बी के झा
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पटना, 23 अगस्त
बिहार में रोजगार और पलायन का मुद्दा लंबे समय से सियासत के केंद्र में रहा है। इसी बीच पटना में पांच दिन तक चले मेगा जॉब फेयर के समापन पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ऐसा ऐलान किया है, जिसने राज्य के लाखों युवाओं की उम्मीदों को नई दिशा देने का दावा किया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले वर्ष से बिहार के हर जिले में रोजगार मेला आयोजित किया जाएगा, ताकि युवाओं को नौकरी की तलाश में पटना या दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े।
पटना के ज्ञान भवन में आयोजित मेगा जॉब फेयर-2026 के समापन समारोह में मुख्यमंत्री ने चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। 19 से 23 अगस्त तक चले इस रोजगार मेले में 115 कंपनियों ने हिस्सा लिया और हजारों युवाओं को रोजगार के लिए चयनित किया गया।
20 हजार से ज्यादा युवाओं का चयन
सरकार के मुताबिक, रोजगार मेले में 20,226 युवाओं का नौकरी के लिए चयन किया गया। इनमें 3,940 युवाओं को बिहार में ही रोजगार देने के लिए चुना गया, जबकि 476 युवाओं का चयन विदेशों में रोजगार के लिए हुआ। शेष चयनित अभ्यर्थियों को देश के दूसरे राज्यों में स्थित कंपनियों में रोजगार के अवसर मिले। इस मेले की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दिव्यांग युवाओं की भागीदारी भी रही।
अधिकारियों के मुताबिक, 36 दिव्यांगजनों को भी नौकरी के लिए चयनित किया गया।सरकार का दावा है कि रोजगार मेले को केवल नियुक्ति तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कौशल और अवसर से जोड़ने के मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है।
अब हर जिले में लगेगा रोजगार का ‘दरबार’
’सम्राट चौधरी ने कहा कि अभी तक राज्य और प्रमंडल स्तर पर रोजगार मेले आयोजित किए जाते रहे हैं, लेकिन अब सरकार इसे जिला स्तर तक ले जाएगी।मुख्यमंत्री के मुताबिक, अगले साल से बिहार के प्रत्येक जिले में रोजगार मेला आयोजित होगा।
इसका उद्देश्य साफ है—स्थानीय युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही कंपनियों और रोजगार के अवसरों से जोड़ना।यह घोषणा ऐसे राज्य में खास महत्व रखती है जहां रोजगार के सीमित अवसरों के कारण बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते हैं।
सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में रोजगार के अवसरों का विकेंद्रीकरण कर इस प्रवृत्ति को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
पांच साल में एक करोड़ युवाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने सरकार के बड़े लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में एक करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि बिहार के किसी व्यक्ति को केवल जीवनयापन के लिए दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी न रहे।
हालांकि इस लक्ष्य को जमीन पर उतारना सरकार के लिए बड़ी चुनौती भी होगी। इसके लिए पर्याप्त निजी निवेश, उद्योगों की स्थापना, कौशल प्रशिक्षण और स्थायी रोजगार के अवसर पैदा करना जरूरी होगा।
तकनीकी शिक्षा और विदेश रोजगार पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में युवाओं को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने पर सरकार जोर दे रही है। उन्होंने तकनीकी संस्थानों में कम लागत पर शिक्षा की सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को रोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है।सरकार की ओर से लैंग्वेज क्लासेस की सुविधा दिए जाने की बात भी कही गई, ताकि बिहार के युवा विदेशों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकें।
सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सपनों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है।
गंगा किनारे 126 किलोमीटर का मरीन ड्राइव
रोजगार के साथ मुख्यमंत्री ने बिहार में चल रही आधारभूत संरचना की परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल पर गंगा के किनारे करीब 126 किलोमीटर लंबे मरीन ड्राइव का निर्माण किया जा रहा है।सरकार के मुताबिक, इस परियोजना पर लगभग 70 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें बिहार सरकार की ओर से करीब 20 हजार करोड़ रुपये और निजी क्षेत्र से लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश की बात कही गई है।सरकार का तर्क है कि बड़े बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं निवेश आकर्षित करेंगी और इनके माध्यम से प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की मांग
