते वक्त हुई थी। प्रत्यक्ष रूप से सामने आए वीडियो में चार हमलावर दो मोटरसाइकिलों से आते दिखाई देते हैं।

हमलावरों ने अंकित पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं और फरार हो गए।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार अंकित को पांच गोलियां लगी थीं, जिनमें दो सिर में लगी थीं।

इस निर्मम हत्या के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में जबरदस्त आक्रोश था।जांच में सामने आया कि हत्या अचानक अंजाम दी गई वारदात नहीं थी, बल्कि कथित तौर पर इसकी पहले से तैयारी की गई थी।

पुलिस के अनुसार एनकाउंटर में मारे गए मोहित और सुमित ने 20 अगस्त को शामली के सूर्या होटल में रुककर अंकित की गतिविधियों की रेकी की थी। दोनों ने 20 और 21 अगस्त को अंकित के मूवमेंट पर नजर रखी। होटल के सीसीटीवी में भी दोनों के दिखाई देने की बात सामने आई है।यानी पुलिस जांच जिस दिशा में आगे बढ़ी, उसमें हत्या से पहले की रेकी, हमलावरों की आवाजाही, सीसीटीवी फुटेज और उनके भागने के रास्ते महत्वपूर्ण कड़ियां बन गए।

पुलिस का दावा—नाकाबंदी और वायरलेस अलर्ट ने घेरा कस दिया

शामली के एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक, घटना के बाद SWAT टीम, सर्विलांस यूनिट, सभी SHO, ASP और CO स्तर के अधिकारियों को जांच में लगाया गया था। पुलिस ने आधी रात से सुबह छह बजे तक जिले में नाकाबंदी का प्लान लागू किया था।एसपी के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब चार बजे हिजाना के SHO वीरेंद्र कसाना ने करनाल की तरफ से आती एक मोटरसाइकिल को रोकने की कोशिश की। बाइक सवार बदमाशों ने पुलिस पर गोली चला दी। पुलिसकर्मी बाल-बाल बच गए, लेकिन वाहन में गोली लगी।इसके बाद वायरलेस पर अलर्ट जारी किया गया।

कैराना की तरफ भागे संदिग्धों का सामना मन्ना मद्रा पुल के नीचे पुलिस टीम से हुआ। यहां भी पुलिस के मुताबिक बदमाशों ने फायरिंग की। इसके बाद SWAT टीम, सर्विलांस टीम, SHO, CO सिटी, ASP और CO कैराना समेत कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए।आखिरकार आरोपियों ने अपनी मोटरसाइकिल मोड़कर उस इलाके का रुख किया जहां पुलिस से उनका अंतिम सामना हुआ और मुठभेड़ हुई।

पुलिस का यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि अंकित हत्याकांड की जांच महज सीसीटीवी फुटेज तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुलिस ने जिले की नाकाबंदी और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए संदिग्धों की घेराबंदी की।

सवाल सिर्फ दो शूटरों के मारे जाने का नहीं, पूरी साजिश का है

एनकाउंटर के बाद पुलिस के सामने अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती हत्या की पूरी साजिश को उजागर करना है। पुलिस के अनुसार अंकित की हत्या में चार लोग शामिल थे। इनमें दो करनाल और दो रोहतक के रहने वाले बताए गए हैं।मोहित और सुमित के मारे जाने के बाद अब बाकी दो आरोपियों की गिरफ्तारी महत्वपूर्ण हो गई है।

क्योंकि यह जानना जरूरी है कि—- हत्या की साजिश किसने रची?

– अंकित को निशाना बनाने की वजह क्या थी?-

शूटरों को किसने हथियार और वाहन उपलब्ध कराए?

– हत्या के लिए सुपारी या आर्थिक मदद किसने दी?

– क्या किसी स्थानीय व्यक्ति ने हमलावरों की मदद की?

और क्या इस हत्याकांड के पीछे व्यक्तिगत, आपराधिक या राजनीतिक दुश्मनी का कोई पहलू है?

इन सवालों के जवाब ही इस मामले को केवल एक शूटआउट से आगे ले जाकर वास्तविक आपराधिक साजिश तक पहुंचाएंगे।

गोगी गिरोह के नाम से जिम्मेदारी का दावा, लेकिन पुलिस कर रही सत्यापन

अंकित की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर खुद को गोगी गिरोह का सदस्य बताने वाले एक व्यक्ति ने कथित तौर पर हत्या की जिम्मेदारी ली थी। पुलिस इस दावे की सत्यता की जांच कर रही है।यह पहलू भी जांच में बेहद अहम है। सोशल मीडिया पर किसी गिरोह के नाम से जिम्मेदारी लेना अपने आप में अपराध की पुष्टि नहीं करता।

पुलिस को डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल, लोकेशन, हथियारों, आरोपियों के संपर्क और आर्थिक लेनदेन जैसे ठोस सबूतों के जरिए यह स्थापित करना होगा कि वारदात वास्तव में किस नेटवर्क ने कराई।

यही वह बिंदु है जहां पुलिस की जांच को एनकाउंटर से आगे बढ़कर अदालत में टिकने वाले साक्ष्यों पर केंद्रित होना होगा।

परिवार का आक्रोश था दबाव की वजह, प्रशासन ने दिया था कार्रवाई का भरोसा

हत्या के बाद अंकित का परिवार पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं था। अंकित की पत्नी सीमा ने यहां तक चेतावनी दी थी कि यदि चार दिन के भीतर हत्यारे गिरफ्तार नहीं किए गए तो वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह कर लेंगी।इसके बाद प्रशासनिक दबाव भी बढ़ा।

