बी के झा
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मुंबई/नई दिल्ली, 28 सितंबर
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान कर चुकी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को मुंबई पुलिस से बड़ा झटका लगा है।
2 अक्टूबर, गांधी जयंती के दिन मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इसके बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने नया ऐलान करते हुए कहा है कि यदि प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई तो संगठन ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करेगा।
मामला अब केवल एक प्रदर्शन की अनुमति तक सीमित नहीं दिख रहा। एक तरफ CJP इसे नागरिकों के विरोध के अधिकार से जोड़ रही है, तो दूसरी तरफ मुंबई पुलिस अपने फैसले के लिए अदालत के आदेश और प्रशासनिक नियमों का हवाला दे रही है। ऐसे में गांधी जयंती के दिन मुंबई में प्रस्तावित आंदोलन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है।
CJP का दावा—‘आवाज दबाने की कोशिश’
CJP की ओर से सोशल मीडिया पर कहा गया कि पहले “वोट देने के अधिकार” और अब “प्रदर्शन करने के अधिकार” को छीना जा रहा है।अभिजीत दिपके ने पुलिस के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोगों को अपनी बात रखने से रोकने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली तो 2 अक्टूबर को मुंबई में जेल भरो आंदोलन किया जाएगा।
यानी CJP अब अपने आंदोलन को एक कदम आगे ले जाने की तैयारी में है। हालांकि, जेल भरो आंदोलन की घोषणा संगठन की ओर से की गई है; इसका वास्तविक स्वरूप और उसमें कितने लोग शामिल होंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
आखिर पुलिस ने अनुमति क्यों रोकी?
मुंबई पुलिस ने अपने फैसले के पीछे बॉम्बे हाई कोर्ट के 4 जनवरी 2013 के PIL 116/2009 के फैसले और महाराष्ट्र सरकार के 20 जनवरी 2016 के आदेश का हवाला दिया है।पुलिस के अनुसार, शिवाजी पार्क में सभा आयोजित करने की अनुमति देने का अधिकार उसके पास नहीं है। आवेदक को मुंबई में किसी दूसरे स्थान की तलाश करने और वहां प्रदर्शन के लिए अनुमति लेने की सलाह दी गई है। पुलिस ने कहा है कि वैकल्पिक स्थान के लिए मिले आवेदन पर नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा।
पुलिस ने शिवाजी पार्क को साइलेंस जोन और रिहायशी क्षेत्र बताते हुए वहां प्रदर्शन से शोर की समस्या पैदा होने की आशंका भी जताई है।यानी पुलिस का रुख यह है कि प्रदर्शन पर पूर्ण रोक नहीं लगाई गई है, बल्कि प्रस्तावित स्थल पर अनुमति नहीं दी गई है और वैकल्पिक स्थान पर अनुमति लेने का रास्ता खुला है।
पहले दिया था CEC को अल्टीमेटम
CJP ने इससे पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए अल्टीमेटम दिया था। संगठन ने कहा था कि यदि ज्ञानेश कुमार 26 सितंबर तक इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से मुंबई में आंदोलन शुरू किया जाएगा और इसे देश के दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा।CJP का यह आंदोलन निर्वाचन आयोग के कामकाज और SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों की पृष्ठभूमि में है।
हालांकि निर्वाचन आयोग ने अपने स्तर पर आंतरिक मतभेद के दावों को खारिज किया है और SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही है।
अब सवाल—कहां होगा प्रदर्शन?
मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में अनुमति देने से इनकार करते हुए CJP को वैकल्पिक स्थान तलाशने की सलाह दी है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि CJP 2 अक्टूबर को किस स्थान पर प्रदर्शन करेगी और क्या वह प्रशासन से वैकल्पिक स्थल की अनुमति लेगी या सीधे जेल भरो आंदोलन का रास्ता अपनाएगी?
CJP की घोषणा के बाद 2 अक्टूबर का दिन मुंबई के लिए राजनीतिक रूप से खासा महत्वपूर्ण हो सकता है। एक तरफ गांधी जयंती पर सत्याग्रह और अहिंसक आंदोलन की परंपरा की याद होगी, दूसरी तरफ CJP ने अपने अगले कदम के तौर पर ‘जेल भरो’ का ऐलान कर दिया है।
आंदोलन की असली परीक्षा अब
CJP के सामने अब दो रास्ते दिखाई दे रहे हैं—वैकल्पिक स्थान पर अनुमति लेकर प्रदर्शन करना या अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में अपने घोषित जेल भरो आंदोलन को आगे बढ़ाना।
फिलहाल मुंबई पुलिस का कहना है कि वैकल्पिक स्थल पर अनुमति के लिए आवेदन किया जा सकता है और उस पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।
दूसरी ओर CJP ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने आंदोलन से पीछे हटने के मूड में नहीं है।
अब निगाह 2 अक्टूबर पर है—क्या मुंबई में प्रदर्शन होगा, जगह बदलेगी या गांधी जयंती पर CJP का ‘जेल भरो आंदोलन’ सड़कों पर दिखाई देगा?
