बी के झा
NSK news Ind


नई दिल्ली, 13 सितंबर
राजनीति में कई बार एक तस्वीर महज तस्वीर नहीं रहती, बल्कि उसके पीछे छिपे राजनीतिक संदर्भ बहस का विषय बन जाते हैं। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की गई छोले-भटूरे की तस्वीर भी कुछ इसी तरह चर्चा में आ गई है। राहुल गांधी ने तस्वीर के साथ भारतीयों के खान-पान और मांसाहारी भोजन का जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “जानकारी के लिए बता दें कि 80% भारतीय मांसाहारी हैं।
भारतीय मांसाहारी खाना बहुत स्वादिष्ट होता है। और मेरी बहन के छोले-भटूरे भी।
” पोस्ट से संकेत मिलता है कि छोले-भटूरे उनकी बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बनाए थे।राहुल गांधी की यह पोस्ट ऐसे समय आई है, जब राजधानी दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच भारत की कूटनीतिक सक्रियता चरम पर है। इसी दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से भी मुलाकात की।
कांग्रेस की ओर से साझा की गई तस्वीरों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच नाश्ते पर बातचीत हुई। बताया गया कि चर्चा भारत-मलेशिया संबंधों सहित विभिन्न मुद्दों पर हुई।मोदी से मुलाकात के अगले दिन राहुल-प्रियंका से मुलाकात अनवर इब्राहिम की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात इसलिए भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी क्योंकि इससे एक दिन पहले ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।
मोदी और इब्राहिम की बातचीत में व्यापार, सेमीकंडक्टर, बुनियादी ढांचे और रक्षा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई थी। यह बैठक नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई थी।
मलेशिया ब्रिक्स का साझेदार देश है
यानी एक ही दौर में मलेशियाई प्रधानमंत्री की भारत के प्रधानमंत्री के साथ आधिकारिक बातचीत और फिर प्रमुख विपक्षी नेताओं राहुल गांधी एवं प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ अनौपचारिक अंदाज में नाश्ते पर मुलाकात—यह क्रम स्वाभाविक रूप से राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा पैदा कर रहा है।
पहलगाम पर सवाल क्यों उठ रहा है?
इस पूरे घटनाक्रम में एक और मुद्दा बहस को धार दे रहा है—पहलगाम आतंकी हमले को लेकर मलेशियाई प्रधानमंत्री के रुख का सवाल।
एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर कहा कि अनवर इब्राहिम की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात को लेकर किसी तरह का निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यों को सामने रखना जरूरी है, लेकिन ऐसी मुलाकातों और बयानों से पैदा होने वाले सवालों का जवाब सार्वजनिक रूप से दिया जाना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि मलेशियाई प्रधानमंत्री का राहुल-प्रियंका के साथ अचानक नाश्ते पर मिलना और दूसरी ओर पहलगाम आतंकी हमले के संदर्भ में उनके रुख को लेकर उठ रहे सवाल आखिर किस व्यापक राजनीतिक-कूटनीतिक संदर्भ की ओर इशारा करते हैं?
हालांकि, इस टिप्पणी को किसी गुप्त संबंध या राजनीतिक समझौते का प्रमाण नहीं माना जा सकता। लेकिन सवाल यह जरूर है कि कांग्रेस और गांधी परिवार इस मुलाकात की प्रकृति और बातचीत के मुद्दों को जनता के सामने कितनी स्पष्टता से रखते हैं।
ब्रिक्स का मंच, भारतीय व्यंजनों की मेजबानी और बदलती कूटनीति
उधर ब्रिक्स सम्मेलन का दूसरा और अंतिम दिन भारत की कूटनीतिक मेजबानी और सांस्कृतिक विविधता का भी प्रदर्शन कर रहा है। सम्मेलन के पहले दिन भारत मंडपम में विदेशी मेहमानों के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय व्यंजनों को आधुनिक और शाही अंदाज में प्रस्तुत किया गया।मेहमानों के लिए तैयार शाकाहारी मेनू में भारत के अलग-अलग हिस्सों की पाक परंपराओं की झलक दिखाई दी।
स्टार्टर में खांडवी मिल-फॉय और खुंब गलौटी जैसे व्यंजन परोसे गए।
मुख्य भोजन में पनीर लबाबदार,
गुच्छी मार्मिक,
कैरेट बीन पोरीयल,
तक्कली बेले सारू,
मिलेट पुलाव,
बीटरूट रायता और भारतीय रोटियों तथा नान की विविधता शामिल रही।ऐसे में एक तरफ भारत विश्व मंच पर अपनी सांस्कृतिक और कूटनीतिक ताकत प्रदर्शित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर देश की राजनीति में नेताओं की छोटी-बड़ी मुलाकातें भी बड़े राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन रही हैं।
तस्वीर छोटी, सवाल बड़ा
राहुल गांधी की छोले-भटूरे वाली पोस्ट अपने आप में एक घरेलू और हल्की-फुल्की सोशल मीडिया पोस्ट हो सकती है। लेकिन उसी दिन राहुल-प्रियंका की मलेशियाई प्रधानमंत्री से मुलाकात ने इसे एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बीच ला खड़ा किया है।लोकतंत्र में सवाल उठना अस्वाभाविक नहीं है और सवालों का जवाब देना भी किसी राजनीतिक दल के लिए कमजोरी नहीं, बल्कि पारदर्शिता का संकेत होता है।
इसलिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह नहीं कि छोले-भटूरे किसने बनाए, बल्कि यह है कि राहुल गांधी-प्रियंका गांधी और अनवर इब्राहिम की मुलाकात में क्या चर्चा हुई और उससे जुड़े राजनीतिक सवालों पर कांग्रेस का आधिकारिक पक्ष क्या है।
एनएसके का मानना है कि लोकतंत्र में तस्वीरों से ज्यादा महत्वपूर्ण उनके पीछे की पारदर्शिता होती है।
जब मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़ी हों और उसी समय आतंकवाद जैसे गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर सवाल उठ रहे हों, तब जनता के सवालों को नजरअंदाज करने के बजाय स्पष्ट जवाब सामने आना चाहिए।
