बी के झा, एन एस के -अंतरराष्ट्रीय डेस्क
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सूडान/ नई दिल्ली, 21 अक्टूबर
अफ्रीकी देश सूडान में जारी गृहयुद्ध का कहर अब आम नागरिकों की जिंदगी को और गहरे अंधेरे में धकेलता नजर आ रहा है। सूडान और दक्षिण सूडान के बीच विवादित क्षेत्र अबेई के एमिएट बाजार में हुए भीषण ड्रोन हमले ने भयावह तबाही मचाई है। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में कम से कम 153 लोगों की मौत की खबर है। मृतकों में बच्चों के भी शामिल होने की बात सामने आई है। हमले के बाद बाजार में आग फैल गई और देखते ही देखते पूरा इलाका चीख-पुकार, अफरा-तफरी और तबाही के मंजर में बदल गया।जानकारी के मुताबिक, ड्रोन हमला बाजार में एक पेट्रोल पंप के पास हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आग की लपटों ने आसपास के क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। अचानक हुए हमले से लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
बाजार में मौजूद लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इस दौरान कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।स्थानीय अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि, हताहतों की अंतिम संख्या और हमले की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना अभी जरूरी है।
बाजार में मौत का तांडव, आखिर किसने बरसाई आग?
अबेई के एमिएट बाजार पर हुए हमले ने एक बार फिर सूडान में जारी संघर्ष के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाजार जैसे सार्वजनिक स्थान पर इतने बड़े पैमाने पर जनहानि की खबर ने क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है।अबेई में सूचना मामलों के कार्यवाहक मंत्री योहाना अकोल नगोर ने इस हमले के लिए सूडान की सेना को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है।
ऐसे में हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण है। युद्धग्रस्त क्षेत्रों में किसी हमले के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाना अक्सर मुश्किल होता है, लेकिन नागरिकों की मौत के मामले में जवाबदेही तय करना और सच्चाई सामने लाना बेहद जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस संघर्ष की कीमत उन लोगों को क्यों चुकानी पड़ रही है, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है?
दक्षिण सूडान ने जताया कड़ा विरोध, सूडानी सेना पर आरोप
इस घटना के बाद दक्षिण सूडान के विदेश मंत्रालय ने भी सूडान की सेना पर हमले का आरोप लगाया है। मंत्रालय के मुताबिक, हमले में बाजार के कई हिस्सों को निशाना बनाया गया, जिससे आम नागरिकों की जान गई और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा।यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब सूडान में लंबे समय से जारी सशस्त्र संघर्ष ने मानवीय संकट को गंभीर बना दिया है। हमले में बड़ी संख्या में लोगों की मौत के दावे ने क्षेत्रीय तनाव और नागरिक सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।दक्षिण सूडान की ओर से इस हमले के संबंध में सूडान के राजदूत को तलब किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस राजनयिक कदम के विवरण और आधिकारिक पुष्टि को प्रकाशित करने से पहले संबंधित सरकारी बयान की जांच आवश्यक है।
यदि किसी सैन्य कार्रवाई में जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाया गया है, तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के गंभीर उल्लंघन का मामला हो सकता है। युद्ध के दौरान भी नागरिकों, अस्पतालों, बाजारों और अन्य गैर-सैन्य ठिकानों की सुरक्षा के नियम लागू रहते हैं।
अप्रैल 2023 से जारी संघर्ष ने सूडान को बनाया मानवीय त्रासदी का केंद्र
सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच संघर्ष जारी है। सत्ता और सैन्य नियंत्रण को लेकर शुरू हुई इस लड़ाई ने धीरे-धीरे व्यापक गृहयुद्ध का रूप ले लिया।इस संघर्ष ने देश की सुरक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य आपूर्ति और सामान्य जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं, जबकि बड़ी आबादी भोजन, साफ पानी और चिकित्सा सुविधाओं की कमी से जूझ रही है।युद्ध के मैदान में इस्तेमाल होने वाले हथियारों और सैन्य रणनीतियों में बदलाव ने भी नागरिकों के लिए खतरा बढ़ाया है। विशेष रूप से ड्रोन हमलों के बढ़ते इस्तेमाल ने संघर्ष वाले क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां पैदा की हैं।ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी से लेकर सैन्य ठिकानों पर हमले तक के लिए किया जाता है। लेकिन जब इनका इस्तेमाल घनी आबादी वाले इलाकों में होता है, तो नागरिकों की जान जाने और बड़े पैमाने पर विनाश का जोखिम बढ़ जाता है।
ड्रोन युद्ध का बढ़ता खतरा, निशाने पर आम लोग
एमिएट बाजार में हुए हमले की खबर ने एक बार फिर इस सवाल को सामने ला दिया है कि आधुनिक युद्ध में आम नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए क्या पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं।ड्रोन युद्ध में दूर से हमले किए जा सकते हैं। ऐसे में यदि लक्ष्य की सही पहचान नहीं होती या हमले के संभावित नागरिक नुकसान का आकलन नहीं किया जाता, तो इसका परिणाम विनाशकारी हो सकता है।
हालांकि, एमिएट बाजार पर हुए हमले में इस्तेमाल किए गए ड्रोन, उसके संचालक और वास्तविक लक्ष्य के बारे में स्वतंत्र रूप से पुष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है। केवल आरोपों के आधार पर किसी पक्ष की जिम्मेदारी को अंतिम रूप से स्थापित नहीं किया जा सकता।
लेकिन एक बात स्पष्ट है—यदि किसी हमले में बाजार जैसे सार्वजनिक स्थान पर बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मृतकों की पहचान, घायलों के उपचार और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना भी तत्काल प्राथमिकता होनी चाहिए।
युद्ध की आग में बचपन भी हुआ तबाह
इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू बच्चों की मौत की खबर है। जिन बच्चों के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए, वे युद्ध की हिंसा और असुरक्षा के बीच अपनी जान गंवा रहे हैं।किसी भी संघर्ष में बच्चों और अन्य कमजोर वर्गों की सुरक्षा विशेष महत्व रखती है। परिवारों का बिखरना, शिक्षा का रुकना और बुनियादी सुविधाओं का छिन जाना आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर लंबे समय तक असर डाल सकता है।
एमिएट बाजार में 153 लोगों की मौत का दावा केवल एक आंकड़ा नहीं है। यदि इसकी पुष्टि होती है, तो यह दर्जनों परिवारों के उजड़ने और एक पूरे समुदाय पर गहरी चोट का संकेत होगा।अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अब चुनौती केवल हिंसा पर चिंता जताने की नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, मानवीय सहायता पहुंचाने और संघर्ष में शामिल पक्षों को जवाबदेह बनाने की भी है।
एन एस के विश्लेषण:
युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं, लेकिन निर्दोषों की मौत सबसे बड़ा सवाल
सूडान का गृहयुद्ध एक बार फिर दुनिया के सामने यह कठोर सच्चाई रख रहा है कि जब सत्ता और सैन्य वर्चस्व की लड़ाई नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तो सबसे पहले आम लोगों की जिंदगी तबाह होती है।
एमिएट बाजार पर हुए कथित ड्रोन हमले में 153 लोगों की मौत का आंकड़ा यदि आधिकारिक जांच में पुष्ट होता है, तो यह नागरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर घटना होगी।
बच्चों की मौत की खबर इस त्रासदी को और भी मार्मिक बनाती है।अब जरूरी है कि हमले की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाई जाए। साथ ही, संघर्ष में शामिल सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करना चाहिए।
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ड्रोन किसने उड़ाया और हमला किसने किया। सवाल यह भी है कि युद्ध की इस आग में निर्दोष नागरिकों को कब तक जलना पड़ेगा?
