अखिलेश से मिलीं तंजीम फातिमा, क्या आजम खान के घर से आएगा सपा का तीसरा राज्यसभा चेहरा?

बी के झा

NSK news Ind

लखनऊ, 1 अक्टूबर

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए शुरू हुई सियासी कवायद के बीच समाजवादी पार्टी के तीसरे उम्मीदवार को लेकर सस्पेंस लगातार गहराता जा रहा है। बुधवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पार्टी के दो उम्मीदवारों—प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी—के नाम पर मुहर लगाकर दोनों का नामांकन कराया, लेकिन तीसरे उम्मीदवार का पत्ता अभी नहीं खोला।इसी बीच पूर्व राज्यसभा सांसद और आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा अपने बेटे के साथ लखनऊ में अखिलेश यादव से मिलने पहुंचीं। दोनों के बीच करीब सवा घंटे तक बातचीत हुई। मुलाकात के बाद न तो अखिलेश यादव और न ही तंजीम फातिमा ने बातचीत के मुद्दों को सार्वजनिक किया। लेकिन राज्यसभा चुनाव के ठीक बीच हुई इस मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को जरूर हवा दे दी है।

तीसरी सीट पर मुस्लिम चेहरे की चर्चा क्यों?

सपा के दो उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद तीसरी सीट को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा मुस्लिम चेहरे की है। सलीम शेरवानी का नाम लगातार चर्चा में है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक शेरवानी ने भी दावा किया है कि उन्हें अखिलेश यादव से राज्यसभा भेजे जाने का आश्वासन मिला है और अंतिम फैसला 2 अक्टूबर के बाद होने की बात कही गई है।ऐसे में तंजीम फातिमा की अचानक लखनऊ में मौजूदगी ने समीकरण में एक नया नाम जोड़ दिया है।तंजीम फातिमा स्वयं 2014 से 2020 तक राज्यसभा सांसद रह चुकी हैं। इसलिए अगर पार्टी नेतृत्व उनके नाम पर विचार करता है तो यह उनके लिए संसद के उच्च सदन में वापसी का रास्ता होगा।लेकिन फिलहाल इसे फैसला मानना जल्दबाजी होगी। अखिलेश यादव और तंजीम फातिमा की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है।

धनराज नथवानी के नाम ने पहले ही चौंकाया

सपा ने राज्यसभा के लिए रामगोपाल यादव के साथ धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाकर पहले ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा पैदा कर दी है। नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े कारोबारी और कॉरपोरेट जगत के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। अखिलेश यादव ने उनके चयन को उद्योग और कारोबार के क्षेत्र में सपा की पहुंच बढ़ाने की रणनीति से जोड़ा है।

यही वजह है कि अब तीसरे उम्मीदवार को लेकर सवाल और बड़ा हो गया है—क्या सपा एक और चौंकाने वाला नाम सामने लाएगी या फिर पहले से चर्चा में चल रहे मुस्लिम चेहरे पर भरोसा करेगी?

सलीम शेरवानी बनाम तंजीम फातिमा—सस्पेंस गहराया

सियासी गलियारों में फिलहाल दो तरह की चर्चा है। एक तरफ सलीम शेरवानी का नाम है, जिनके बारे में पार्टी सूत्रों के हवाले से उम्मीदवार बनाए जाने की बात सामने आई है। दूसरी तरफ तंजीम फातिमा की अखिलेश से मुलाकात ने नई अटकलों को जन्म दिया है।अगर तंजीम फातिमा को प्रत्याशी बनाया जाता है तो यह सिर्फ एक नाम का ऐलान नहीं होगा, बल्कि आजम खान परिवार के साथ सपा के राजनीतिक रिश्ते को लेकर भी संदेश के तौर पर देखा जा सकता है।वहीं सलीम शेरवानी को मैदान में उतारने की स्थिति में अखिलेश यादव अपने पुराने राजनीतिक वादे और पार्टी के मुस्लिम प्रतिनिधित्व के सवाल को साधने की कोशिश कर सकते हैं।

