बी के झा
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पटना, 1 सितंबर
राजधानी पटना में बारिश के साथ डेंगू का प्रकोप भी तेजी से पैर पसार रहा है। मच्छरों के बढ़ते प्रजनन और जगह-जगह जमा पानी ने शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले 10 दिनों में ही डेंगू के 40 नए मरीज सामने आए हैं, जबकि महज पांच दिनों के भीतर 18 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। 31 अगस्त तक जिले में इस साल डेंगू के कुल 167 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें अकेले अगस्त में 97 मरीज मिले हैं।यह आंकड़ा इसलिए भी चिंता बढ़ाने वाला है क्योंकि जनवरी से जून तक डेंगू के केवल 44 मामले सामने आए थे। जुलाई में 26 मरीज मिले, लेकिन अगस्त आते-आते संक्रमण की रफ्तार अचानक तेज हो गई। यानी मानसून के साथ डेंगू ने राजधानी में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी है।
अगस्त में अचानक क्यों बढ़े मामले?
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो संक्रमण की तस्वीर साफ दिखाई देती है।
जनवरी से जून तक 44 मामले,
जुलाई में 26 और अगस्त में 97 मामले सामने आए।
यानी अगस्त में डेंगू के मामले जुलाई की तुलना में लगभग चार गुना तक पहुंच गए।
सात अगस्त तक ही पटना जिले में कुल संक्रमितों की संख्या 89 पहुंच गई थी।
इसके बाद महज कुछ ही सप्ताह में मरीजों की संख्या बढ़कर 167 हो गई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के बाद तापमान और नमी का वातावरण एडीज मच्छर के प्रजनन के लिए अनुकूल हो जाता है। यही मच्छर डेंगू वायरस के संक्रमण का प्रमुख वाहक है। घरों की छतों, कूलरों, गमलों, पुराने टायरों, निर्माणाधीन भवनों, खाली प्लॉटों और खुले कंटेनरों में जमा साफ या ठहरा हुआ पानी इसके लिए प्रजनन स्थल बन सकता है।
कंकड़बाग से पाटलिपुत्र तक डेंगू का फैलता दायरा
पटना के कई घनी आबादी वाले इलाके इस समय विशेष चिंता के केंद्र में हैं। बांकीपुर और पाटलिपुत्र अंचल में डेंगू के मरीज अधिक पाए गए हैं।इनमें—-
कंकड़बाग-
हनुमान नगर-
पत्रकार नगर-
अशोक नगर-
पाटलिपुत्र-
पोस्टल पार्क-
अजीमाबाद-
योगीपुर-
जक्कनपुर जैसे इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में जलजमाव, नालियों की समस्या, खाली प्लॉटों में जमा पानी और निर्माण स्थलों पर बने छोटे-छोटे जलस्रोत मच्छरों के प्रजनन के लिए मुफीद माहौल तैयार कर रहे हैं।
नगर निगम की फॉगिंग कितनी कारगर?
पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल के मुताबिक इस वर्ष अब तक 167 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। मरीजों की पहचान सरकारी अस्पतालों और प्रयोगशालाओं के साथ निजी अस्पतालों एवं पैथोलॉजी लैब में जांच के दौरान भी हुई है।स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नगर निगम के सहयोग से प्रभावित इलाकों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा अभियान चलाया जा रहा है। डेंगू मरीज मिलने के बाद उसके आसपास मच्छरों के प्रजनन स्रोतों की जांच और लार्वीसाइडल छिड़काव की कार्रवाई भी की जानी है।लेकिन राजधानी के सामने असली सवाल केवल फॉगिंग का नहीं, बल्कि मच्छर पैदा होने से पहले उसके स्रोत खत्म करने का है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि केवल धुआं छोड़कर मच्छरों की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। यदि नालियों, खाली प्लॉटों, निर्माण स्थलों और घरों के आसपास जमा पानी को समय रहते हटाया नहीं गया तो फॉगिंग के बाद भी संक्रमण का खतरा बना रहेगा।
राजनीतिक विश्लेषक: बीमारी बढ़ना सिर्फ स्वास्थ्य विभाग का मुद्दा नहीं
राजनीतिक विश्लेषकों के नजरिए से देखें तो डेंगू का बढ़ता संक्रमण अब केवल स्वास्थ्य विभाग की चुनौती नहीं है। यह शहरी प्रशासन, नगर निगम की कार्यप्रणाली और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से भी जुड़ा मुद्दा बन चुका है।राजधानी में जब किसी इलाके में बार-बार जलजमाव होता है और उसके बाद उसी क्षेत्र से डेंगू के मरीज बढ़ने लगते हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि जलनिकासी और मच्छर नियंत्रण की तैयारी मानसून से पहले कितनी प्रभावी थी।राजनीतिक बहस का केंद्र यही होना चाहिए कि प्रशासन बीमारी फैलने के बाद अभियान क्यों तेज करता है, उससे पहले संभावित हॉटस्पॉट की पहचान और रोकथाम क्यों नहीं की जाती?
