राजस्थान निकाय चुनाव में BJP की बड़ी बढ़त, गहलोत के गढ़ में भी सेंध; कांग्रेस के सामने 2028 से पहले बड़ा सवाल बीकानेर में कांग्रेस का दबदबा, कई शहरों में निर्दलीय बने ‘किंगमेकर’

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली/जयपुर, 15 सितंबर

राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बीजेपी के पक्ष में माहौल बनने के संकेत दिए हैं।

नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर स्पष्ट बढ़त बनाई है। सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत के प्रभाव वाले जोधपुर में भी बीजेपी ने कांग्रेस को कड़ी चुनौती दी है। यही नहीं, गहलोत के अपने वार्ड में भी बीजेपी उम्मीदवार की जीत ने इस मुकाबले को और ज्यादा प्रतीकात्मक बना दिया है।

दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के वार्ड में कांग्रेस की जीत ने यह भी साफ कर दिया कि चुनाव पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा। स्थानीय निकायों के इस चुनाव में कई जगह मतदाताओं ने बड़े नेताओं के प्रभाव से अलग स्थानीय समीकरणों और उम्मीदवारों को भी तवज्जो दी है।

4,179 वार्ड में बीजेपी, 3,613 पर कांग्रेस

राज्यभर के निकाय चुनाव परिणामों में बीजेपी ने 4,179 वार्ड जीतकर कांग्रेस पर बढ़त बनाई, जबकि कांग्रेस के खाते में 3,613 वार्ड आए। राज्य के 10 नगर निगमों में बीजेपी ने चार में स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया।हालांकि तस्वीर पूरी तरह बीजेपी के पक्ष में नहीं है। अजमेर और पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला।

ऐसे में यहां निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो गई है। यानी जहां जनता ने किसी दल को पूर्ण जनादेश नहीं दिया, वहां अब सत्ता की चाबी निर्दलीयों के हाथ में पहुंच गई है।

गहलोत के गढ़ जोधपुर में मुकाबला बराबरी का

जोधपुर का परिणाम इस चुनाव की सबसे चर्चित तस्वीरों में से एक है। 100 सदस्यीय नगर निगम में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने 44-44 वार्ड जीते। 10 वार्ड निर्दलीयों के खाते में गए, जबकि एक वार्ड आरएलपी ने जीता और एक वार्ड का परिणाम शेष था।यानी गहलोत के राजनीतिक प्रभाव वाले शहर में बीजेपी ने कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने की स्थिति पैदा कर दी है। ऐसे में मेयर पद का फैसला केवल पार्टी की ताकत से नहीं, बल्कि पार्षदों के बीच बनने वाले समीकरणों से भी तय हो सकता है।

जयपुर में बीजेपी की मजबूत पकड़

राजधानी जयपुर में भी बीजेपी ने अपनी ताकत दिखाई। 150 वार्डों में से 146 के परिणाम घोषित किए गए, जिनमें बीजेपी ने 78 और कांग्रेस ने 53 वार्ड जीते। बाकी परिणामों और पुनर्मतदान के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।जयपुर जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नगर निगम में बीजेपी की यह बढ़त कांग्रेस के लिए महज स्थानीय चुनाव का परिणाम नहीं, बल्कि राजधानी में संगठनात्मक पकड़ को लेकर भी सवाल खड़े करती है।

उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा में बीजेपी का दबदबा

उदयपुर के 80 वार्डों में बीजेपी ने 53 सीटें जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस 23 वार्डों तक सीमित रही, जबकि तीन वार्ड निर्दलीयों और एक वार्ड माकपा के खाते में गया।कोटा के 100 वार्डों में बीजेपी ने 55 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। भीलवाड़ा में भी बीजेपी ने 70 में से 45 वार्ड जीते। कांग्रेस को महज 10 वार्ड मिले, जबकि निर्दलीयों ने 15 वार्डों में जीत दर्ज की।इन नतीजों से एक बात साफ दिखती है—शहरी राजस्थान के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में बीजेपी का संगठन और चुनावी नेटवर्क कांग्रेस पर भारी पड़ा है।

बीकानेर में कांग्रेस का पलटवार

जहां बीजेपी ने कई नगर निगमों में बढ़त बनाई, वहीं बीकानेर कांग्रेस के लिए बड़ी राहत लेकर आया। 80 सदस्यीय नगर निगम में कांग्रेस ने 42 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। बीजेपी को 27, निर्दलीयों को 10 और आरएलपी को एक वार्ड मिला।इस परिणाम ने कांग्रेस को यह संदेश दिया है कि बीजेपी को चुनौती देने की उसकी क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

सवाल अब यह है कि बीकानेर जैसे प्रदर्शन को कांग्रेस दूसरे शहरी क्षेत्रों में क्यों नहीं दोहरा सकी।

अजमेर और पाली में ‘किंगमेकर’ निर्दलीय

अजमेर में कांग्रेस 37 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। बीजेपी को 32 और निर्दलीयों को 11 वार्ड मिले। बहुमत किसी के पास नहीं है। ऐसे में निर्दलीय पार्षद मेयर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।पाली में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह शहर में कांग्रेस ने 29 वार्ड जीते, बीजेपी 21 और निर्दलीय 15 वार्डों में विजयी रहे।

