प्रियंका गांधी ने यूपी कांग्रेस के दिग्गजों के साथ बनाई रणनीति, छह जोन में तैनात होंगी विशेष टीमें; दिल्ली रैली में यूपी कांग्रेस का 50 हजार की भीड़ जुटाने का लक्ष्य, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर आर-पार की तैयारी; सपा को 200 सीटों की सूची देने का दावा

बी के झा, एन एस के पोर्टल

NSK news India

नई दिल्ली/लखनऊ, 24 अक्टूबर

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने दिल्ली में सियासी ताकत दिखाने की तैयारी तेज कर दी है। एक नवंबर को प्रस्तावित रैली के लिए उत्तर प्रदेश कांग्रेस को 50 हजार लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का लक्ष्य दिए जाने की खबर है। पार्टी नेतृत्व इस आयोजन को केवल विरोध-प्रदर्शन तक सीमित रखने के बजाय चुनाव आयोग के खिलाफ अपने राजनीतिक अभियान को धार देने के अवसर के रूप में देख रहा है।

कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को दिल्ली में उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर रैली की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में भीड़ जुटाने, जिला स्तर पर जिम्मेदारियां तय करने और संगठनात्मक समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे को लेकर भी कांग्रेस की ओर से बड़ा दावा सामने आया है। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि पार्टी ने सपा को 200 नामों की सूची सौंपी है। हालांकि, सपा से जुड़े सूत्रों ने ऐसी सूची मिलने की जानकारी से इनकार किया है।

प्रियंका गांधी ने संभाली कमान, 50 हजार लोगों को दिल्ली लाने का लक्ष्य

दिल्ली में हुई बैठक में उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा वर्चुअल माध्यम से, कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय समेत अन्य नेता शामिल हुए।बैठक में रैली के लिए उत्तर प्रदेश से अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश इकाई को 50 हजार लोगों की जुटान का लक्ष्य दिया गया है। प्रियंका गांधी ने नेताओं से इस दिशा में समन्वित प्रयास करने और जिला स्तर तक संगठन को सक्रिय करने के निर्देश दिए।

इससे पहले शुक्रवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस की जोनवार बैठकें भी आयोजित की गईं। राजेंद्र पाल गौतम और इमरान मसूद ने विभिन्न बैठकों के माध्यम से तैयारियों का जायजा लिया।

कांग्रेस के सामने चुनौती केवल बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचाने की नहीं, बल्कि इतने बड़े आयोजन के लिए परिवहन, समन्वय और जिला स्तर पर संगठनात्मक व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी है। ऐसे में पार्टी ने जिम्मेदारियां बांटकर तैयारी को व्यवस्थित करने की कोशिश की है।

छह जोन में टीमें तैनात, हर जिले का हिसाब रखने की तैयारी

रैली की तैयारियों को जमीन पर उतारने के लिए कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के सभी छह जोन में प्रभारियों की जिम्मेदारी तय की है। प्रत्येक जोन में प्रभारी के अधीन चार-चार लोगों की टीम तैनात किए जाने की जानकारी सामने आई है।निर्देशों के मुताबिक, दिल्ली जाने वाले लोगों का नाम, पता और फोन नंबर दर्ज किया जाएगा। इसका उद्देश्य जिलेवार भागीदारी का हिसाब रखना और कार्यकर्ताओं के आवागमन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।इस व्यवस्था से पार्टी नेतृत्व यह आकलन भी कर सकेगा कि किस जिले से कितने लोग रैली में शामिल हो रहे हैं और निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले तैयारियां कहां तक पहुंची हैं।

50 हजार की भागीदारी का लक्ष्य कांग्रेस के लिए संगठनात्मक शक्ति दिखाने की परीक्षा भी है। यदि पार्टी इस लक्ष्य के करीब पहुंचती है, तो वह इसे उत्तर प्रदेश में अपनी सक्रियता और चुनावी तैयारी के संकेत के रूप में पेश कर सकती है। हालांकि, वास्तविक भागीदारी का आकलन रैली के दिन ही संभव होगा।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन

एक नवंबर की प्रस्तावित रैली का प्रमुख मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेता चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।विपक्ष का यह अभियान चुनावी प्रक्रिया और आयोग की निष्पक्षता से जुड़े सवालों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। कांग्रेस इस आयोजन के जरिए अपने समर्थकों को एकजुट करने और चुनाव संबंधी मुद्दों पर राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है।हालांकि, रैली का राजनीतिक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि इसमें कितनी भागीदारी होती है, गठबंधन के सहयोगी दल किस स्तर पर शामिल होते हैं और विरोध के दौरान कौन-से मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाते हैं।

सपा को 200 नामों की सूची देने का दावा, गठबंधन में सीटों पर सस्पेंस

दिल्ली रैली की तैयारियों के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के बंटवारे का सवाल भी चर्चा में है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने शुक्रवार को दावा किया कि कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को 200 नामों की सूची सौंप दी है। उन्होंने कहा कि दोनों दल जब आमने-सामने बैठकर बातचीत करेंगे, तब इस सूची पर चर्चा होगी।लेकिन इस दावे के साथ ही गठबंधन की बातचीत को लेकर असमंजस भी सामने आया है।

सपा से जुड़े सूत्रों ने ऐसी किसी सूची के मिलने की जानकारी से इनकार किया है। इससे दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे पर औपचारिक बातचीत की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सूत्रों के हवाले से यह भी बताया जा रहा है कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन के तहत करीब 150 से 200 सीटों पर अपना दावा पेश करना चाहती है। लगभग 170 सीटों की सूची का भी उल्लेख किया गया है।हालांकि, 200 नामों की सूची देने का दावा और 150 से 200 सीटों की मांग का आकलन अलग-अलग बातें हैं।

फिलहाल, सीटों के बंटवारे पर दोनों दलों के बीच किसी सहमति की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की दोहरी चुनौती

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सामने एक ओर संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने का सवाल है।दिल्ली रैली के लिए बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने की तैयारी पार्टी के संगठनात्मक नेटवर्क की परीक्षा लेगी। वहीं, सीटों के बंटवारे पर सामने आ रहे अलग-अलग दावे यह संकेत देते हैं कि गठबंधन की रणनीति को लेकर बातचीत और स्पष्टता की जरूरत बनी हुई है।

कांग्रेस यदि रैली के जरिए अपनी सक्रियता का प्रदर्शन करती है और सपा के साथ सीटों के बंटवारे पर सहमति बनाने में सफल रहती है, तो इससे आगामी विधानसभा चुनाव की उसकी तैयारियों को दिशा मिल सकती है। इसके उलट, भागीदारी के लक्ष्य और गठबंधन संबंधी दावों के बीच तालमेल नहीं बैठने पर राजनीतिक सवाल भी उठ सकते हैं।

एन एस के का विश्लेषण:

दिल्ली की रैली और लखनऊ की सीटों पर नजर

कांग्रेस के लिए एक नवंबर की रैली महज दिल्ली में विरोध दर्ज कराने का कार्यक्रम नहीं है। यह उत्तर प्रदेश में संगठन की ताकत प्रदर्शित करने और चुनाव से पहले अपने राजनीतिक दावे को मजबूत करने का अवसर भी है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के जरिए पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव संबंधी मुद्दों को उठाना चाहती है, जबकि सपा को 200 नामों की सूची सौंपने का दावा प्रदेश की गठबंधन राजनीति को चर्चा में ले आया है।

अब दो सवाल अहम हैं—क्या कांग्रेस उत्तर प्रदेश से 50 हजार लोगों की भागीदारी का लक्ष्य हासिल कर पाएगी और क्या समाजवादी पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे पर बातचीत किसी ठोस नतीजे तक पहुंचेगी?

दिल्ली की रैली में जुटने वाली भीड़ कांग्रेस की संगठनात्मक तैयारी का संकेत दे सकती है, लेकिन उत्तर प्रदेश में उसकी चुनावी ताकत का वास्तविक आकलन गठबंधन की शर्तों, सीटों पर सहमति और जमीनी जनसमर्थन से ही होगा।

एन एस के पोर्टल – खबर वही, नजर अलग।

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