बिहारशरीफ के शिव मंदिर में पत्थरबाजी, थूकने और पेशाब करने का आरोप, CCTV में कैद तीन नाबालिग; तनाव के बाद पुलिस तैनात, मंदिर परिसर की घटना ने बढ़ाई बेचैनी, बजरंग दल ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

बी के झा

NSK news Ind

बिहारशरीफ / पटना , 14 सितंबर

बिहार के नालंदा जिले के बिहारशरीफ में एक शिव मंदिर परिसर में कथित तौर पर पत्थरबाजी, थूकने और पेशाब करने का मामला सामने आने के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। घटना शेरपुर-थवई मोहल्ले की बताई जा रही है। मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों में तीन नाबालिग लड़कों की गतिविधियां रिकॉर्ड होने का दावा किया गया है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

हालांकि, घटना को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर तरह-तरह के दावे सामने आ रहे हैं, लेकिन पुलिस जांच पूरी होने से पहले इसे किसी संगठित साजिश या सांप्रदायिक षड्यंत्र के रूप में घोषित करना उचित नहीं होगा। फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज और शिकायत के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है।

मंदिर पहुंचे युवक ने देखा बिखरे थे ईंट-पत्थर

जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम स्थानीय युवक सूरज पूजा करने के लिए मंदिर पहुंचे। मंदिर के आसपास ईंट-पत्थर बिखरे देखकर उन्होंने पहले इसे सामान्य घटना समझा और परिसर की गंदगी को साफ कर दिया। बाद में मंदिर में लगे CCTV कैमरों का फुटेज देखने पर कथित घटना सामने आई।फुटेज में शनिवार दोपहर करीब पौने तीन बजे तीन छोटे लड़के मंदिर के पास पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने मंदिर की ग्रिल के बाहर से परिसर की ओर पत्थर फेंके।

CCTV में कथित तौर पर मंदिर परिसर में पेशाब करने की घटना भी दिखाई देती है। ऑडियो रिकॉर्डिंग वाले कैमरों में कथित रूप से आपत्तिजनक और गाली-गलौज की आवाजें भी रिकॉर्ड हुई हैं।घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।

पुलिस के बयान में उम्र को लेकर अलग विवरण

पुलिस की ओर से जारी प्रेस बयान में कहा गया कि 4-5 वर्ष की उम्र के बच्चों द्वारा हनुमानजी की मूर्ति को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किए जाने की सूचना मिली थी। तीन बच्चों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। पुलिस को इस संबंध में लिखित आवेदन भी प्राप्त हुआ है।

वहीं स्थानीय लोगों का दावा है कि CCTV में दिखाई दे रहे बच्चों की उम्र करीब 9-10 वर्ष हो सकती है। स्थानीय स्तर पर यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि इतनी कम उम्र के बच्चों ने किसी के उकसावे या बहकावे में आकर यह हरकत की होगी। हालांकि इस दावे की भी पुलिस जांच से पुष्टि होना बाकी है।

बजरंग दल ने मंदिर पहुंचकर लिया जायजा

रविवार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मंदिर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। संगठन का कहना है कि धार्मिक स्थल पर इस प्रकार की घटना को सामान्य शरारत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

हिन्दू समाज के स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से CCTV फुटेज की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराने, बच्चों के अभिभावकों की जानकारी लेने और यदि किसी वयस्क द्वारा उन्हें उकसाने या निर्देश देने का प्रमाण मिले तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की मांग की है।

कानूनविदों की नजर में जांच का दायरा अहम

कानून विशेषज्ञों के अनुसार, मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि CCTV में दिखाई देने वाले बच्चों की वास्तविक उम्र क्या है और घटना के पीछे उनका उद्देश्य क्या था। यदि आरोपी वास्तव में नाबालिग हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के अनुरूप ही होगी।कानूनविदों का यह भी कहना है कि यदि जांच में किसी वयस्क द्वारा बच्चों को उकसाने, धार्मिक स्थल को निशाना बनाने या सामुदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश के प्रमाण सामने आते हैं तो जांच का दायरा उन लोगों तक भी पहुंचना चाहिए।

धर्माचार्यों ने संयम की अपील की

हिन्दू धर्माचार्यों ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा है कि मंदिर और किसी भी धार्मिक स्थल की पवित्रता के साथ खिलवाड़ समाज में आक्रोश पैदा कर सकता है। उनका कहना है कि दोषी चाहे किसी भी समुदाय या उम्र का हो, कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।साथ ही धर्माचार्यों ने हिन्दू समाज से अपील की कि वह अफवाहों और अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा न करे तथा प्रशासन को जांच पूरी करने का अवसर दे।