मुख्यमंत्री ने पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किए जाने की जानकारी भी दी। उनका कहना था कि ऐसा केंद्र स्थापित होने पर देश-दुनिया के लोगों और कंपनियों को बिहार से जोड़ा जा सकेगा और राज्य के युवाओं के लिए रोजगार तथा व्यापार के नए अवसर पैदा किए जा सकेंगे।सरकार की इस सोच का व्यापक उद्देश्य बिहार को केवल श्रम आपूर्ति करने वाले राज्य की छवि से बाहर निकालकर निवेश, व्यापार और रोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित करना है।
विश्व कौशल प्रतियोगिता में चमके बिहार के युवा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने चीन के शंघाई में आयोजित विश्व कौशल प्रतियोगिता-2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले बिहार के तीन युवाओं के परिवारों को भी सम्मानित किया।
इंडिया स्किल्स के गोल्ड मेडलिस्ट मौसम कुमार गिरी और मो. दिलखुश के परिजनों को एक-एक लाख रुपये, जबकि ब्रॉन्ज मेडलिस्ट आशीष राजवंश के परिजन को 50 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया।यह सम्मान समारोह रोजगार के साथ कौशल विकास को लेकर सरकार के संदेश का भी हिस्सा रहा।
सरकार यह संकेत देने की कोशिश कर रही है कि बिहार के युवाओं को केवल पारंपरिक सरकारी नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय वैश्विक कौशल प्रतियोगिता और निजी क्षेत्र के अवसरों के लिए भी तैयार किया जाए।
मानसिक स्वास्थ्य और दिव्यांग-ट्रांसजेंडर कौशल केंद्रों की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने रिमोट के माध्यम से भोजपुर स्थित बिहार मानसिक स्वास्थ्य एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान में मानसिक रोग से स्वस्थ हुए लोगों के पुनर्वास के लिए प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ किया।इसके अलावा दिव्यांगजन और ट्रांसजेंडर समुदाय के कौशल विकास तथा आजीविका संवर्द्धन के लिए प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत भी की गई।सरकार का कहना है कि रोजगार की नीति का लाभ समाज के उन वर्गों तक भी पहुंचाया जाना चाहिए, जो सामान्य रोजगार बाजार में अक्सर पीछे छूट जाते हैं।
तेजस्वी यादव का पलटवार—‘घोषणा नहीं, जवाब चाहिए’
मुख्यमंत्री के रोजगार संबंधी ऐलान पर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार की घोषणा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि केवल बड़े-बड़े दावे करने से बिहार की बेरोजगारी की समस्या खत्म नहीं होगी।तेजस्वी यादव ने सरकार पर धन उगाही और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप लगाते हुए पूछा कि बिहार में कथित गुंडागर्दी, घूसखोरी और ठेकेदारों द्वारा अवैध वसूली पर रोक कब लगेगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री के दावे पर भी सवाल उठाया कि आखिर हर जिले में ‘बंपर नौकरियां’ किस आधार पर उपलब्ध कराई जाएंगी।तेजस्वी ने यह भी सवाल उठाया कि आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग के लिए सरकार की रोजगार नीति में क्या प्रावधान है।
उन्होंने चिराग पासवान को लेकर भी मुख्यमंत्री पर राजनीतिक कटाक्ष किया और आरोप लगाया कि सरकार गठबंधन के दबाव में कई मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है।
अब असली परीक्षा घोषणा की नहीं, क्रियान्वयन की
बिहार की राजनीति में रोजगार का मुद्दा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सत्ता के लिए निर्णायक राजनीतिक मुद्दा भी रहा है। ऐसे में हर जिले में रोजगार मेले का ऐलान युवाओं तक सरकार की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।लेकिन सवाल केवल रोजगार मेला लगाने का नहीं है। असली चुनौती यह होगी कि कितने चयनित युवाओं को वास्तव में स्थायी और गुणवत्तापूर्ण रोजगार मिलता है, कितनी नौकरियां बिहार में रहती हैं और कितने युवाओं को मजबूरी में दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है।
20,226 युवाओं का चयन निश्चित रूप से रोजगार मेले की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है, लेकिन बिहार जैसे विशाल युवा आबादी वाले राज्य के लिए यह संख्या व्यापक जरूरत की तुलना में अभी शुरुआत भर है।
सरकार के सामने अब तीन बड़ी कसौटियां हैं—
रोजगार की संख्या, रोजगार की गुणवत्ता और रोजगार का स्थानीयकरण।यदि हर जिले में लगने वाले रोजगार मेले वास्तव में कंपनियों, उद्योगों और युवाओं के बीच स्थायी सेतु बन पाए, स्थानीय स्तर पर निवेश बढ़े और चयनित युवाओं को वास्तविक नियुक्ति मिले, तो यह पहल बिहार में रोजगार की तस्वीर बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
लेकिन यदि यह केवल नियुक्ति पत्र बांटने और मंच से बड़े-बड़े लक्ष्य घोषित करने तक सीमित रह गई, तो विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का पूरा अवसर मिलेगा।
बिहार के युवाओं को अब घोषणा नहीं, नौकरी चाहिए; आंकड़ा नहीं, रोजगार की जमीन पर दिखाई देने वाली हकीकत चाहिए। यही सम्राट चौधरी सरकार के इस बड़े रोजगार संकल्प की सबसे कठिन परीक्षा होगी।
