नीतीश ने INDIA गठबंधन क्यों छोड़ा? संजय झा ने बताई वजह- कांग्रेस के लिए परिवार और पार्टी सर्वोपरि, सोनिया के दावे को JDU ने नकारा

बी के झा

NSK news Ind

पटना/नई दिल्ली, 30 सितंबर

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनवरी 2024 में INDIA गठबंधन से अलग होकर NDA में लौटने का फैसला एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।

कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की ओर से कथित तौर पर नीतीश कुमार के गठबंधन छोड़ने को लेकर की गई टिप्पणी पर जनता दल (यू) ने तीखा पलटवार किया है। जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने सोनिया गांधी के आकलन को खारिज करते हुए दावा किया कि नीतीश कुमार के सामने गठबंधन छोड़ने की वजह कुछ और थी।संजय झा के मुताबिक, नीतीश कुमार ने INDIA गठबंधन इसलिए नहीं छोड़ा था कि वह लगातार बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे थे, बल्कि कांग्रेस के रवैये से निराश होकर उन्होंने यह फैसला लिया था।

उनका आरोप है कि कांग्रेस के लिए परिवार और अपनी पार्टी के हित सबसे ऊपर रहे और गठबंधन के व्यापक उद्देश्य उसके बाद आते रहे।हालांकि, कांग्रेस की ओर से सामने आए सूत्रों के मुताबिक CWC की बैठक में सोनिया गांधी ने इसके उलट कहा कि नीतीश कुमार का INDIA गठबंधन में बने रहने का इरादा ही नहीं था और वह बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे थे।

‘नीतीश ने कभी संयोजक बनने की इच्छा नहीं जताई

’संजय झा ने कहा कि नीतीश कुमार ने INDIA गठबंधन का संयोजक बनने के लिए कभी व्यक्तिगत आग्रह नहीं किया था। उनके अनुसार, गठबंधन के शुरुआती दौर में नीतीश कुमार विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश में सक्रिय रहे, लेकिन बाद में कांग्रेस के रवैये से असंतोष बढ़ता गया।जेडीयू नेता ने दावा किया कि गठबंधन में शामिल कई नेताओं ने शुरुआती दौर में कांग्रेस के बिना विपक्षी मोर्चा बनाने की इच्छा जताई थी।

उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ नेताओं ने नीतीश कुमार से कांग्रेस नेताओं के बिना बैठकें आयोजित करने का आग्रह किया था।संजय झा का कहना है कि ऐसे राजनीतिक माहौल में नीतीश कुमार ने महसूस किया कि गठबंधन की दिशा और कांग्रेस की प्राथमिकताओं के बीच पर्याप्त तालमेल नहीं बन पा रहा है।

परिवार बनाम गठबंधन की राजनीति का आरोप

संजय झा ने कांग्रेस पर सीधा राजनीतिक हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के लिए परिवार सबसे महत्वपूर्ण है और संगठन तथा व्यापक विपक्षी एकता से जुड़े मुद्दे उसके बाद आते हैं।उनके अनुसार, नीतीश कुमार ने विपक्षी एकता को लेकर गंभीर प्रयास किए थे, लेकिन कांग्रेस के रवैये से उन्हें लगा कि गठबंधन की राजनीति को उस प्राथमिकता से नहीं देखा जा रहा है, जिसकी जरूरत थी।यह संजय झा और जेडीयू का राजनीतिक आकलन है।

कांग्रेस ने सार्वजनिक रूप से इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

CWC में दिग्विजय ने उठाया नीतीश का मुद्दा, सोनिया ने दिया अलग जवाब

विवाद की शुरुआत कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में नीतीश कुमार के संदर्भ से हुई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बैठक में कहा कि INDIA गठबंधन को नीतीश कुमार को जाने नहीं देना चाहिए था। उनका तर्क था कि अगर नीतीश गठबंधन में बने रहते तो मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां अलग हो सकती थीं।रिपोर्टों के अनुसार, सोनिया गांधी ने इस आकलन से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार गठबंधन से बाहर जाना चाहते थे और उनके लिए अलग होना तय था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कथित तौर पर इसी रुख का समर्थन किया।

यानी एक ही राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस के भीतर से दो अलग-अलग आकलन सामने आए—एक तरफ नीतीश को साथ बनाए रखने की जरूरत की बात, तो दूसरी ओर यह दावा कि उनका गठबंधन में बने रहना ही तय नहीं था।

जिस नीतीश ने विपक्षी एकता की नींव रखी, वही बने विवाद का केंद्र

नीतीश कुमार की भूमिका INDIA गठबंधन के शुरुआती गठन में महत्वपूर्ण रही थी। 2022 में NDA से अलग होकर उन्होंने RJD और कांग्रेस के साथ बिहार में सरकार बनाई। इसके बाद उन्होंने विभिन्न विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने के लिए बातचीत शुरू की।2023 में विपक्षी दलों की बैठकों के सिलसिले ने आगे चलकर INDIA गठबंधन का रूप लिया। लेकिन जनवरी 2024 में नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और NDA में वापसी कर ली। इसके बाद BJP के समर्थन से बिहार में नई सरकार बनी।यही राजनीतिक पलटाव अब करीब ढाई साल बाद कांग्रेस की आंतरिक चर्चा में फिर सामने आया है।

‘किसने किसे छोड़ा?’—बिहार की राजनीति में फिर गरमाया पुराना सवाल

नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन छोड़ने को लेकर कांग्रेस और JDU की कहानी बिल्कुल अलग है।कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार नीतीश पहले से गठबंधन से बाहर निकलने का मन बना चुके थे।

JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के अनुसार नीतीश कांग्रेस के रवैये से निराश हुए और गठबंधन छोड़ने का फैसला किया।

दोनों दावों के बीच सबसे बड़ा अंतर यही है कि 2024 के उस राजनीतिक घटनाक्रम की जिम्मेदारी कौन लेता है—क्या नीतीश कुमार पहले से NDA में लौटने का फैसला कर चुके थे, या कांग्रेस के साथ राजनीतिक असहमति ने उन्हें गठबंधन बदलने के लिए मजबूर किया?

इतिहास का तथ्य यह है कि 28 जनवरी 2024 को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर महागठबंधन सरकार से अलग होने के बाद NDA के साथ सरकार बनाई। इसके पीछे की राजनीतिक व्याख्या पर दोनों खेमों का नजरिया अलग है।

बिहार से दिल्ली तक फिर गूंज रहा 2024 का फैसला

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर गठबंधन परिवर्तन के कई दौरों का साक्षी रहा है। यही वजह है कि उनके 2024 के फैसले को लेकर आज भी राजनीतिक दल अपने-अपने नजरिए से व्याख्या करते हैं।ताजा विवाद की खास बात यह है कि इस बार बहस बिहार के नेताओं तक सीमित नहीं रही। कांग्रेस की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था की बैठक में नीतीश कुमार का नाम सामने आया और उसके बाद JDU ने कांग्रेस पर पलटवार कर दिया।अब बिहार की राजनीति में सवाल केवल यह नहीं है कि नीतीश कुमार ने INDIA गठबंधन क्यों छोड़ा?

बल्कि यह भी है कि 2024 में जो राजनीतिक फैसला हुआ था, उसकी व्याख्या 2026 में अलग-अलग दल अपने मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के हिसाब से किस तरह कर रहे हैं।

एन एस के विशेष, बी. के. झा

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