शामली के डीएम आलोक यादव और एसपी एनपी सिंह ने बंतीखेड़ा गांव पहुंचकर परिवार से मुलाकात की और कठोर कार्रवाई का भरोसा दिया।इसके बाद पुलिस ने जिस तेजी से आरोपियों की पहचान और घेराबंदी की, उससे साफ है कि मामला पुलिस प्रशासन के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुका था।

हालांकि, कानून-व्यवस्था के स्तर पर असली कसौटी अब भी बाकी है। किसी हत्या के बाद आरोपियों का एनकाउंटर पुलिस की तात्कालिक कार्रवाई को दिखा सकता है, लेकिन न्यायिक दृष्टि से अंतिम जवाबदेही अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों से तय होती है।

विपक्ष ने कानून-व्यवस्था पर साधा था निशाना

अंकित हत्याकांड को लेकर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार विपक्ष के निशाने पर रही। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा।सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले की जांच में संभावित राजनीतिक दुश्मनी के पहलू को भी शामिल करने की मांग की थी। सपा सांसद इकरा हसन, विधायक पंकज मलिक, आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री अनिल कुमार समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी परिवार से मुलाकात कर हत्या की निंदा की थी।

भीम आर्मी के संस्थापक और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी दिनदहाड़े हुई हत्या को बेहद दुखद और चिंताजनक बताया था।

विपक्ष के लिए यह मामला केवल एक कलाकार की हत्या नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया। वहीं सरकार और पुलिस के लिए एनकाउंटर अब इस बात का जवाब है कि हत्या को लेकर कार्रवाई में तेजी दिखाई गई।

सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की मांग—सिर्फ शूटर नहीं, मास्टरमाइंड भी पकड़ा जाए

हत्या के बाद शामली में विरोध प्रदर्शन हुए। स्थानीय लोगों और सामाजिक स्तर पर यह मांग उठी कि हत्यारों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और परिवार को न्याय मिले।अब दो आरोपियों के एनकाउंटर के बाद स्वाभाविक रूप से मांग का स्वरूप बदल गया है। सवाल यह नहीं रह गया है कि गोली चलाने वाले कौन थे, बल्कि सवाल यह है कि इनके पीछे कौन था?

यदि चार हमलावर थे, तो बाकी दो कहां हैं?

उन्हें किसने भेजा? रेकी के दौरान किस-किस से संपर्क हुआ?

हथियार कहां से आए?

और क्या हत्या के पीछे कोई संगठित आपराधिक नेटवर्क काम कर रहा था?

इन सवालों का जवाब सामने आना ही अंकित के परिवार और समाज के लिए वास्तविक न्याय की दिशा में अगला कदम होगा।

कानूनविदों की नजर अब एनकाउंटर की जांच और केस की न्यायिक मजबूती पर

कानूनी दृष्टि से पुलिस मुठभेड़ के बाद भी मामला खत्म नहीं होता। मुठभेड़ में हुई मौत की परिस्थितियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच, घटनास्थल से बरामद हथियारों और फोरेंसिक साक्ष्यों की जांच, पुलिसकर्मियों के घायल होने के रिकॉर्ड तथा पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी।

वहीं मूल हत्या के मामले में भी पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि एनकाउंटर में मारे गए दोनों आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य और बाकी आरोपियों के खिलाफ जांच अदालत के सामने ठोस तरीके से रखी जा सके।

क्योंकि पुलिस की गोली से खत्म हुई कहानी और अदालत में साबित हुई कहानी—दो अलग-अलग कानूनी पड़ाव हैं।

कबड्डी के मैदान से गायकी तक पहुंचे थे अंकित

बंतीखेड़ा गांव के रहने वाले अंकित बालियान पहले राज्य स्तर के कबड्डी खिलाड़ी थे। चोट के कारण उनका खेल करियर खत्म हुआ तो उन्होंने संगीत और सोशल मीडिया की दुनिया में कदम रखा।गायक, गीतकार और संगीतकार के तौर पर उन्होंने 50 से अधिक गानों पर काम किया था। उनकी पहचान केवल एक कलाकार के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं के बीच लोकप्रिय चेहरे के तौर पर भी थी।

लेकिन एक जिम के बाहर गोलियों ने उनके जीवन और परिवार की दुनिया दोनों को बदल दिया।

एनकाउंटर से मिली राहत, लेकिन न्याय की मंजिल अभी दूरअंकित के पिता का यह कहना कि ‘दो आरोपियों के एनकाउंटर से आधा न्याय मिला’, इस पूरे घटनाक्रम का सबसे सटीक सार है।पुलिस ने दो कथित शूटरों को मुठभेड़ में मार गिराया है। इससे परिवार को तत्काल राहत जरूर मिली है और पुलिस ने यह संदेश भी दिया है कि हत्याकांड को लेकर कार्रवाई तेज है।

लेकिन न्याय की पूरी तस्वीर तब बनेगी जब हत्या में शामिल सभी आरोपियों की भूमिका सामने आएगी, कथित साजिशकर्ता तक पुलिस पहुंचेगी और हत्या के पीछे की वास्तविक वजह अदालत के सामने साबित होगी।

अंकित बालियान हत्याकांड अब सिर्फ एक कलाकार की हत्या का मामला नहीं रह गया है। यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था, संगठित अपराध, पुलिस की जवाबी कार्रवाई, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और न्यायिक प्रक्रिया—

इन सभी के बीच खड़ा एक ऐसा मामला बन चुका है, जिसकी अगली कहानी एनकाउंटर से नहीं, पूरी साजिश के खुलासे से लिखी जाएगी।

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