बी के झा
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पटना, 18 अगस्त
बिहार की राजनीति में सोमवार को एक जुबानी चूक ने नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) कार्यालय में आयोजित पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की पुण्यतिथि श्रद्धांजलि सभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए गलती से दशरथ मांझी की जगह जीतन राम मांझी का नाम ले लिया। मंच पर मौजूद नेताओं के टोकते ही तेजस्वी ने तुरंत अपनी भूल सुधार ली, लेकिन तब तक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था।
इसके बाद केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संस्थापक जीतन राम मांझी ने सोशल मीडिया पर तीखा पलटवार करते हुए लिखा— “नशा शराब में होती तो नाचती बोतल… लगता है बाबू साहब का रात वाला उतरा नहीं था।”
क्या हुआ कार्यक्रम में?
पटना स्थित राजद प्रदेश कार्यालय में दशरथ मांझी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित थी। मंच पर तेजस्वी यादव जैसे ही बोलने के लिए खड़े हुए, उन्होंने कहा— “जीतन राम मांझी के श्रद्धांजलि समारोह में उपस्थित…”।मंच से तत्काल उन्हें टोका गया, जिसके बाद उन्होंने तुरंत कहा— “दशरथ मांझी जी…” और अपना भाषण आगे बढ़ाया। हालांकि कुछ सेकंड की यह चूक राजनीतिक बहस का विषय बन गई।
जीतन राम मांझी का तीखा हमला
वीडियो वायरल होने के बाद जीतन राम मांझी ने एक्स पर लिखा:- “नशा शराब में होती तो नाचती बोतल। लगता है बाबू साहब का रात वाला उतरा नहीं था। अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में जीते-जी अपने पिता लालू जी और राबड़ी जी को भी श्रद्धांजलि दे देंगे।”मांझी के इस बयान के बाद एनडीए नेताओं ने तेजस्वी पर निशाना साधते हुए इसे “गंभीर असावधानी” बताया।
राजद का पक्ष
राजद नेताओं ने इसे पूरी तरह जुबानी फिसलन (Slip of Tongue) करार दिया। पार्टी का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर लंबे भाषण के दौरान ऐसी मानवीय भूल हो सकती है और तेजस्वी ने उसी क्षण अपनी गलती सुधार भी ली थी। राजद ने आरोप लगाया कि विपक्ष इस छोटी चूक को राजनीतिक मुद्दा बना रहा है।
एनडीए की प्रतिक्रिया
बिहार एनडीए के नेताओं ने कहा कि दशरथ मांझी जैसी महान विभूति की पुण्यतिथि पर नाम भूल जाना संवेदनहीनता दर्शाता है। उनका कहना है कि जिन महापुरुषों के नाम पर राजनीति की जाती है, उनके प्रति सम्मान भाषणों में भी दिखाई देना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में छोटी-सी जुबानी गलती भी बड़े नैरेटिव में बदल जाती है। सोशल मीडिया के दौर में कुछ सेकंड का वीडियो पूरे दिन की राजनीतिक चर्चा तय कर देता है।विशेषज्ञों के अनुसार:* मंचीय भूल को जानबूझकर किए गए अपमान से अलग देखा जाना चाहिए।* लेकिन सार्वजनिक जीवन में नेताओं से तथ्य और भाषा दोनों में अतिरिक्त सावधानी की अपेक्षा रहती है।
शिक्षाविद और समाजसेवियों की प्रतिक्रिया
शिक्षाविदों का कहना है कि दशरथ मांझी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि संघर्ष, श्रम और सामाजिक परिवर्तन के प्रतीक हैं। इसलिए उनकी स्मृति से जुड़े कार्यक्रमों में राजनीतिक कटाक्ष के बजाय उनके जीवन मूल्यों पर चर्चा अधिक होनी चाहिए।सामाजिक संगठनों ने भी अपील की कि महापुरुषों की विरासत को दलगत विवाद से ऊपर रखा जाए।
कानूनविदों का दृष्टिकोण
कानून विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला मुख्यतः राजनीतिक और नैतिक विमर्श का है। यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध मानहानि या आपराधिक आरोप का प्रश्न नहीं बनता, तो ऐसी जुबानी चूक अपने आप में कानूनी अपराध नहीं मानी जाती।
सियासत का सार
तेजस्वी यादव की कुछ सेकंड की जुबानी गलती ने बिहार की राजनीति को नया मुद्दा दे दिया है। एक ओर राजद इसे मानवीय भूल बता रहा है, तो दूसरी ओर एनडीए इसे विपक्ष की गंभीर लापरवाही के रूप में पेश कर रहा है।
अब यह स्पष्ट है कि बिहार की चुनावी राजनीति में शब्द भी हथियार हैं और चूक भी सुर्खियां बन जाती है।
