बी के झा
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पटना / नई दिल्ली, 30 सितंबर
बिहार की राजनीति में पुराने गठबंधनों और बदलते सियासी समीकरणों की कहानी एक बार फिर कांग्रेस और जनता दल (यू) के बीच तीखी बयानबाजी के रूप में सामने आ गई है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में 2024 में नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से बाहर निकलने को लेकर हुई चर्चा के बाद सोनिया गांधी की कथित टिप्पणी ने बिहार में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। इसके जवाब में NDA के नेताओं ने नीतीश कुमार का खुलकर बचाव किया और कांग्रेस पर निशाना साधा।
जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि “इस धरती पर ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है, जो नीतीश कुमार को नियंत्रित कर सके।” उनके मुताबिक नीतीश कुमार ने अपनी राजनीति हमेशा अपने निर्णयों और जनहित के मुद्दों के आधार पर की है। संजय झा ने कांग्रेस पर अपनी राजनीतिक कमियों को छिपाने के लिए निराधार बयान देने का आरोप भी लगाया।
संजय झा का तंज- देर आए, दुरुस्त आए
संजय झा ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि देर आए, दुरुस्त आए। उनके मुताबिक अब कांग्रेस को नीतीश कुमार की राजनीतिक अहमियत समझ में आ गई है, जबकि बिहार और देश की जनता इसे पहले से जानती थी।उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में बैठकर जिन मुद्दों पर चर्चा हो रही है, उनकी राजनीतिक पहल नीतीश कुमार पहले पटना में कर चुके थे।
जेडीयू नेता का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस के भीतर ही 2024 में नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से बाहर निकलने को लेकर अलग-अलग राय सामने आने की खबरें हैं।
CWC में नीतीश पर क्यों छिड़ी बहस?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से बाहर निकलने को लेकर सवाल उठाया। उनका तर्क बताया गया कि विपक्षी गठबंधन को नीतीश कुमार को साथ बनाए रखने के लिए और प्रयास करने चाहिए थे। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, अगर नीतीश गठबंधन में बने रहते तो राजनीतिक परिस्थितियां अलग हो सकती थीं।
रिपोर्टों के अनुसार, इसी चर्चा के दौरान सोनिया गांधी ने अलग राय रखी। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि नीतीश कुमार का गठबंधन से बाहर जाना लगभग तय था और उनके चले जाने से विपक्ष को अंततः नुकसान की बजाय राहत मिली। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मीडिया रिपोर्टों में कांग्रेस सूत्रों के हवाले से सामने आई है।यानी जिस नेता को लेकर कभी विपक्षी एकता की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका की चर्चा हुई, वही नीतीश कुमार अब कांग्रेस की अंदरूनी समीक्षा का विषय बन गए हैं।
गिरिराज सिंह बोले- नीतीश ने कभी किसी को धोखा नहीं दिया
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी नीतीश कुमार के पक्ष में मोर्चा संभालते हुए सोनिया गांधी की कथित टिप्पणी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन में कभी किसी को धोखा नहीं दिया और न ही भ्रष्टाचार या राष्ट्र-विरोधी तत्वों को बढ़ावा दिया। उन्होंने सोनिया गांधी द्वारा नीतीश कुमार की आलोचना किए जाने को लेकर उनके ‘नैतिक अधिकार’ पर भी सवाल उठाया।
गिरिराज सिंह के बयान के बाद यह विवाद केवल नीतीश कुमार बनाम कांग्रेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि NDA बनाम कांग्रेस की व्यापक राजनीतिक बयानबाजी में बदलता दिखाई दे रहा है।
28 जनवरी 2024 को बदला था बिहार का राजनीतिक समीकरण
नीतीश कुमार ने 28 जनवरी 2024 को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर महागठबंधन सरकार से अलग होने का ऐलान किया था। इसके बाद उन्होंने BJP के नेतृत्व वाले NDA के साथ मिलकर सरकार बनाई। यही घटनाक्रम अब 2026 में कांग्रेस की आंतरिक राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना है।नीतीश के इस फैसले को लेकर कांग्रेस के भीतर उस समय भी तीखी राजनीतिक बहस हुई थी और अब CWC की बैठक में सामने आई कथित चर्चा ने उस पुराने घटनाक्रम को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
बिहार में ‘गद्दार’ शब्द पर सियासी घमासान
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा राजनीतिक असर बिहार में दिखाई दे रहा है। नीतीश कुमार के समर्थक इसे उनके राजनीतिक सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कांग्रेस खेमे की ओर से 2024 के गठबंधन टूटने को लेकर अपने पुराने राजनीतिक आकलन सामने रखे जा रहे हैं।
पटना के एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ शिक्षाविद ने, जो फिलहाल दिल्ली में अपने परिवार के साथ हैं, कहा कि कांग्रेस को नीतीश कुमार पर टिप्पणी करने से पहले अपने पुराने राजनीतिक रुख पर भी विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि एक दौर में बिहार में NDA से अलग होने और विपक्षी गठबंधन के साथ आने के लिए नीतीश कुमार को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगियों की रणनीति अलग थी, जबकि अब उसी राजनीतिक घटनाक्रम को ‘गद्दारी’ के रूप में पेश किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा बिहार के मतदाताओं को भी आहत कर सकती है और कांग्रेस को अपने शब्दों पर पुनर्विचार करना चाहिए।हालांकि, यह प्रतिक्रिया उस शिक्षाविद की व्यक्तिगत राजनीतिक राय है।
सवाल अब सिर्फ नीतीश कुमार का नहीं, बिहार की सियासी भाषा का भी है
नीतीश कुमार की गठबंधन राजनीति पर कांग्रेस और NDA के नेताओं के अपने-अपने राजनीतिक आकलन हैं। लेकिन CWC की बैठक से सामने आई कथित टिप्पणी ने 2024 के गठबंधन परिवर्तन को एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।बिहार की राजनीति में गठबंधन बदलना कोई नया घटनाक्रम नहीं है, लेकिन एक ही नेता को कभी विपक्षी एकता का महत्वपूर्ण हिस्सा और बाद में ‘गद्दार’ बताने वाली राजनीतिक भाषा ने पुराने रिश्तों और बदलते समीकरणों की पूरी कहानी फिर सामने ला दी है।
अब देखना यह है कि यह विवाद महज बयानबाजी तक सीमित रहता है या बिहार की आगामी राजनीतिक लड़ाई में इसका असर और गहरा दिखाई देता है।
एन एस के विशेष, बी. के. झा
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