Chandigarh News; पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राघव चड्ढा का नाम गायब, सियासी संग्राम तेज; बोले- ‘यह गलती नहीं, राजनीतिक प्रतिशोध’

बी के झा

NSK news Ind

चंडीगढ़, 3 सितंबर

पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची में बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम नहीं मिलने से प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में चड्ढा की मतदाता प्रविष्टि को ‘पर्मानेंटली शिफ्टेड’ यानी स्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है। इस पर चड्ढा ने तीखी आपत्ति जताते हुए इसे सामान्य प्रशासनिक या क्लेरिकल गलती मानने से इनकार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध के तहत यह कार्रवाई की गई है।चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट के जरिए अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर आईडी मोहाली में पंजीकृत है।

उन्होंने दावा किया कि उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में मोहाली में ही मतदान किया था, इसके बावजूद मौजूदा ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में उन्हें ‘शिफ्टेड’ के तौर पर दर्ज कर दिया गया।हालांकि, चड्ढा ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है और अंतिम सूची अभी प्रकाशित नहीं हुई है। उनके मुताबिक, नाम को दोबारा शामिल कराने के लिए चुनाव आयोग की ओर से दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है और वह इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना दावा पेश कर रहे हैं। अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित होनी है।

‘नाम हटना महज क्लेरिकल गलती नहीं

’राघव चड्ढा ने अपने आरोपों को और गंभीर बनाते हुए सवाल उठाया कि आखिर उन्हें ‘पर्मानेंटली शिफ्टेड’ किस अधिकारी ने चिह्नित किया, किसने इस प्रविष्टि का सत्यापन किया और किस स्तर पर इसे आगे बढ़ाया गया?

उनका आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी प्रक्रिया में राज्य सरकार के अधिकारी चुनावी ड्यूटी निभा रहे हैं और अधिकारियों की पोस्टिंग, ट्रांसफर तथा करियर से जुड़े मामलों में राज्य सरकार के प्रभाव के चलते उन पर राजनीतिक दबाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।चड्ढा का कहना है कि इसलिए उनके नाम को ‘शिफ्टेड’ बताने की पूरी प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।

हालांकि, उनके इन आरोपों पर पंजाब सरकार और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

AAP का पलटवार- ‘SIR चुनाव आयोग कराता है, सरकार नहीं’

चड्ढा के आरोपों पर आम आदमी पार्टी ने भी पलटवार किया है। AAP का कहना है कि Special Intensive Revision (SIR) का संचालन चुनाव आयोग करता है, पंजाब सरकार नहीं। पार्टी ने आरोप लगाया कि चड्ढा दिल्ली में अपना मतदाता पंजीकरण कराने की कोशिश से जुड़े विवाद से ध्यान भटकाने के लिए AAP और पंजाब सरकार पर आरोप लगा रहे हैं।

AAP ने कहा कि सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार राघव चड्ढा अब पंजाब में नहीं, बल्कि दिल्ली में रह रहे हैं। ऐसे में उनका मतदाता पंजीकरण कहां होना चाहिए, यह तय करना और जरूरत पड़ने पर उसे स्थानांतरित कराना उनकी जिम्मेदारी है।पार्टी ने यह भी कहा कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम शामिल करना या हटाना चुनाव आयोग की प्रक्रिया है और इसमें पंजाब सरकार की वह भूमिका नहीं है, जैसा कि चड्ढा अपने आरोपों में दावा कर रहे हैं।

AAP छोड़ने के बाद बढ़ी तल्खी का हवाला

राघव चड्ढा ने अपने आरोपों को अपने राजनीतिक सफर से भी जोड़ दिया है। उनका दावा है कि AAP छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद से पार्टी नेतृत्व उनसे राजनीतिक रूप से नाराज है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पंजाब पुलिस और राज्य की प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।चड्ढा ने यह भी दावा किया कि AAP छोड़कर बीजेपी में आए अन्य सांसदों को भी पंजाब सरकार की ओर से निशाना बनाया गया है।

उनके मुताबिक, मतदाता सूची में उन्हें ‘पर्मानेंटली शिफ्टेड’ दिखाया जाना भी इसी कथित राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।

‘प्रोटेक्टेड लिस्ट’ पर भी उठाया सवाल

विवाद के बीच चड्ढा ने चुनाव आयोग की SIR गाइडलाइंस के पैराग्राफ 4(d) का भी हवाला दिया है। उनका दावा है कि इसमें सांसदों, विधायकों, न्यायपालिका से जुड़े व्यक्तियों और कुछ अन्य सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के नामों को ‘प्रोटेक्टेड लिस्ट’ में रखने का प्रावधान है, ताकि दावे और आपत्तियों की अवधि के दौरान जरूरी दस्तावेजों की जांच की जा सके।

चड्ढा का तर्क है कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं। ऐसे में यदि उनकी मतदाता प्रविष्टि पर कोई सवाल या आपत्ति थी, तब भी संबंधित प्रावधान के तहत उनका नाम ड्राफ्ट रोल में शामिल रखा जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मामले में इस प्रावधान की जानबूझकर अनदेखी की गई।

अब असली सवाल- गलती या राजनीतिक खेल?

राघव चड्ढा के आरोपों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर भी राजनीतिक बहस छेड़ दी है। एक तरफ AAP इसे चुनाव आयोग की प्रक्रिया बताते हुए राज्य सरकार को पूरे विवाद से अलग कर रही है, वहीं चड्ढा का दावा है कि पूरी प्रक्रिया में राज्य के अधिकारी शामिल हैं और उनके नाम को ‘शिफ्टेड’ चिह्नित किया जाना सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो सकती।

फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। ड्राफ्ट सूची में नाम गायब होना अंतिम स्थिति नहीं है और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में बदलाव संभव है। लेकिन इस विवाद ने एक साधारण मतदाता प्रविष्टि को पंजाब की सियासत में ‘वोटर लिस्ट बनाम राजनीतिक प्रतिशोध’ की नई बहस में जरूर बदल दिया है।

चड्ढा ने अपने बयान के अंत में तीखा सवाल खड़ा करते हुए कहा कि AAP पंजाब की सत्ता चला सकती है, लेकिन पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट उसकी निजी संपत्ति नहीं है।

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