बी के झा
NSK news Ind

देवबंद/सहारनपुर, 28 सितंबर
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बयानबाजी का एक नया अध्याय खुलता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान की ओर से इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टिप्पणी किए जाने के बाद मस्जिद प्रकरण के मुख्य शिकायतकर्ता और बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने कड़ा पलटवार किया है।
विकास त्यागी ने कहा कि सहारनपुर का यह मामला भारत की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा आंतरिक विषय है। उनके मुताबिक, इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाना भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की कोशिश है।
‘कानूनी प्रक्रिया के बाद हुई कार्रवाई’
विकास त्यागी ने अपने बयान में दावा किया कि कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद मस्जिद का निर्माण सरकारी जमीन पर बिना वैध अनुमति के किया गया था और उसके खिलाफ शिकायत के बाद कानूनी प्रक्रिया चली।उपलब्ध अदालती रिपोर्टों के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई 2026 में ढांचे को अनधिकृत मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ मस्जिद प्रबंधन ने जिला अदालत में अपील की, जिसे सितंबर में खारिज कर दिया गया। इसके बाद प्रशासन ने ढांचे को हटा दिया।
हालांकि, पूरे मामले में एक कानूनी बिंदु को लेकर विवाद भी सामने आया। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार जिला अदालत ने अपील खारिज करते हुए बेदखली के आदेश को बरकरार रखा था, लेकिन अपने आदेश में अलग से ‘ध्वस्तीकरण’ का आदेश नहीं दिया था। प्रशासन का कहना था कि बेदखली के आदेश के अनुपालन में ढांचे को हटाया गया।
विकास त्यागी का पाकिस्तान पर सीधा निशाना
विकास त्यागी ने पाकिस्तान की ओर से सहारनपुर मामले पर की गई टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत की अदालतों और प्रशासनिक संस्थाओं के फैसलों पर पाकिस्तान को टिप्पणी करने के बजाय अपने देश के अल्पसंख्यकों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान भारत के आंतरिक मामलों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। उनके अनुसार, सहारनपुर की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने का प्रयास भारत की संप्रभु न्यायिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने जैसा है।
हालांकि पाकिस्तान सरकार इस मामले को धार्मिक अधिकारों और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दे के रूप में देख रही है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने 6 सितंबर को सहारनपुर मस्जिद के ध्वस्तीकरण की निंदा की और इसे मुस्लिम धार्मिक स्थल से जुड़ा मामला बताया।
मामला आखिर शुरू कहां से हुआ?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर विवाद 2025 में विकास त्यागी की शिकायत के बाद सामने आया। प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान जमीन के स्वामित्व और ढांचे की वैधता को लेकर सवाल उठाए गए।अदालती कार्यवाही में प्रशासन की ओर से राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए जमीन को सरकारी संपत्ति बताया गया। जुलाई 2026 में सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने ढांचे को अनधिकृत मानते हुए कार्रवाई का आदेश दिया और कथित अनधिकृत कब्जे को लेकर करीब 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया।
मस्जिद प्रबंधन ने इस कार्रवाई को चुनौती दी और दावा किया कि ढांचा पुराना है तथा उसके खिलाफ की गई कार्रवाई में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।यानी विवाद का मूल प्रश्न केवल धार्मिक पहचान का नहीं, बल्कि जमीन के स्वामित्व, निर्माण की वैधता और प्रशासनिक कार्रवाई की कानूनी प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है।
‘भारत अपना फैसला खुद करेगा’
विकास त्यागी का कहना है कि भारत में किसी धार्मिक या अन्य निर्माण की वैधता का फैसला भारत की अदालतों और संबंधित प्रशासनिक संस्थाओं को करना है। किसी दूसरे देश को इस प्रक्रिया में टिप्पणी या हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।उनके बयान का मूल संदेश यही है कि सहारनपुर का विवाद भारत की अदालतों में तय होने वाला मामला है, अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक मंचों पर नहीं।
दूसरी ओर, पाकिस्तान इस कार्रवाई को धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों के संदर्भ में देख रहा है। ऐसे में सहारनपुर का स्थानीय विवाद अब भारत-पाकिस्तान के बीच बयानबाजी का विषय बन गया है।
स्थानीय विवाद से अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी तक
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में शुरू हुआ विवाद अब स्थानीय प्रशासन, अदालत और संबंधित पक्षों की सीमाओं से बाहर निकलकर कूटनीतिक बयानबाजी तक पहुंच गया है।
एक तरफ प्रशासन और शिकायतकर्ता कानूनी प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई को उचित बता रहे हैं, दूसरी तरफ मस्जिद प्रबंधन ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और पाकिस्तान ने इसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दे के रूप में उठाया है।
अब असली सवाल यह है कि क्या सहारनपुर का यह विवाद आगे भी भारत-पाकिस्तान के राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनेगा या इसकी अगली लड़ाई अदालतों में ही तय होगी?