यानी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के गृह क्षेत्र में कांग्रेस का सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरना बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से नजरअंदाज करने वाला परिणाम नहीं है।

वसुंधरा के गढ़ झालावाड़ में कांग्रेस की बड़ी जीत

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक प्रभाव वाले झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने अप्रत्याशित रूप से मजबूत प्रदर्शन किया। 45 वार्डों में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी 13 वार्डों पर सिमट गई। दो वार्ड निर्दलीयों और एक आम आदमी पार्टी के खाते में गया।

हालांकि पास के झालरापाटन में बीजेपी ने अपना दबदबा कायम रखा। यहां बीजेपी ने 35 में से 22 वार्ड जीते, कांग्रेस को आठ और आम आदमी पार्टी को पांच वार्ड मिले।.यह विरोधाभास बताता है कि राजस्थान की स्थानीय राजनीति में बड़े नेताओं के प्रभाव के बावजूद हर शहर और हर वार्ड का अपना अलग चुनावी गणित है।

भरतपुर में दलों से आगे निकले निर्दलीय

भरतपुर का परिणाम भी दिलचस्प रहा। 65 वार्डों में से 38 पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। बीजेपी को 20 और कांग्रेस को केवल सात वार्ड मिले।यह परिणाम राजनीतिक दलों के लिए चेतावनी की तरह है। जब मतदाता पार्टी के बजाय स्थानीय चेहरे और स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता देता है, तो मजबूत संगठन भी कई बार अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाता।

बीजेपी ने बताया ‘ऐतिहासिक जनादेश’, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बीजेपी की जीत को ऐतिहासिक बताते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और राज्य सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर बताया। उन्होंने कहा कि राजस्थान के युवाओं का भरोसा प्रधानमंत्री मोदी के साथ है।बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी मतदाताओं और कार्यकर्ताओं का आभार जताते हुए परिणामों को पार्टी की ऐतिहासिक जीत बताया।

वहीं राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इन नतीजों को बीजेपी सरकार के खराब प्रदर्शन का संकेत बताया। कांग्रेस का तर्क है कि कई जगह स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों के कारण चुनावी परिणाम प्रभावित हुए हैं।

EVM खराबी ने रोकी मेयर चुनाव की तस्वीर

जयपुर, जोधपुर और कोटा समेत कुछ निकायों में ईवीएम की तकनीकी खराबी के कारण मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव फिलहाल टल गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने जयपुर, जोधपुर, कोटा और सुकेत के कुछ मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया है।इन केंद्रों पर 16 सितंबर को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक पुनर्मतदान होगा और 17 सितंबर को सुबह 8 बजे से मतगणना कराई जाएगी।आयोग के मुताबिक संबंधित बूथों पर ईवीएम की तकनीकी खराबी से प्रभावित वोटों की संख्या कई जगह जीतने वाले और दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार के बीच मतों के अंतर से अधिक थी। इसलिए निष्पक्ष परिणाम सुनिश्चित करने के लिए पुनर्मतदान का फैसला लिया गया।

नतीजों का बड़ा राजनीतिक संदेश क्या है?

राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों को केवल पार्षद और मेयर की लड़ाई मानना शायद जल्दबाजी होगी। इन परिणामों ने प्रदेश की राजनीति में तीन महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं।

पहला, शहरी क्षेत्रों में बीजेपी की संगठनात्मक पकड़ मजबूत दिखाई दे रही है।

दूसरा, कांग्रेस पूरी तरह मुकाबले से बाहर नहीं हुई है। बीकानेर, अजमेर, पाली और झालावाड़ जैसे परिणाम बताते हैं कि पार्टी के पास कई क्षेत्रों में अपना आधार मौजूद है।

तीसरा, निर्दलीयों की बड़ी जीत ने यह संकेत दिया है कि स्थानीय राजनीति में मतदाता बड़े राजनीतिक नैरेटिव से अलग होकर स्थानीय उम्मीदवारों को भी निर्णायक महत्व दे रहा है।

एनएसके विश्लेषण

राजस्थान की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय निकायों के ये परिणाम दोनों प्रमुख दलों के लिए सियासी आईना हैं।

बीजेपी के लिए यह परिणाम उत्साह बढ़ाने वाला है, लेकिन अजमेर, पाली, बीकानेर और झालावाड़ जैसे परिणाम यह चेतावनी भी देते हैं कि हर मोर्चे पर जीत की कहानी अभी पूरी नहीं हुई है।

कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह बीजेपी के बढ़ते शहरी प्रभाव को कैसे रोके। बीकानेर की जीत उम्मीद देती है, लेकिन जोधपुर में बराबरी और जयपुर समेत कई बड़े शहरों में पिछड़ना संगठन की कमजोरियों को भी उजागर करता है।

फिलहाल राजस्थान के नगर निकाय चुनावों ने इतना तो साफ कर दिया है कि राज्य की शहरी सियासत में बीजेपी ने बढ़त का झंडा गाड़ दिया है, लेकिन कांग्रेस की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई।

आने वाले मेयर चुनाव और पुनर्मतदान के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी कि स्थानीय सत्ता की चाबी आखिर किसके हाथ जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *