बी के झा, एन एस के पोर्टल – अंतरराष्ट्रीय डेस्क
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नई दिल्ली/ वाशिंगटन / तेहरान, 24 अक्टूबर
दुनिया पहले ही युद्ध, आर्थिक अस्थिरता और ऊर्जा संकट की आशंकाओं से जूझ रही है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है, जहां मिसाइलों और सैन्य ठिकानों के साथ-साथ वैश्विक इंटरनेट का बुनियादी ढांचा भी निशाने पर आ सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक और बड़े सैन्य अभियान की चेतावनी दी है, तो दूसरी तरफ तेहरान ने भी जवाबी कार्रवाई की स्थिति में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल को निशाना बनाने की धमकी दी है।
इस टकराव ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है—क्या अमेरिका और ईरान की जंग अब युद्धभूमि से निकलकर पूरी दुनिया के डिजिटल नेटवर्क तक पहुंचने वाली है?
ट्रंप की चेतावनी: फिर गूंज सकता है ‘एपिक फ्यूरी’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को फ्लोरिडा में आयोजित एक रैली के दौरान ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि अगर तेहरान समझौते के लिए तैयार नहीं होता है, तो अमेरिका एक और ‘एपिक फ्यूरी’ अभियान शुरू कर सकता है।‘एपिक फ्यूरी’ वही नाम है, जिसका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के संदर्भ में किया गया है। ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन कूटनीतिक बातचीत के साथ सैन्य दबाव का विकल्प भी खुला रखना चाहता है।ट्रंप की इस चेतावनी से कुछ घंटे पहले एक अमेरिकी दूत ने भी कथित तौर पर संकेत दिया था कि सप्ताहांत तक ईरान पर फिर से बड़े हमले हो सकते हैं।
यदि ये संकेत वास्तविक सैन्य कार्रवाई में बदलते हैं, तो पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।हालांकि, ट्रंप के बयान को तत्काल हमले की औपचारिक घोषणा मानना उचित नहीं होगा। फिलहाल उनके शब्दों से सैन्य विकल्प पर विचार किए जाने का संकेत मिलता है, लेकिन आगे की कार्रवाई का वास्तविक स्वरूप स्पष्ट नहीं है।
ईरान का पलटवार: सैन्य ठिकानों से आगे बढ़ेगी जंग?
अमेरिकी धमकी के जवाब में ईरान की ओर से भी कड़ा संदेश सामने आया है। खबर के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला किया गया, तो तेहरान खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछे महत्वपूर्ण इंटरनेट केबल नेटवर्क को निशाना बना सकता है।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास मौजूद सात प्रमुख समुद्री इंटरनेट केबल को संभावित निशाने के रूप में देखा है। हालांकि, इन केबल को काटने की किसी वास्तविक कार्रवाई या इस संबंध में किसी औपचारिक सैन्य आदेश की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
यह धमकी इसलिए गंभीर है, क्योंकि समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा हैं। इनके माध्यम से देशों के बीच डेटा का आदान-प्रदान होता है। बैंकिंग लेनदेन, अंतरराष्ट्रीय कारोबार, क्लाउड कंप्यूटिंग और अनेक डिजिटल सेवाएं इसी नेटवर्क पर निर्भर करती हैं।यदि युद्ध के दौरान इस बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाया जाता है, तो इसका असर केवल अमेरिका, ईरान या खाड़ी देशों तक सीमित रहने की आशंका नहीं होगी। व्यवधान की गंभीरता और प्रभावित केबलों के आधार पर इसका प्रभाव दुनिया के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंच सकता है।
इंटरनेट केबल कटीं तो दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?
समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबल वैश्विक इंटरनेट संचार की रीढ़ हैं। अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक का विशाल हिस्सा इन्हीं के माध्यम से गुजरता है। इसलिए किसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर एक साथ कई केबल क्षतिग्रस्त होने से संचार व्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ सकता है।
1. इंटरनेट की रफ्तार और कनेक्टिविटी पर असर
किसी प्रमुख केबल के क्षतिग्रस्त होने पर डेटा को दूसरे मार्गों से भेजना पड़ सकता है। इससे कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट की गति घट सकती है, नेटवर्क पर दबाव बढ़ सकता है और सेवाओं में रुकावट आ सकती है। हालांकि, हर केबल कटने से पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाएगा, ऐसा नहीं है।
2. बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन में परेशानी
अंतरराष्ट्रीय भुगतान, वित्तीय संस्थानों के बीच डेटा का आदान-प्रदान और सीमा पार कारोबार डिजिटल नेटवर्क पर निर्भर करते हैं। महत्वपूर्ण संचार मार्ग बाधित होने पर कुछ सेवाओं में देरी या अस्थायी व्यवधान पैदा हो सकता है।
3. कारोबार और क्लाउड सेवाओं पर संकट
बहुराष्ट्रीय कंपनियों, डेटा सेंटरों और क्लाउड आधारित सेवाओं को विभिन्न देशों के बीच लगातार डेटा भेजना पड़ता है। संचार नेटवर्क में गंभीर व्यवधान आने पर कंपनियों के संचालन, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल कारोबार की गति प्रभावित हो सकती है।
4. मरम्मत में लग सकता है लंबा समय
समुद्र के भीतर क्षतिग्रस्त केबल की मरम्मत आसान काम नहीं है। इसके लिए विशेष जहाजों, तकनीकी विशेषज्ञों और अनुकूल समुद्री परिस्थितियों की जरूरत होती है। यदि संबंधित क्षेत्र युद्ध के खतरे से घिरा हो, तो जहाजों की आवाजाही, बीमा और सुरक्षा संबंधी बाधाएं मरम्मत में देरी कर सकती हैं।
यानी, इंटरनेट केबल को निशाना बनाने की धमकी केवल तकनीकी चेतावनी नहीं है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की उस कमजोर कड़ी की ओर इशारा करती है, जिस पर आधुनिक दुनिया का बड़ा हिस्सा निर्भर है।
ट्रंप के बयानों में विरोधाभास या रणनीतिक दबाव?