मुस्लिम समाज की ओर से भी जांच में सहयोग की अपेक्षा

स्थानीय मुस्लिम समुदाय के जिम्मेदार लोगों और मौलानाओं से भी प्रशासन द्वारा शांति बनाए रखने और किसी भी अफवाह को फैलने से रोकने की अपील की गई है। सामाजिक सौहार्द के लिए यह आवश्यक है कि किसी बच्चे की कथित हरकत को पूरे समुदाय से जोड़कर न देखा जाए।

मुस्लिम समाज के जिम्मेदार लोगों की ओर से भी यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों की निंदा और कानून के मुताबिक कार्रवाई का समर्थन किया जाना चाहिए। इसी तरह हिन्दू समाज की ओर से भी पूरे समुदाय को कटघरे में खड़ा करने के बजाय दोषी व्यक्ति या घटना के वास्तविक जिम्मेदारों पर ध्यान केंद्रित करना सामाजिक शांति के लिए जरूरी है।

राजनीतिक बयानबाजी से पहले जांच जरूरी

बिहार में एनडीए सरकार के सामने इस घटना की सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक विश्वास बनाए रखने की है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और साथ ही निर्दोष लोगों को अफवाहों के आधार पर निशाना भी नहीं बनने दिया जाएगा।

सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं की ओर से सामान्यतः ऐसे मामलों में प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।

वहीं विपक्षी दल सरकार से कानून-व्यवस्था की स्थिति स्पष्ट करने, CCTV फुटेज सार्वजनिक जांच के दायरे में लाने और यह पता लगाने की मांग कर सकते हैं कि घटना के पीछे कोई बड़ी वजह तो नहीं थी।

विपक्ष के लिए भी यह जरूरी होगा कि वह घटना को राजनीतिक ध्रुवीकरण का हथियार बनाने के बजाय सरकार से निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग करे।

राजनीतिक विश्लेषकों के सामने बड़ा सवाल—शरारत या किसी ने कराया?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बिहारशरीफ जैसे संवेदनशील सामाजिक ताने-बाने वाले शहर में धार्मिक स्थल से जुड़ी छोटी घटना भी तेजी से राजनीतिक और सामुदायिक रंग ले सकती है। इसलिए इस मामले में दो अतियों से बचना होगा—पहली, घटना को महज बच्चों की शरारत मानकर पूरी तरह नजरअंदाज करना और दूसरी, जांच पूरी होने से पहले इसे सुनियोजित सांप्रदायिक साजिश घोषित कर देना।

यदि बच्चों ने स्वतः ऐसा किया है तो मामला एक प्रकार का है। लेकिन यदि CCTV और अन्य साक्ष्यों से यह सामने आता है कि किसी ने उन्हें उकसाया, भेजा या धार्मिक तनाव पैदा करने के उद्देश्य से उनका इस्तेमाल किया, तो मामला कहीं अधिक गंभीर हो जाएगा।

प्रशासन के सामने पांच बड़े सवाल

1. CCTV फुटेज में दिखाई दे रहे बच्चों की वास्तविक उम्र कितनी है?

2. क्या तीनों बच्चे एक-दूसरे को जानते हैं और उनके साथ कोई वयस्क व्यक्ति भी था?

3. मंदिर में पत्थर फेंकने और कथित अपमानजनक हरकत का उद्देश्य क्या था?

4. क्या घटना से पहले या बमां में किसी व्यक्ति ने बच्चों से संपर्क किया?

5. क्या घटना के पीछे केवल बच्चों की शरारत थी या किसी ने उन्हें उकसाया था?

इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

बिहारशरीफ में शांति सबसे बड़ी प्राथमिकता

फिलहाल पुलिस की तैनाती और स्थानीय प्रशासन की निगरानी इस बात का संकेत है कि प्रशासन घटना की संवेदनशीलता को समझ रहा है। जरूरत इस बात की है कि CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और लिखित शिकायत के आधार पर तथ्य सामने लाए जाएं।

धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल आरोपी को पकड़ना नहीं, बल्कि सच को सामने लाना और समाज में भरोसा बनाए रखना भी है।

बिहारशरीफ में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंदिर परिसर में आखिर हुआ क्या था और उसके पीछे वास्तविक मंशा क्या थी।

इसका उत्तर भावनाओं या राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और प्रमाणों से मिलना चाहिए।

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