TMC के भीतर फिर घमासान! 10 बागी विधायकों को विधानसभा सचिवालय का नोटिस, एक हफ्ते में जवाब तलब; बागी खेमे ने कहा- वक्त आने पर देंगे उचित जवाब

बी के झा

कोलकाता, 16 सितंबर

पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही खींचतान अब विधानसभा की औपचारिक कार्रवाई तक पहुंच गई है। पार्टी पर नियंत्रण और विधानसभा में नेतृत्व को लेकर आमने-सामने खड़े दोनों गुटों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने बागी खेमे से जुड़े 10 विधायकों को नोटिस जारी कर ममता बनर्जी गुट की ओर से दाखिल अयोग्यता याचिका पर जवाब मांगा है। विधायकों को अपना जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया गया है।विधानसभा सचिवालय का यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मामला अब केवल पार्टी के भीतर की राजनीतिक रस्साकशी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विधायकों की सदस्यता से जुड़े संवैधानिक और विधायी सवाल तक पहुंच गया है।

किन 10 विधायकों को मिला नोटिस?

विधानसभा सूत्रों के मुताबिक नोटिस पाने वाले विधायकों में विधानसभा में विपक्ष के नेता

ऋतब्रत बनर्जी के अलावा फिरहाद हकीम, अरूप रॉय, संदीपन साहा,

शिउली साहा,

अखरुजमान अंसारी,

बिप्लब मित्रा,

सबीना यास्मीन,

जावेद खान और रथिन घोष शामिल हैं। इन विधायकों से ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से दायर उस याचिका पर जवाब मांगा गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि इन विधायकों ने पार्टी के हितों के विरुद्ध काम किया है और उन्हें विधायक के पद से अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।

बागी खेमे का जवाब- ‘समय आने पर उचित जवाब देंगे’

नोटिस की पुष्टि करते हुए अखरुजमान अंसारी ने मंगलवार रात कहा कि इस पूरे मामले पर पार्टी के भीतर चर्चा की जाएगी और उचित समय पर उचित जवाब दिया जाएगा।उनके बयान से साफ है कि बागी खेमे ने फिलहाल सीधे टकराव से बचते हुए कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर अपनी स्थिति तैयार करने का संकेत दिया है। अब नजर इस बात पर है कि सात दिन की समयसीमा में इन विधायकों की ओर से क्या जवाब दाखिल किया जाता है।

ममता गुट ने सुप्रीम कोर्ट का भी खटखटाया दरवाजा

इस पूरे घटनाक्रम की टाइमिंग भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। विधानसभा सचिवालय का नोटिस ऐसे समय आया है जब ममता बनर्जी गुट के उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने विपक्ष के नेता पद को लेकर ऋतब्रत बनर्जी और उनके साथ खड़े नौ अन्य नेताओं की सदस्यता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

ममता गुट की ओर से 7 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष रथिन बोस को पत्र लिखकर इन 10 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। आरोप लगाया गया कि संबंधित विधायकों ने पार्टी के हितों के खिलाफ जाकर काम किया।

विपक्ष के नेता की कुर्सी बनी टकराव का केंद्र

TMC के भीतर चल रही इस लड़ाई के केंद्र में विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद भी है। ऋतब्रत बनर्जी को इस पद के लिए मान्यता दिए जाने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है।यानी एक तरफ हाईकोर्ट में विपक्ष के नेता की नियुक्ति को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है, दूसरी तरफ बागी विधायकों की सदस्यता को लेकर विधानसभा सचिवालय की प्रक्रिया शुरू हो गई है और इसी बीच सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया गया है।

मदन मित्रा के बाद बढ़ी अंदरूनी खाई

TMC के भीतर गुटबाजी को उस समय और हवा मिली जब ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले नेता मदन मित्रा ने भी उनका साथ छोड़कर ऋतब्रत बनर्जी के खेमे का रुख कर लिया था। इसके बाद पार्टी के भीतर शक्ति-संतुलन और नेतृत्व को लेकर विवाद और ज्यादा खुलकर सामने आने लगा।अब 10 विधायकों को नोटिस मिलने के बाद यह लड़ाई एक नए चरण में प्रवेश करती दिख रही है।

आने वाले दिनों में इन विधायकों के जवाब, विधानसभा सचिवालय की अगली कार्रवाई और अदालतों में चल रही सुनवाई यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी कि TMC के भीतर चल रहा यह सत्ता-संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।

एन एस के, विशेष रिपोर्ट

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