बी के झा
NSK news Ind

नई दिल्ली, 21 सितंबर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI जिस रफ्तार से दुनिया की अर्थव्यवस्था, उद्योग और रोजमर्रा की जिंदगी को बदल रहा है, उसी रफ्तार से उससे जुड़े जोखिम भी सामने आ रहे हैं। ऐसे समय में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने AI को लेकर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि तकनीक का अंतिम उद्देश्य मानवता के लिए लाभ पैदा करना होना चाहिए, न कि दुनिया के लिए नया खतरा खड़ा करना।ईटी के साथ एक विस्तृत बातचीत में वैष्णव ने AI रेगुलेशन, टेक्नोलॉजी कंपनियों की जवाबदेही, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और भारत के सेमीकंडक्टर मिशन समेत कई अहम मुद्दों पर बात की। उनके मुताबिक AI के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए टेक्नोलॉजी और कानून—दोनों को साथ लेकर चलने वाला ‘टेक्नो-लीगल’ फ्रेमवर्क जरूरी है।
AI में रफ्तार जितनी तेज, जिम्मेदारी भी उतनी बड़ी
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि AI के विकास की गति अभूतपूर्व है। कुछ समय पहले जिन क्षमताओं की कल्पना भी मुश्किल लगती थी, वे आज वास्तविकता बन चुकी हैं। लेकिन इस तेज विकास के साथ नए जोखिम भी पैदा हो रहे हैं।उनका कहना है कि AI मॉडल बनाने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी बहुत बड़ी है। यदि कोई कंपनी कोई तकनीक या मॉडल तैयार करती है तो उसे यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उसका इस्तेमाल सुरक्षित तरीके से हो।मंत्री ने AI एजेंट्स से जुड़े कुछ गंभीर सवाल भी उठाए। मसलन, अगर कोई AI एजेंट बिजली के ग्रिड को बाधित कर दे, किसी छात्र को आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी स्थिति पैदा कर दे या स्वचालित वाहन को गलत समय पर ब्रेक लगाने के लिए मजबूर कर दे, तो ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी?
यही वह सवाल है जहां AI का तकनीकी विकास सीधे कानून और मानव सुरक्षा से जुड़ जाता है।’केवल कानून बना देने से समस्या हल नहीं होगी’वैष्णव के मुताबिक AI को लेकर दुनिया को एक ऐसे ढांचे की जरूरत है जिसमें कानून के साथ तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था भी शामिल हो। उन्होंने कहा कि मॉडल विकसित करने वाली कंपनियों को खुद अपने सिस्टम में सुरक्षा उपाय और गार्डरेल्स बनाने होंगे।उनका तर्क है कि पारंपरिक तकनीकों में यह तय करना अपेक्षाकृत आसान होता है कि किन चीजों की जांच और निगरानी की जानी चाहिए। लेकिन AI मॉडल लगातार बदलते और सीखते हैं, इसलिए उनके जोखिमों को मापना कहीं अधिक जटिल है।
यही कारण है कि सरकार और नियामकों को AI विकसित करने वाली कंपनियों, डेवलपर्स और तकनीकी विशेषज्ञों को नियामक प्रक्रिया में साथ लेकर चलना होगा।
भारत का AI संदेश: ‘इंसानियत सबसे पहले’
AI के वैश्विक रेगुलेशन पर भारत की भूमिका को लेकर भी वैष्णव ने बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि AI को लेकर अलग-अलग देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।उन्होंने परमाणु तकनीक के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण देते हुए कहा कि AI के मामले में भी दुनिया को इस बात पर सहमत होना चाहिए कि इंसानियत सबसे पहले है और AI को दुनिया के लिए खतरा बनने के बजाय फायदा पहुंचाना चाहिए।भारत AI के वैश्विक विमर्श में इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है।सेमीकंडक्टर मिशन में 23.5 अरब डॉलर के निवेश का वादाAI के साथ-साथ भारत सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी तकनीकी क्षमता मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।सरकार के मुताबिक इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के दो चरणों के तहत अब तक करीब 23.5 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया गया है। इसमें 12 स्वीकृत परियोजनाएं शामिल हैं। टाटा समूह की चिप फैब और पांच चिप असेंबली इकाइयों समेत कई परियोजनाओं में उत्पादन गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं।वैष्णव ने कहा कि ISM 2.0 के तहत करीब 11-12 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश में रुचि दिखाई गई है और कई कंपनियां अगले छह महीनों में निवेश शुरू करने की योजना बना रही हैं।ISM 2.0 को छह प्रमुख स्तंभों पर तैयार किया गया है—चिप डिजाइन, सामग्री एवं मशीनरी, फैब, ATMP/OSAT यूनिट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट तथा प्रतिभा और कौशल विकास।
अमेरिका से अलग भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति
दुनिया के कई देश सेमीकंडक्टर उद्योग में भारी सरकारी निवेश कर रहे हैं। ऐसे में भारत की रणनीति क्या है?
वैष्णव के मुताबिक भारत के पास संसाधन सीमित नहीं हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल कई क्षेत्रों में करना होता है। खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी प्राथमिकताओं के साथ सेमीकंडक्टर क्षेत्र में संतुलन बनाना जरूरी है।भारत की सबसे बड़ी ताकत उन्होंने सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमता को बताया।इसी क्षमता को मजबूत करने के लिए सरकार ने संस्थानों और विश्वविद्यालयों को आधुनिक सेमीकंडक्टर डिजाइन तथा EDA यानी इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।यानी भारत की रणनीति सिर्फ चिप बनाने तक सीमित नहीं है। लक्ष्य चिप की डिजाइनिंग से लेकर निर्माण, पैकेजिंग, रिसर्च और प्रतिभा निर्माण तक पूरी वैल्यू चेन खड़ी करना है।
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी सरकार का फोकस
AI के बाद वैष्णव ने सोशल मीडिया और बच्चों की सुरक्षा को भी गंभीर चुनौती बताया।उनके मुताबिक अगली पीढ़ी को तकनीक से मिलने वाले फायदे जरूर मिलने चाहिए, लेकिन उन्हें सोशल मीडिया की लत, एल्गोरिदम के जरिए युवाओं को लगातार टारगेट किए जाने और नुकसानदेह कंटेंट के प्रभाव से बचाना भी जरूरी है।मंत्री ने संकेत दिया कि भारत में अब ऐसा फ्रेमवर्क बनाने का समय आ गया है जिसमें बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के साथ-साथ सभी नागरिकों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
टेक्नोलॉजी की अगली लड़ाई सिर्फ इनोवेशन की नहीं, भरोसे की भी
अश्विनी वैष्णव के इंटरव्यू का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भारत AI और सेमीकंडक्टर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को केवल आर्थिक विकास के औजार के तौर पर नहीं देख रहा। सवाल अब इससे आगे बढ़ चुका है।
AI कितना शक्तिशाली होगा, यह महत्वपूर्ण है। लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि उस शक्ति की जिम्मेदारी किसकी होगी?
आने वाले समय में दुनिया के सामने यही चुनौती होगी—क्या तकनीक इंसान के नियंत्रण और हित में विकसित होगी, या उसकी रफ्तार मानव सुरक्षा के नियमों से आगे निकल जाएगी?
भारत जिस ‘टेक्नो-लीगल’ मॉडल की बात कर रहा है, उसकी असली परीक्षा इसी सवाल पर होगी कि इनोवेशन की गति और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए।
