एक हिंदुस्तानी ने घायल होने के बावजूद 9/11 जैसी त्रासदी टाल दी’, UPSC शताब्दी समारोह में PM मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार के साहस को किया सलाम

बी के झा

NSK news Ind

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर

भारत की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 100 वर्ष पूरे होने पर गुरुवार को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित शताब्दी समारोह केवल एक संस्थागत यात्रा का उत्सव नहीं रहा। मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसे भारतीय की बहादुरी को भी देश के सामने रखा, जिसने आसमान में मंडराती एक बड़ी त्रासदी को टालने में निर्णायक भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री मोदी ने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में संकट के दौरान असाधारण साहस दिखाने वाले भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार का उल्लेख करते हुए कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री ने इस घटना के संदर्भ में कहा कि ‘एक हिंदुस्तानी ने 9/11 होने से बचा लिया।’ पीएम मोदी ने कैप्टन मच्छार के साहस को पूरे देश के लिए गौरव का विषय बताया।

कॉकपिट में शुरू हुआ संघर्ष, खतरे में थीं 174 जिंदगियां

30 सितंबर को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी। विमान में 174 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार और उनके सह-पायलट के बीच गंभीर संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सह-पायलट ने कैप्टन मच्छार पर धारदार हथियार से हमला किया और विमान को संकट में डालने की कोशिश की। घटना की विस्तृत परिस्थितियों और हमले के उद्देश्य की जांच जारी है।

गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने हिम्मत नहीं छोड़ी। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के अन्य सदस्यों को अंदर पहुंचने का मौका मिला। हमलावर को काबू किया गया और विमान को सऊदी अरब के तबूक में आपात लैंडिंग कराई गई। विमान में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी विमान को सुरक्षित उतारने में भूमिका निभाई।

घायल शरीर, लेकिन अडिग रहा हौसला

इस पूरे घटनाक्रम में कैप्टन मच्छार की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि गंभीर चोट के बावजूद उन्होंने ऐसा कदम उठाया, जिससे कॉकपिट तक दूसरे लोगों की पहुंच संभव हुई। यही वह निर्णायक क्षण था जिसने हालात को और भयावह होने से रोकने में मदद की।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी उनके साहस और सूझबूझ की चर्चा हुई है।कैप्टन मच्छार को घटना के बाद चिकित्सा उपचार दिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वे स्थिर स्थिति में हैं और आगे के उपचार के लिए उन्हें दुबई ले जाया गया है।

‘हर देशवासी को स्मित पर गर्व’—PM मोदी

UPSC के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कैप्टन स्मित ने जिस तरह की सूझबूझ और साहस का परिचय दिया, वह देश के लिए गौरव की बात है। प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने कैप्टन मच्छार के पिता भूपेंद्र भाई, माता गीता बहन और पत्नी सोनल से भी बातचीत की है।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कैप्टन स्मित के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करने की अपील की।

UPSC के 100 साल: भरोसा कायम, बदलता रहेगा भारत

समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने UPSC की 100 वर्षों की यात्रा को देश के संस्थागत भरोसे की यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि एक सदी के दौरान पीढ़ियां बदलीं, सरकारें बदलीं, तकनीक बदली और परीक्षा का स्वरूप भी बदला, लेकिन UPSC के प्रति देशवासियों का भरोसा कायम रहा।

UPSC की स्थापना 1926 में हुई थी। शताब्दी समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। साथ ही ‘100 Landmark Judgements—Shaping the Policies of UPSC and Public Service Commissions in India’ नामक पुस्तक भी जारी की गई।

‘भारत का भविष्य इंतजार कर रहा है’

प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का पहला चौथाई हिस्सा बीत चुका है और अगले 20-25 वर्ष भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। विकसित भारत के निर्माण के लिए ऐसे प्रशासनिक नेतृत्व की आवश्यकता होगी जो ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘नागरिक प्रथम’ की भावना से काम करे।उन्होंने बदलती तकनीक, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तकनीक हजारों दस्तावेजों को कुछ ही क्षणों में प्रोसेस कर सकती है तो प्रशासनिक व्यवस्था को भी बदलते समय के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा।

गांव-कस्बों से UPSC तक पहुंच रहे युवा

प्रधानमंत्री ने कहा कि UPSC का स्वरूप समय के साथ अधिक व्यापक हुआ है। कभी बड़े शहरों और बड़े घरों के युवाओं तक सीमित दिखाई देने वाली यह प्रतियोगी व्यवस्था आज गांवों और कस्बों के युवाओं के लिए भी अवसर का माध्यम बनी है। उन्होंने सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया।PM मोदी ने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है और UPSC इस शक्ति को प्रशासनिक नेतृत्व में बदलने वाला महत्वपूर्ण माध्यम है।

एक तरफ UPSC की शताब्दी, दूसरी तरफ आसमान में भारत का साहस

भारत मंडपम में UPSC की 100 वर्षों की संस्थागत यात्रा का उत्सव चल रहा था और उसी मंच से कैप्टन स्मित मच्छार का नाम पूरे देश के सामने एक अलग वजह से गूंजा।

एक ओर देश ने प्रशासनिक सेवा में समर्पण, निष्पक्षता और जनसेवा की विरासत को याद किया, तो दूसरी ओर एक भारतीय पायलट के साहस ने यह दिखाया कि संकट की घड़ी में निर्णय की एक छोटी-सी खिड़की भी सैकड़ों जिंदगियों और अनगिनत परिवारों का भविष्य बदल सकती है।

कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की कहानी अब केवल एक विमान की आपात स्थिति की कहानी नहीं रह गई है।

यह उस साहस, कर्तव्यबोध और त्वरित निर्णय का उदाहरण बन गई है, जिसकी कीमत कभी-कभी हजारों जिंदगियों में चुकाई जाती है।

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