बी के झा
NSK news Ind

नई दिल्ली, 21 सितंबर
राजनीति का मैदान अब केवल रैलियों, जनसभाओं और बूथों तक सीमित नहीं है। चुनावी राजनीति का एक बड़ा मोर्चा मोबाइल स्क्रीन पर भी खुल चुका है। इसी बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपने डिजिटल नेटवर्क को और धार देने की कवायद तेज कर दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने रविवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सोशल मीडिया कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए संगठन की डिजिटल पहुंच, सोशल मीडिया प्रबंधन और भविष्य की रणनीति पर विस्तृत मंथन किया।
कार्यशाला में देशभर से भाजपा के सोशल मीडिया पदाधिकारी और राज्य स्तरीय डिजिटल टीम से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भाजपा अपनी नई राष्ट्रीय टीम के साथ संगठनात्मक गतिविधियों को गति दे रही है और कई राज्यों में आगामी चुनावों को देखते हुए डिजिटल संचार की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है।
सोशल मीडिया अब संगठन का अहम मोर्चा
नितिन नवीन ने कार्यशाला के दौरान संगठन के डिजिटल प्रयासों को और प्रभावी बनाने तथा भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने सोशल मीडिया पदाधिकारियों से संवाद करते हुए संगठनात्मक गतिविधियों और आगे की कार्ययोजनाओं पर विचार-विमर्श किया।नवीन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने भाजपा मुख्यालय में राष्ट्रीय सोशल मीडिया कार्यशाला का उद्घाटन किया और देशभर से आए सोशल मीडिया पदाधिकारियों को संबोधित किया। उनके मुताबिक, संवाद के दौरान संगठन के डिजिटल प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाने और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा हुई।यह संकेत महत्वपूर्ण है कि भाजपा डिजिटल प्लेटफॉर्म को केवल प्रचार के माध्यम के तौर पर नहीं, बल्कि संगठन और जनता के बीच संवाद के एक प्रमुख माध्यम के रूप में देख रही है।
नई टीम के साथ नई डिजिटल दिशा
कार्यशाला में भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक दीपक म्हास्के भी मौजूद रहे। पार्टी ने अगस्त में म्हास्के को राष्ट्रीय सोशल मीडिया संयोजक की जिम्मेदारी दी थी। उनके साथ सोशल मीडिया के राष्ट्रीय सह-संयोजकों के रूप में प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट और अरुण यादव को जिम्मेदारी दी गई है।बैठक में भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी समेत संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे। नई टीम के गठन के बाद देशभर के राज्य सोशल मीडिया पदाधिकारियों के साथ यह शुरुआती बड़े स्तर की बैठक थी।
Gen-Z पर नजर, बदलते डिजिटल ट्रेंड के मुताबिक रणनीति
भाजपा की डिजिटल रणनीति में युवा वर्ग, खासकर Gen-Z, को लेकर भी विशेष जोर दिखाई दे रहा है। कार्यशाला से पहले सामने आई जानकारी के मुताबिक पार्टी की डिजिटल टीम बदलते प्लेटफॉर्म और युवाओं की डिजिटल आदतों के अनुरूप संचार रणनीति तैयार करने पर चर्चा करने वाली थी।आज की युवा पीढ़ी राजनीति को केवल पारंपरिक माध्यमों से नहीं देखती।
छोटे वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट,
लाइव इंटरैक्शन और अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म राजनीतिक संवाद के महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए चुनौती केवल ज्यादा लोगों तक पहुंचना नहीं, बल्कि बदलती डिजिटल भाषा में अपनी बात प्रभावी ढंग से रखना भी है।
चुनावी तैयारी में डिजिटल मोर्चे की अहमियत
कार्यशाला की चर्चा का एक अहम पहलू आगामी चुनावों को लेकर डिजिटल तैयारियां भी रहा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा की डिजिटल टीम चुनावी तैयारियों, जनसंपर्क और संगठनात्मक अभियानों को सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाने पर विचार कर रही है।पार्टी के लिए इसका अर्थ यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर तय संदेशों को राज्य, जिला और स्थानीय स्तर तक तेजी से पहुंचाने के लिए डिजिटल नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाए। साथ ही स्थानीय मुद्दों, सरकार के कामकाज और संगठनात्मक गतिविधियों को अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करने की रणनीति पर भी जोर है।’गलत सूचना’ के जवाब की रणनीति भी चर्चा में कार्यशाला से जुड़ी रिपोर्टों में भाजपा की डिजिटल टीम द्वारा विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस और राहुल गांधी से संबंधित सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे कथित गलत दावों का जवाब देने की रणनीति पर चर्चा का भी उल्लेख है। यह पार्टी सूत्रों/रिपोर्टों में सामने आया पक्ष है; इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज को जनता तक पहुंचाने और सदस्यता जैसे संगठनात्मक अभियानों में डिजिटल माध्यमों की भूमिका पर भी चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
बूथ से मोबाइल स्क्रीन तक संगठन का विस्तार
भाजपा की राजनीति में बूथ स्तर के संगठन को लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। अब इसी संगठनात्मक ढांचे के साथ डिजिटल नेटवर्क को जोड़ने की कोशिश दिखाई दे रही है। राष्ट्रीय नेतृत्व से लेकर राज्य और स्थानीय सोशल मीडिया टीमों तक एक समन्वित डिजिटल तंत्र तैयार करना पार्टी की आगामी रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।नितिन नवीन की अध्यक्षता में हुई यह कार्यशाला इसी बदलाव की ओर संकेत करती है—जहां संगठन की ताकत केवल मैदान में मौजूद कार्यकर्ताओं की संख्या से नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उसकी पहुंच, संवाद और प्रतिक्रिया की गति से भी तय होती है।
एन एस के विश्लेषण:
राजनीति की तस्वीर तेजी से बदल रही है। जिस तरह कभी पोस्टर, पर्चे और जनसभाएं राजनीतिक संदेश का प्रमुख माध्यम थीं, उसी तरह आज सोशल मीडिया राजनीतिक संवाद का बड़ा अखाड़ा बन चुका है।
भाजपा की नई डिजिटल कवायद बताती है कि पार्टी आने वाले दौर में संगठन, तकनीक और जनसंपर्क को एक साथ साधने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि राष्ट्रीय स्तर पर तैयार की जाने वाली डिजिटल रणनीति राज्य और जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती है।