बीजेपी का हमला—‘लॉलीपॉप’ की राजनीति का आरोप

सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर भाजपा की ओर से भी हमला शुरू हो गया है। बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सपा मुस्लिम समाज को केवल राजनीतिक संदेश देने के लिए किसी मुस्लिम चेहरे को राज्यसभा भेजने की कोशिश कर सकती है। उन्होंने इसे ‘लॉलीपॉप’ की राजनीति बताते हुए सवाल उठाया कि तीसरे उम्मीदवार के लिए अखिलेश यादव संख्या बल कहां से जुटाएंगे।यह भाजपा की राजनीतिक प्रतिक्रिया है और इसे उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

मुस्लिम राजनीति पर भी उठ रहे सवाल

सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर चर्चा सिर्फ पार्टी के भीतर नहीं है। मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर AIMIM समेत अन्य विपक्षी दलों की ओर से भी सपा पर सवाल उठाए गए हैं। धनराज नथवानी की उम्मीदवारी के बाद AIMIM प्रवक्ता शादाब चौहान ने आरोप लगाया कि सपा मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन लेने के बावजूद राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में अलग सामाजिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को चुन रही है।इसके जवाब में सपा अगर किसी मुस्लिम चेहरे को तीसरी सीट पर उतारती है तो पार्टी इसे अपने PDA—पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक—राजनीतिक सामाजिक समीकरण के हिस्से के रूप में पेश कर सकती है।

शिक्षाविदों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में

राजनीतिक विश्लेषण के स्तर पर इस घटनाक्रम को तीन कोणों से देखा जा रहा है।

पहला, सपा के सामने संगठनात्मक और सामाजिक प्रतिनिधित्व का संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।

दूसरा, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम मतदाताओं को लेकर पार्टी की राजनीतिक रणनीति का संकेत तीसरे उम्मीदवार के चयन से मिल सकता है।

तीसरा, राज्यसभा चुनाव में केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं होगा; तीसरे उम्मीदवार के लिए जरूरी विधायी समर्थन जुटाना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।राजनीति विज्ञान के जानकारों के मुताबिक किसी भी दल के लिए राज्यसभा उम्मीदवार का चयन केवल सामाजिक समीकरण का मामला नहीं होता। उम्मीदवार की स्वीकार्यता, विधायकों का समर्थन, पार्टी के भीतर संतुलन और चुनावी गणित—इन सभी पहलुओं को साथ लेकर चलना पड़ता है।

वहीं मुस्लिम समाज के भीतर भी प्रतिनिधित्व को लेकर एकराय मान लेना उचित नहीं होगा। समुदाय के अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूह किसी उम्मीदवार की पहचान, राजनीतिक भूमिका और पार्टी के साथ उसके संबंधों को अलग-अलग नजरिए से देख सकते हैं।

असली परीक्षा संख्या बल की

सपा के सामने सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि तीसरे उम्मीदवार के लिए संख्या बल कितना है और समर्थन कहां से आएगा। रिपोर्टों के अनुसार यूपी की एक राज्यसभा सीट के लिए 37 विधायकों के वोट की जरूरत है। ऐसे में तीसरे उम्मीदवार की घोषणा से ज्यादा महत्वपूर्ण उसके पक्ष में आवश्यक समर्थन जुटाना होगा।

यही कारण है कि अखिलेश यादव ने भी तीसरे उम्मीदवार के नाम को लेकर संख्या बल का संकेत दिया है।

2 अक्टूबर के बाद खुलेगा पत्ता?

फिलहाल सपा ने तीसरे उम्मीदवार का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। सलीम शेरवानी का नाम चर्चा में है, जबकि तंजीम फातिमा की अखिलेश यादव से मुलाकात ने समीकरण को और रोचक बना दिया है।

अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ‘तीसरा उम्मीदवार कौन?

’बड़ा सवाल यह है कि अखिलेश यादव ऐसा कौन सा नाम चुनेंगे, जो एक साथ पार्टी के सामाजिक समीकरण, मुस्लिम प्रतिनिधित्व, सहयोगी दलों के गणित और 2027 की राजनीतिक जमीन—चारों को साध सके।

राज्यसभा की तीसरी सीट पर सपा का अगला पत्ता अब लखनऊ की सियासत में सबसे ज्यादा इंतजार वाला पत्ता बन गया है।

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