इस पूरे घटनाक्रम में ट्रंप के बयानों का बदलता स्वर भी चर्चा का विषय है। एक तरफ उन्होंने ईरान पर नए हमले की संभावना जताई, वहीं शुक्रवार को ही उन्होंने कहा कि अमेरिका इस युद्ध को बहुत जल्दी समाप्त कर सकता है।ट्रंप ने यह सवाल भी उठाया कि अमेरिका को युद्ध तुरंत खत्म कर देना चाहिए या फिर इसे धीरे-धीरे कमजोर पड़ने देना चाहिए।
उनके मुताबिक, अमेरिका को वे चीजें मिल रही हैं, जिन्हें वह हासिल करना चाहता है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल की आपूर्ति जारी रहने का भी उल्लेख किया।इन बयानों से अमेरिकी रणनीति को लेकर कई सवाल उठते हैं।
क्या वाशिंगटन सैन्य कार्रवाई की धमकी देकर तेहरान को समझौते के लिए मजबूर करना चाहता है?
क्या अमेरिका युद्ध समाप्त करने की शर्तों पर दबाव बना रहा है?
या फिर ट्रंप सैन्य विकल्प खुला रखते हुए विरोधी पक्ष को अपनी ताकत का एहसास कराना चाहते हैं?
फिलहाल इन सवालों के निश्चित जवाब सामने नहीं हैं। लेकिन इतना स्पष्ट है कि ट्रंप एक ओर युद्ध समाप्त करने की संभावना जता रहे हैं, तो दूसरी ओर नए सैन्य अभियान की चेतावनी भी दे रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य: तेल से इंटरनेट तक, क्यों अहम है यह क्षेत्र?
होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से रणनीतिक महत्व रखता है। यहां बढ़ने वाला तनाव तेल की आपूर्ति, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकता है।
अब समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल को लेकर सामने आई धमकी ने इस क्षेत्र के महत्व को एक नया आयाम दे दिया है। यदि सैन्य टकराव समुद्री संचार नेटवर्क तक पहुंचता है, तो संकट केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल अर्थव्यवस्था भी इसकी चपेट में आ सकती है।हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी देश की ओर से धमकी दिए जाने और उसे वास्तविक कार्रवाई में बदलने के बीच अंतर होता है।
समुद्री केबलों को नुकसान पहुंचाने की स्थिति में तकनीकी, आर्थिक और रणनीतिक परिणामों का आकलन भी आवश्यक होगा।
दुनिया की नजरें वाशिंगटन और तेहरान पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब केवल दो देशों के सैन्य संघर्ष का सवाल नहीं रह गया है। इसके संभावित परिणाम ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, डिजिटल संचार और क्षेत्रीय सुरक्षा तक फैल सकते हैं।ट्रंप की नई सैन्य चेतावनी और ईरान की समुद्री इंटरनेट केबल को निशाना बनाने की धमकी ने संकट की गंभीरता बढ़ा दी है। लेकिन आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष बातचीत का रास्ता चुनते हैं या एक-दूसरे पर दबाव बढ़ाने के लिए नए कदम उठाते हैं।
सबसे बड़ा खतरा यह है कि यदि सैन्य टकराव महत्वपूर्ण समुद्री संचार नेटवर्क तक पहुंच गया, तो उसकी कीमत केवल युद्ध में शामिल देशों को नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों के कारोबार और आम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को भी चुकानी पड़ सकती है।
एन एस के का विश्लेषण:
आधुनिक युद्ध में किसी देश की ताकत का आकलन अब केवल उसके लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और सैन्य ठिकानों से नहीं किया जा सकता।
ऊर्जा आपूर्ति, डिजिटल संचार और समुद्र के नीचे बिछा बुनियादी ढांचा भी रणनीतिक शक्ति के महत्वपूर्ण हिस्से बन चुके हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव इसी बदलती युद्ध-व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