शिक्षाविदों की चिंता: बच्चों और युवाओं पर विशेष ध्यान जरूरी
शिक्षाविदों का मानना है कि स्कूल-कॉलेजों के आसपास स्वच्छता और जलजमाव की नियमित निगरानी जरूरी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रतिदिन घर से स्कूल और कोचिंग संस्थानों तक आते-जाते हैं। ऐसे में केवल घरों को साफ रखना पर्याप्त नहीं होगा।स्कूलों में विद्यार्थियों को यह जानकारी देना भी जरूरी है कि डेंगू मच्छर कहां पनपता है और घर के आसपास किन छोटी-छोटी जगहों पर पानी जमा नहीं होने देना चाहिए।शिक्षा संस्थानों को भी सप्ताह में कम से कम एक बार परिसर और आसपास के संभावित मच्छर प्रजनन स्थलों की जांच करनी चाहिए।
कानूनविदों का सवाल: प्रशासनिक लापरवाही पर जवाबदेही तय हो
कानूनविदों के अनुसार सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण उपलब्ध कराना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारियों से जुड़ा विषय है। यदि किसी क्षेत्र में लगातार जलजमाव, कचरा या नालियों की समस्या बनी रहती है और शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तो प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न उठना स्वाभाविक है।हालांकि हर डेंगू मामले के लिए प्रशासन को सीधे जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन ज्ञात हॉटस्पॉट में लगातार बनी रहने वाली बुनियादी स्वच्छता संबंधी समस्याओं पर कार्रवाई नहीं होना निश्चित रूप से समीक्षा का विषय है।
सामाजिक संस्थाओं की भूमिका भी अहम
समाजसेवी संस्थाओं और स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों के लिए भी यह समय केवल जागरूकता अभियान चलाने का नहीं, बल्कि मोहल्ला स्तर पर निगरानी बढ़ाने का है।आरडब्ल्यूए, मोहल्ला समितियां और सामाजिक संगठन अपने क्षेत्रों में ऐसे स्थानों की सूची बना सकते हैं जहां बारिश के बाद पानी जमा रहता है। इसकी सूचना नगर निगम और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जा सकती है।डेंगू के खिलाफ लड़ाई तभी प्रभावी होगी जब सरकार, प्रशासन और समाज तीनों एक साथ मैदान में उतरेंगे।
विपक्ष के लिए भी बड़ा मुद्दा, लेकिन राजनीति से ज्यादा जरूरी समाधान
डेंगू के बढ़ते मामलों के बीच विपक्षी दलों के लिए नगर निगम और राज्य सरकार से सवाल पूछने का अवसर है। विपक्ष को प्रशासन से यह पूछना चाहिए कि—मानसून से पहले नालों की सफाई कितनी हुई?
हॉटस्पॉट इलाकों में नियमित एंटी-लार्वा अभियान क्यों नहीं चलाया गया?
फॉगिंग की निगरानी और प्रभाव का आकलन किस स्तर पर हो रहा है?
खाली प्लॉट और निर्माण स्थलों पर जमा पानी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?
लेकिन इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के बजाय विपक्षी दलों को भी स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर समाधान की निगरानी में भूमिका निभानी चाहिए। बीमारी किसी राजनीतिक दल की सीमा देखकर नहीं फैलती।
आम जनता भी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती
प्रशासन पर सवाल जरूरी हैं, लेकिन डेंगू के खिलाफ लड़ाई में आम जनता की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।घर के अंदर और आसपास—कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें।
गमलों, पुराने टायरों और कबाड़ में पानी जमा न होने दें।
पानी की टंकियों को ढककर रखें।
बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द या अन्य लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाइयों का सेवन न करें।
डेंगू के मच्छर का प्रजनन कई बार एक छोटी सी पानी की मात्रा में भी हो सकता है। इसलिए रोकथाम की शुरुआत घर से ही करनी होगी।
बिजली कटौती भी आज परेशानी बढ़ाएगी
इधर, पटना के रुकनपुरा समेत कई इलाकों में मंगलवार को अलग-अलग समय पर बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी। रुकनपुरा क्षेत्र में सड़क किनारे दो बड़े पेड़ों की कटाई के कारण रात 11 बजे से 1 बजे तक रुकनपुरा, बीकानेर स्वीट्स और मुशहरी के आसपास बिजली आपूर्ति बंद रहेगी।इसके अलावा सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक लोटस अपार्टमेंट, पाटलिपुत्र, इमारत अपार्टमेंट और विकास विहार में आपूर्ति बाधित रहने की सूचना है।
सुबह 7 से 9 बजे तक ईस्ट बोरिंग कैनाल रोड, सुर सुधा लेन और रामसूचित मिश्रा पथ प्रभावित रहेंगे।वहीं सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक आईओबी नगर, सर्वोयोनि सिटी, सरारी, शिवाला और भगवतीपुर में बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।
असली चुनौती अब नियंत्रण की है
पटना में डेंगू के 167 मामले सामने आ चुके हैं और इनमें 97 मामले अकेले अगस्त के हैं।
आंकड़ों की तेजी यह संकेत दे रही है कि सितंबर में भी चुनौती कम नहीं होने वाली।
अब प्रशासन के सामने सिर्फ फॉगिंग कराने का लक्ष्य नहीं होना चाहिए।
उसे हॉटस्पॉट की माइक्रो-मैपिंग, जलजमाव की तत्काल निकासी, लार्वा स्रोतों की पहचान, निर्माण स्थलों की निगरानी और नियमित एंटी-लार्वा अभियान को प्राथमिकता देनी होगी।
क्योंकि डेंगू का इलाज अस्पताल में शुरू होता है, लेकिन उसकी असली लड़ाई नाली, गड्ढे, कूलर, गमले और जमा पानी के खिलाफ मोहल्ले में लड़ी जाती है।
पटना के लिए यह सिर्फ बीमारी का आंकड़ा नहीं, बल्कि शहरी व्यवस्था की परीक्षा है।
